पंजाब में नशों को लेकर मंत्री से सवाल पूछने और इस दबाव में एक गुलजार सिंह नामक व्यक्ति द्वारा आत्महत्या करने का मामला भड़कता हुआ नजर आ रहा है। मृतक का परिवार मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गया है। परिवार का कहना है कि जब तक मंत्री पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक अस्थि विसर्जन नहीं किया जाएगा।
जन आक्रोश में बदला मामला
नशे का दर्द बयान करने वाले गुलजार सिंह की मौत का मामला अब केवल एक सुसाइड नहीं, बल्कि सत्ता और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ एक बड़े जन-आक्रोश में बदल चुका है। मृतक के परिवार ने प्रशासन और सरकार को सीधी चेतावनी दी है। परिवार ने साफ कहा है कि जब तक मुख्य आरोपियों और मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे न तो अस्थियां विसर्जित करेंगे और ना ही भोग की रस्म अदा करेंगे।
जबरन अंतिम संस्कार कराने का आरोप
गुलजार सिंह की पत्नी और उनके तीनों बेटों ने गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया कि उन्हें गुमराह करके जल्दबाजी में गुलजार सिंह का जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया। परिवार का कहना है कि गुलजार सिंह ने मरने से पहले साफ तौर पर अपनी अंतिम वीडियो में उन चेहरों को बेनकाब किया था, जिन्होंने मंत्री के सामने सवाल पूछने पर उन पर दबाव बनाया और बेइज्जत किया। परिवार अब वीडियो में नामजद सभी दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग पर अड़ा हुआ है।
लोगों से की सहयोग की अपील
गुलजार सिंह के बेटों ने पूरे पंजाब की जनता से अपील की है। परिवार का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके पिता की मौत की नहीं, बल्कि पंजाब के हर उस बाप की है जिसका बेटा नशे की गिरफ्त में है। जब तक इंसाफ की आखिरी चौखट तक लड़ाई नहीं पहुंचती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर मुद्दा हावी
पंजाब की राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक हर कहीं यह मुद्दा छाया हुआ है। विपक्ष सरकार को नशे के मुद्दे पर घेर रहा है तो मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर लाशों की राजनीति करने का प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ऐसा करते हुए सीएम भूल जाते हैं कि चुनाव से पहले वो नशामुक्त पंजाब का वायदा कर सत्तारूढ़ हुए हैं।













