पाकिस्तानी सेना पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर (PoJK) के लोगों पर लगातार अत्याचार कर रही है, जिसके खिलाफ जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बीच पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (LOC) पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 50 से 60 आतंकियों को पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के साथ खास ट्रेनिंग दी जा रही है।
उरी और केरन सेक्टर के पास आतंकी गतिविधियां बढ़ने की बात सामने आई है। इस वजह से सीमा पर पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) के हमलों और घुसपैठ की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने इन इनपुट की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूचना के अनुसार पाकिस्तानी सेना उड़ी और केरन सेक्टर के आसपास गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रही है। नियंत्रण रेखा के पास आतंकियों की हलचल बढ़ने से लगता है कि पाकिस्तानी सेना आतंकियों के साथ मिलकर सीमित हमले कर सकती है।
राजौरी-पुंछ, गुरेज-टंगडार, उरी और केरन सेक्टर घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माने जा रहे हैं। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन महीने से जैश और लश्कर के आतंकियों को पाकिस्तान सेना के एसएसजी कमांडो के साथ ट्रेनिंग दी जा रही है। मनशेरा क्षेत्र में एक अस्थायी प्रशिक्षण शिविर बनाए जाने का भी इनपुट है। यहां करीब 80 जिहादी बताए गए हैं, जिनमें 50-60 आतंकी और करीब 20 एसएसजी कमांडो शामिल हैं।
पाकिस्तानी पंजाब से नए आतंकी तैयार करने की कोशिश
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान विरोधी आंदोलन का असर आतंकी संगठनों के नेटवर्क पर भी पड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इसी वजह से आईएसआई पाकिस्तानी पंजाब और दूसरे इलाकों से नए आतंकियों की भर्ती पर जोर दे रही है। बहावलपुर में जैश के पुराने ढांचे को सक्रिय करने और पाकिस्तान के अंदर लश्कर के प्रशिक्षण ढांचे को बढ़ाने के भी इनपुट हैं। इसका मकसद गुलाम जम्मू-कश्मीर के नेटवर्क पर निर्भरता कम करना और नए लोगों को तैयार करना बताया जा रहा है।
मीरपुर, कोटली और पुंछ समेत गुलाम जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में लश्कर से जुड़े लोगों द्वारा स्थानीय संपर्क बढ़ाने की बात कही गई है। खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर का नया प्रशिक्षण केंद्र खोलने से लगता है कि आईएसआई पुराने ठिकानों पर निर्भर रहने की बजाय पाकिस्तान के अंदर भर्ती और ट्रेनिंग का नेटवर्क बढ़ा रही है।
जैश और लश्कर का पुनर्गठन
जैश और लश्कर के संगठन को दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है। अब छोटे मॉड्यूल, सीमित संख्या में प्रशिक्षित आतंकियों की भर्ती और गुप्त नेटवर्क पर जोर दिया जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी खातों के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और निष्क्रिय समर्थक नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। लश्कर के कैडर को हमास से जुड़े तरीकों से परिचित कराने का दावा भी किया गया है।
एलओसी पर खतरा सिर्फ पारंपरिक घुसपैठ तक सीमित नहीं दिख रहा। प्रशिक्षित कैडर, एसएसजी की भूमिका, उरी-केरन में संभावित हलचल और बैट कार्रवाई की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।












