बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक को बेअदबी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। देबाशीष रॉय (22) पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस्लाम को निशाना बनाया है। यह आरोप लगाकर दबाव बनाया तौहीद जनता ने। उसने शुक्रवार की नमाज के बाद हंगामा किया और उसके बैनर तले 11 सितंबर को विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद पुलिस पर दबाव पड़ा और देबाशीष को रंगपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि पुलिस का कहना है कि देबाशीष पर कानूनी कार्यवाही से पहले आरोपों की जांच की जाएगी। परिजनों का कहना है कि अगर उनके बेटे ने कोई गलत काम किया है, तो उसे सजा अवश्य मिले और अगर वह निर्दोष है तो उसे छोड़ दिया जाए।
स्थानीय मीडिया में यह मामला तेजी से चल रहा है। लोगों का कहना है कि यह ठीक है कि जांच की जाएगी, मगर फिर भी यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह एक निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और वह भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के मामले में। अब प्रश्न तौहीद जनता पर उठ रहे हैं कि आखिर वह यह सब क्यों कर रही है? क्यों वह लोगों को इस तरह भड़का रही है?
क्या है तौहीद जनता?
तौहीद जनता दो शब्दों से मिलकर बना है। तौहीद अर्थात इस्लाम में एकता और जनता अर्थात आम लोग! इसका अर्थ हुआ कि इस्लाम को मानने वाले लोग। मीडिया के अनुसार इनका कोई संगठित ढांचा नहीं है। हाल ही में बांग्लादेशी मीडिया में भी इस प्रेशर समूह के विषय में लिखा गया था। दरअसल तौहीद जनता का बैनर तो है, मगर यह केवल एक प्रेशर समूह की तरह काम करता है और वह अपने अनुसार गैर-इस्लामिक चीजों का विरोध करता है।
अगस्त 2024 में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद यह समूह उभरा है और उसने लगातार सांस्कृतिक आयोजनों को रोकने, सूफी मजारों पर हमला करने, हिन्दू मंदिरों पर हमला और उत्सवों पर रोक लगाने और बेअदबी के नाम पर हिंसा करने के कई काम किए हैं।
सूफी मजारों पर हमले
यह सबसे रोचक है कि यह प्रेशर समूह सूफी विचारधारा को ही इस्लाम न मानते हुए बांग्लादेश में कई सूफी मजारों पर हमले में आगे रहा है। अप्रैल 2026 में ही उसने कुश्तिया जिले के दौलतपुर में सूफी अब्दुर रहमान की मजार पर हमला कर तोड़फोड़ की थी और देखते ही देखते उसे आग के हवाले कर दिया था। भीड़ ने वहां मौजूद एक सूफी की भी हत्या कर दी थी।
इससे पहले भी उसने राजबाड़ी में नूरल पगला मजार पर हमला किया था। भीड़ ने इस सीमा तक बर्बरता दिखाई थी कि नूरल पगला के नाम से प्रसिद्ध सूफी के शरीर को कब्र से बाहर निकालकर उसे जला दिया था।
daily sun के अनुसार ग्लोबल सूफी ऑर्गनाइजेश के एग्जीक्यूटिव सदस्य हसन शाह सुरेश्वरी दीपू नूरी ने उनके साथ बातचीत में बताया कि 5 अगस्त 2024 के बाद से तौहीद जनता नामक समूह के बैनर तले कम से कम 200 दरगाहों पर हमला हो चुका है।
उनका यह भी आरोप है कि पुलिस केवल 10% घटनाओं की ही रिपोर्ट दर्ज करती है। उनका कहना था कि चरमपंथी तौहीद जनता के बैनर का प्रयोग करके ये सब गतिविधियां कर रहे हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से लेकर अब तक कम से कम 90 से अधिक सूफी मजारों को इस तरह निशाना बनाया जा चुका है।
हिंदुओं के खिलाफ इस समूह के अभियान
अभी तौहीद जनता ने देबाशीष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह देखना होगा कि यह समूह केवल इसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने हिंदुओं के खिलाफ भी कई अभियान चलाए हैं और वह सफल भी हुआ है।
चांदपुर में मंदिर के पुजारी पर हमला
मार्च 2025 में इस समूह से जुड़े लगभग 600 लोगों की भीड़ ने चांदपुर के पूरनबाजार में बने एक मंदिर को घेर लिया था और वे लोग मंदिर के पुजारी अनिक गोस्वामी को खोज रहे थे। उनका कहना था कि अनिक ने इस्लाम की बेअदबी की है। उस समय हिन्दू समाज के लोगों का मानना था कि जमात ए इस्लामी और तौहीद जनता ने मिलकर यह हमला कराया था।
फरवरी 2026 में भी लोगों ने कहा था कि तौहीद जनता नामक समूह हिंदुओं के खिलाफ अभियान चला रहा है। उसके बाद अभी जून में ही गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में श्री श्री राधा गोबिन्द और काली मंदिर के परिसर के भीतर ही श्रीराम की प्रतिमा को रुकवाने में तौहीद जनता का नाम मुख्य था। यह प्रतिमा तो कहीं बाहर नहीं बन रही थी, भक्त अपने मंदिर में बनवा रहे थे, मगर तौहीद जनता के साथ मिलकर अन्य चरमपंथियों ने इसे बनने ही नहीं दिया।
सरकार का तौहीद जनता के सामने घुटने टेकना
यह हैरान करने वाली बात है कि चाहे देबाशीष वाली घटना हो या फिर श्रीराम की प्रतिमा के निर्माण की बात हो, तौहीद जनता के विरोध और आंदोलन के बाद सरकार उसके सामने घुटने टेक देती है। कट्टरपंथी संगठनों के आगे और वह भी ऐसा संगठन, जो न ही कोई राजनीतिक दल है और न ही उसका अपना कोई ढांचा है।
तौहीद जनता को लेकर यह कहा जाता है कि कई कट्टरपंथी संगठनों के साथ मिलकर यह काम करता है, मगर जमात के नेताओं का कहना है कि यह सरकार को जांच करनी चाहिए कि आखिर यह सब गतिविधियां इस बैनर के तले कौन कर रहा है।

















