लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिशन रोजगार’ के अंतर्गत शनिवार को एक लाख नई नौकरियों का शुभारंभ किया। उन्होंने नवचयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे और उन्हें शुभकामनाएं दीं। सरकार पर प्रश्न खड़ा करने वाले समाजवादी पार्टी के नेताओं से सीएम योगी ने कहा, आप गिनते जाइए, हम छह महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को नियुक्ति देंगे। आज तीन विभागों के नियुक्ति पत्र दे रहे हैं। रविवार को भी लगभग हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे। यह प्रक्रिया अनवरत चलेगी। यूपी पुलिस में 36 हजार, होमगार्ड में 41-42 हजार युवाओं की नियुक्ति करेंगे। इनके मेडिकल व फिजिकल की प्रक्रिया चल रही है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के अगले छह महीने में जारी होने वाले परिणामों से 25-30 हजार नए युवाओं को अवसर मिलेंगे। उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग से भी 20-25 हजार युवाओं की भर्ती होगी। तीन-चार महीने में इसके परिणाम आ जाएंगे। यूपीपीएससी की परीक्षाओं के उपरांत भी 15-16 हजार युवाओं को अलग-अलग विभागों में नियुक्ति मिलेगी।
सीएम योगी ने लोकभवन सभागार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मिशन रोजगार पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। सीएम ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग व उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पदाधिकारियों को बधाई दी और कहा कि आयोग व बोर्ड जब शासन की राजनीति का शिकार नहीं होते और परीक्षा की शुचितापूर्ण प्रक्रिया संपन्न होती है तो परिणाम भी ऐसे ही दिखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक साढ़े 9 लाख नौजवानों को नियुक्ति दी गई है। हम छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। 2017 के पहले गदर मचाने वाले काउंट करें, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे। 2017 के पहले तत्कालीन सरकार ने आयोगों-बोर्डों में भाई-भतीजों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को बदनाम कर दिया था। एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी। युवाओं के सामने एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई थी। यूपी में नौकरी थी नहीं और बाहर पहचान का संकट था, जिससे उनके सपने तार-तार होते थे। तत्कालीन सरकार की भ्रष्ट-भेदभावपूर्ण कार्यप्रणाली व बीमारू मानसिकता के कारण यूपी बीमारू हो गया था।
सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले उपदेशक चाचा-भतीजे की जोड़ी बेखौफ नौकरियों पर डकैती डालने निकलती थी, लेकिन 2027 के बाद ये उपदेश देने लायक भी नहीं रह पाएंगे। उत्सव प्रदेश को उपद्रव प्रदेश बनाने वालों को, किसानों को आत्महत्या और यूपी के नागरिकों को भूखे मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ने वालों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह मामला गलती का नहीं, बल्कि शरारत का था। हम अब इस काले धब्बे से मुक्त हुए हैं।
सीएम ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में बहुत सारी भर्तियां ऐसी हुई थीं, जिसमें आवेदन न करने वालों को भी नियुक्ति पत्र मिल गया और आवेदन करने वाले देखते रह गए। सीएम ने युवाओं से अपील की कि आपके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के भविष्य से आप खिलवाड़ करें। आपको यह ताकत बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से मिली है।
सीएम ने कहा कि 2017 के पहले किसान आत्महत्या करता था। दशकों से परियोजनाएं लंबित थीं। बीज-खाद, टेक्नोलॉजी, बाजार कुछ भी नहीं था। पिछली सरकार ने बिचौलिए पैदा कर दिए थे, जो किसान का हिस्सा खा जाते थे। उन्होंने लैंड, सैंड, कैटल, नकल व भू-माफिया पैदा कर दिए थे, जो युवा ऊर्जा को तबाह कर रहे थे। आज यूपी ने इन सबसे मुक्त होकर उत्सव प्रदेश के रूप में नई पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक गौतमबुद्ध नगर में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण का आयोजन होगा। इसमें 650 विदेशी खरीदार यूपी के उत्पादों की खरीदारी करेंगे। 2500 से अधिक एग्जीबिटर्स आएंगे। यूपी के युवा, कारीगर, हस्तशिल्पी, उद्यमी के बनाए गए उत्पादों की शोकेसिंग होगी। उन्हें बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
सीएम ने कहा कि 2017 के पहले भी यूपी के पास सबसे ज्यादा युवा शक्ति थी, किंतु स्टार्टअप इकोसिस्टम का अभाव था। तब बमुश्किल 120 स्टार्टअप थे, आज 24 हजार से अधिक स्टार्टअप यूपी में संचालित हो रहे हैं। इनमें आधे स्टार्टअप आधी आबादी संचालित कर रही है, जिससे वे हजारों करोड़ का व्यवसाय कर रही हैं। डिजिटल इंडिया-स्टैंडअप इंडिया ने प्रधानमंत्री जी के विजन को प्रभावी ढंग से बढ़ाया है। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने मिशन रोजगार को ईमानदारी से लागू किया है। पीएम मोदी जी भी 51 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दे रहे हैं।
सीएम ने कहा कि 2014 के पहले आयुष की पहचान नहीं थी, लेकिन पीएम मोदी जी ने नया मंत्रालय गठित कर ट्रेडिशनल मेडिसिन को पहचान दी। आयुर्वेद, योग, नैचुरीपैथी, होमियोपैथ, यूनानी आदि को प्लेटफॉर्म दिया। एम्स की तर्ज पर दिल्ली में सेंटर संचालित हो रहा है। 2014 के पहले कोई आयुर्वेद, आयुष, होमियोपैथ में फॉर्मेसी व डिप्लोमा की डिग्री के बारे में सोचता नहीं था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री जी ने आयुष को प्लेटफॉर्म दिया। हमने मॉडर्न व ट्रेडिशनल मेडिसिन पर काम किया। अब आयुष विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज आदि बन रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया (विज्ञापन से नियुक्ति पत्र वितरण तक) की समयबद्धता, मेरिट को लेकर समीक्षा हो रही है। पहले विज्ञापन जारी होते ही सिंडिकेट व गिरोह वसूली के धंधे में व्यस्त हो जाते थे। बची-खुची कसर इंटरव्यू पूरी कर देता था। हमने ग्रुप-3 व 4 भर्ती में इंटरव्यू सिस्टम समाप्त कर दिया।














