भारत लगातार अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से मजबूत करता जा रहा है। हाल ही में जेपी मॉर्गन चेस के चेयरमैन और सीईओ जेमी डाइमन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले 10 साल में लगभग तीन गुना हो सकती है। उन्होंने सीएनबीसी-टीवी18 से बात करते हुए कहा कि अगर 10 साल बाद मिलें तो अर्थव्यवस्था मौजूदा आकार से तीन गुना बड़ी हो सकती है। डाइमन का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जेपी मॉर्गन दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में से एक है, जिसके पास करीब 3.2 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है। भारत में 2019 से उसने विभिन्न उद्योगों को 80 अरब डॉलर का क्रेडिट और पूंजी दी है। 2015 से उसने 90 मिलियन डॉलर की परोपकारी मदद भी की है।
पहले के जीडीपी लक्ष्यों की कहानी
सरकार लंबे समय से 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य लेकर चल रही थी। 2018 में विश्व आर्थिक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। उस समय भारत की जीडीपी 2.7 ट्रिलियन डॉलर थी। बाद में उन्होंने यह लक्ष्य 2022 तक आगे बढ़ा दिया था। आईएमएफ के आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के अंत तक (आईएमएफ इसे 2025 कहता है) भारत की जीडीपी 3.9 ट्रिलियन डॉलर रही। समय के साथ 5 ट्रिलियन का लक्ष्य विकसित भारत 2047 में बदल गया, जिसमें 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का जिक्र किया जाता है। पिछले साल अक्टूबर में बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि 20-25 साल में भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
क्या 10 साल में तीन गुना होना संभव है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि गणना रुपये में हो रही है या अमेरिकी डॉलर में। आमतौर पर भारत की जीडीपी पहले रुपये में नापी जाती है। इसे नॉमिनल जीडीपी कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए इसे डॉलर में बदला जाता है, जो रुपये-डॉलर के एक्सचेंज रेट से होता है। रुपये की कीमत हर साल डॉलर के मुकाबले कमजोर होती जाती है। 2014 से 2026 के बीच रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले सालाना करीब 3.2 प्रतिशत घटी है। इसलिए डॉलर में तीन गुना होना रुपये की तुलना में काफी मुश्किल है। यहां सारी गणना नॉमिनल जीडीपी की है, रियल जीडीपी की नहीं (जिसमें महंगाई का असर हटा दिया जाता है)।
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डॉलर में तीन गुना करने के लिए क्या चाहिए
2014 से 2026 के बीच भारत की जीडीपी डॉलर में सालाना औसतन 6.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2036 में जीडीपी करीब 7.6 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। 2026 में यह करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर है, तो तीन गुना मतलब करीब 12.5 ट्रिलियन डॉलर। इसके लिए डॉलर में सालाना 11.6 प्रतिशत की वृद्धि चाहिए, जो पिछले 12 साल की दर से लगभग दोगुनी है। डॉलर में इतनी वृद्धि के लिए रुपये में नॉमिनल जीडीपी को सालाना करीब 14.7 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ना होगा। 2014 से 2025 के बीच रुपये में नॉमिनल जीडीपी सालाना औसतन 10 प्रतिशत बढ़ी थी। यह आंकड़ा पुरानी जीडीपी श्रृंखला पर आधारित है, जिसे इस साल पहले ओवरस्टेटिंग के कारण हटा दिया गया था।
रुपये में तीन गुना करना कितना आसान
रुपये में तीन गुना करने के लिए नॉमिनल जीडीपी को सालाना औसतन 11.6 प्रतिशत बढ़ना होगा। यह पिछले 10 प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन डॉलर वाले 14.7 प्रतिशत से कहीं आसान है।
डाइमन किसकी बात कर रहे होंगे?
अंतरराष्ट्रीय निवेशक डॉलर में निवेश करते हैं, इसलिए उनके लिए डॉलर में रिटर्न ही मायने रखता है। अगर रुपये में 10 प्रतिशत वृद्धि हो लेकिन उसी साल रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 10 प्रतिशत गिर जाए तो डॉलर में वृद्धि शून्य हो जाती है। विदेशी निवेशक भी अपने रिटर्न इसी तरह देखते हैं। इसलिए ज्यादा संभावना है कि वे डॉलर में तीन गुना की उम्मीद कर रहे हों।

















