लादेन के फैन इमाम को 9/11 पर मिला सम्मान: चौतरफा घिरी कैंटरबरी चर्च, भारी विरोध के बाद अवॉर्ड वापस!
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लादेन के फैन इमाम को 9/11 पर मिला सम्मान: चौतरफा घिरी कैंटरबरी चर्च, भारी विरोध के बाद अवॉर्ड वापस!

कैंटरबरी की आर्कबिशप और लेम्बेथ पैलेस के फैसले पर भड़के लोग; सांसदों ने भी उठाए सवाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Sep 19, 2026, 08:00 pm IST
inविश्व
archbishop of canterbury revokes-award-to pro osama imam tahir ashrafi

क्या पश्चिम के देशों में इस बात की कल्पना की जा सकती है कि 9 सितंबर 2011 की बरसी वाले एक कोई आर्कबिशप किसी इमाम को इस बात के लिए सम्मानित कर सकती है, कि इमाम ने रिलीजिंस के बीच परस्पर सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया है और हर संभव कदम उठाए हैं।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य तो यह था कि यह कथित सम्मान 9/11 की बरसी पर दिया गया था और उस दिन पूरा विश्व अमेरिका पर हुए आतंकी हमले की 25 वीं बरसी मना रहा था। एक तरफ वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर थीं और दूसरी तरफ इमाम और उनकी बीवी की अवार्ड लेते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई थीं।

क्यों हुआ विरोध

हालांकि किसी इमाम को इस तरह अवॉर्ड देना तो बहस या चर्चा का विषय नहीं हो सकता था और न ही विरोध का। मगर जैसे ही इमाम तारिफ़ अशर्फी की तस्वीरें वायरल हुईं, वैसे ही लोगों ने इमाम का वह इतिहास भी सामने आया, जो 9/11 से ही जुड़ा था।

इमाम अशर्फी पाकिस्तान से है और वह वहाँ पर पाकिस्तान उलेमा काउंसल के अध्यक्ष रह चुके हैं। और वर्ष 2007 में जब ब्रिटेन ने सलमान रुश्दी को “सर” की उपाधि दी थी, तो काउंसिल ने उसके विरोध में “ओसामा बिन लादेन” को “सैफुल्लाह” से नवाजा था।

इमाम ने जून 2007 में एक बयान में कहा था कि अगर एक बेअदबी करने वाले को यह जानते हुए भी कि उसने मुसलमानों की भावनाओं को आहत किया है, सर की उपाधि दी जा सकती है, तो रूसियों, अमेरिकियों और अंग्रेजों के खिलाफ इस्लाम के लिए लड़ने वाले ओसामा को इस्लाम बड़ी उपाधि “सैफुल्लाह” क्यों नहीं दी जा सकती?

जैसे ही यह तस्वीर वायरल हुई, वैसे ही लोगों के विचारर आने आरंभ हो गए कि आखिर यह सब कैसे हो सकता है? यह कितना बेहूदा है?

सबसे बढ़कर इमाम की बीवी ऊपर से नीचे तक काले बुर्के में थी और उसकी केवल और केवल आँखें ही झांक रही थीं। लोगों ने प्रश्न किये कि यह कैसी तस्वीर है? यह कैसी कट्टर तस्वीर है? क्योंकि उसकी बीवी के गले में वह अवार्ड का मेडल था। यह कहा जा रहा है कि चूंकि वह किसी गैर औरत से मेडल नहीं पहन सकते थे, इसलिए इमाम की बीवी को वह मेडल पहनाया गया।

इमाम के कई बयान वायरल हुए, जिसमें इमाम ने अफगानिस्तान में की जा रही बमबारी को भी सही ठहराया था। 2013 में उसने यह कहा था कि “अफगानिस्तान में फिदायीन हमले जायाज हैं, जब तक कि अमेरिकी सेना वहाँ पर है!”

इतना ही नहीं इमाम ने बेअदबी के कठोर से कठोर कानून की भी वकालत कई बार की। पश्चिम में रहते हुए भी पश्चिम विरोधी बयान दिए और अब वे वायरल हो रहे हैं।

लोगों ने पूछा कि आखिर ऐसी क्या आवश्यकता आन पड़ी थी कि आर्कबिशप ने ऊपर से नीचे तक काले बुर्के में कैद महिला पर कोई बात न करते हुए इमाम को यह अवार्ड दिया? एक यूजर ने पोस्ट लिखा कि हर कोई चर्च ऑफ इंग्लैंड की 9/11 की तस्वीर पर बात कर रहा है, मगर उस गुस्से को अगर किनारे कर दिया जाए, तो भी मैं उस महिला से आँखें नहीं हटा पा रही हूँ, जिसकी केवल दो आँखें ही झांक रही हैं।

काबुल में मोरलिटी पुलिस यह पर्दा करवा रही है तो वहीं लंदन में हम खुद ही यह आजादी के नाम पर कर रहे हैं। क्यों मानवाधिकार कार्यकर्ता, जो पैट्रियार्की कंट्रोल की बातें करते हुए थकते नहीं हैं, वे इस विषय में नहीं बोल रहे हैं? क्या इस कारण कि आखिर कौन इसका पालन कर रहा है?

Everyone’s talking about the Church of England 9/11 award photo. But the underlying outrage aside, I can’t stop looking at the woman in the middle, visible only through a slit for her eyes.

In Kabul the morality police enforce that covering. In London we pretend it is freedom.… pic.twitter.com/2X29dgLCmn

— Trisha Posner (@trishaposner) September 18, 2026

क्यों लिया गया अवार्ड वापस?

मगर यह अवॉर्ड जल्द ही निरस्त कर दिया गया। लोगों का विरोध बढ़ा और जैसे ही इमाम के बयान सार्वजनिक होने लगे वैसे ही लंबेथ पैलेस ने एक बयान जारी करते हुए इस अवार्ड को वापस लेने की घोषणा की। यह घोषणा की गई कि अशर्फी के पुराने विचारो को जानने के बाद अशर्फी द्वारा इन्टरफैथ वर्क को लेकर दिया गया अवार्ड वापस लिया जाता है, हालंकी पैलेस ने अशर्फी के कामों की तारीफ की।

बयान में कहा गया कि अशर्फी को यह अवार्ड पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और विशेषकर ईसाइयों के प्रति किये गए अच्छे कामों के कारण दिया गया था, जिसकी तारीफ पाकिस्तान के ईसाइयों ने और विशेषकर एंग्लिकन चर्च ने भी कि थी।

यह भी लिखा था, हमें मतभेदों के बाद भी एक दूसरे के अच्छे कामों का समर्थन करना चाहिए। हालांकि इमाम अशर्फी के कुछ बयान जो पैलेस के सामने आए, उससे अवार्ड पर पुनर्विचार किया गया और अंतत: इस अवार्ड को वापस लिए जाने की घोषणा की जाती है। और इमाम को इस फैसले के विषय में बता दिया गया है।

हालांकि इमाम का कहना है कि इमाम के पुराने बयानों को संदर्भ से परे दिखाकर छवि खराब करने की कोशिश की गई।

राजनीति भी तेज

इस मामले को लेकर ब्रिटेन में राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। शैडो जस्टिस सेक्रेटरी निक टिमोथी ने कहा कि आर्कबिशप को अब सबक लेना चाहिए और ऐसे लोगों को अवार्ड देने से बचना चाहिए, जो हमें ही नष्ट करना चाहते हैं।

लोग यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि पैलेस ने इमाम की परदे में कैद बीवी का नाम तक नहीं पूछा? उसके अस्तित्व को एकदम ही नकार दिया।

टोरी सांसद नील ओ ब्रेन ने डेली मेल के अनुसार कहा कि उनके अनुसार नकाब बहुत ही दमनात्मक होता है और महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाता है। यह इस्लाम मे जरूरी नहीं है, जहां यह एक आजाद देश है, टो इसे हर स्तर पर हतोत्साहित किया जाना चाहिए।

वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जब पाकिस्तान में ईसाई हर रोज ही लगभग बेअदबी के कानून और अन्य दमनकारी कानूनों का शिकार हो रहे हैं, तो ऐसे में इंटरफेथ हार्मोनी का अवार्ड क्यों?

हालांकि यह अवॉर्ड वापस हो गया है, मगर सोशल मीडिया पर यह अभी तक चर्चा का विषय है कि 9/11 के हमलावर की प्रशंसा करने वाले इमाम को 9/11 को ही इंटरफेथ हार्मोनी का अवॉर्ड क्यों दिया? क्या यह पश्चिम के घावों पर पश्चिम के ही द्वारा नमक छिड़कना नहीं है?

Topics: Lambeth PalacePanchjanya newsOsama Bin LadenChurch of England9/11 anniversaryArchbishop of CanterburyImam Tahir Ashrafi
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