अपर्णा कुरूप माफी मांगने के बाद भी नहीं बचीं, केरलम में FIR : राहुल गांधी के 'स्मैश द पैट्रियार्की' पर सवाल
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अपर्णा कुरूप माफी मांगने के बाद भी नहीं बचीं, केरलम में FIR : राहुल गांधी के ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ पर सवाल

यह एक बड़ा प्रश्न है कि आखिर एक महिला पत्रकार पर एफआईआर क्यों दर्ज हुई थी? क्या कारण रहा होगा? इसकी जड़ें भी स्मैश द पैट्रियार्की में ही है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Sep 9, 2026, 10:45 am IST
inकेरल
अपर्णा कुरूप और राहुल गांधी

अपर्णा कुरूप और राहुल गांधी

कुछ दिन पहले राहुल गांधी बहुत जोर-शोर से यह नारा लगा रहे थे कि “स्मैश द पैट्रियार्की!”। उनके इस नारे की असलियत केरलम में ही दिखाई दे रही है, जहां पर एक महिला पत्रकार अपर्णा कुरूप पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अपर्णा ने माफी भी मांगी, फिर भी उन्हें राहुल गांधी की केरलम सरकार में कोई राहत नहीं मिली।

क्यों हुई एफआईआर?

यह एक बड़ा प्रश्न है कि आखिर एक महिला पत्रकार पर एफआईआर क्यों दर्ज हुई थी? क्या कारण रहा होगा? इसकी जड़ें भी स्मैश द पैट्रियार्की में ही है। कुछ दिन पहले केरलम के सुन्नी मौलाना शेख अबूबकर अहमद ने महिलाओं को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने एक आयोजन में तर्क दिया कि इस्लाम में पर्दे की जो व्यवस्था है, उसे मुस्लिम महिलाओं की रक्षा और इज्जत के लिए ही बनाया गया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह भी कहा था कि महिलाओं को घर रहना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर नहीं आना चाहिए। चेतावनी दी कि अगर महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर लाया गया तो इससे भयंकर तबाही होगी। यह भी कहा कि मजहबी नेताओं के लगभग ऐसे ही विचार लगभग सौ सालों से यही रहे हैं।

बयान का जमकर हुआ था विरोध

मौलाना के इस बयान का जमकर विरोध हुआ था। केरलम के नेताओं से लेकर हर क्षेत्र के मुख्य लोगों ने इस बयान की आलोचना की थी। मीडिया में भी इस बयान की आलोचना हुई थी और इसी क्रम में बिग टीवी पर भी एक चर्चा का आयोजन किया गया था। आरोप लगाया गया कि पत्रकार अपर्णा कुरूप ने कुछ ऐसा कहा कि उससे मजहबी भावनाएं आहत हो गईं।

बिग टीवी पर दबाव पड़ा और बिग टीवी ने उस वीडियो को भी हटाया और उसके बाद अपर्णा कुरूप ने माफी भी मांगी थी। लेकिन अपर्णा यह शायद भूल गई थीं कि राहुल गांधी और कांग्रेस का स्मैश द पैट्रियार्की केवल और केवल हिंदुओं के लिए है। वह यदि मौलाना के इस स्त्रीविरोधी वक्तव्य का विरोध करना चाहेंगी तो उनपर ही अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत करने का आरोप लग जाएगा।

उन्होंने महिला विरोधी बयान का विरोध किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलीं और यह भी कहा जा रहा है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारियां भी कट्टरपंथियों ने लीक कर दी हैं। सोशल मीडिया की मानें तो एक करोड़ रुपए का इनाम भी रख दिया गया है। उनके बच्चे को भी नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं। उन्हें 2010 में प्रोफेसर टी जोसेफ जैसे परिणाम की भी धमकियां दी गईं।

Islamists are giving death threats to Kerala journalist Aparna Kurup.

• Her address and family details have been leaked, and she has reportedly been threatened with a bounty of ₹1 crore.

• Big TV journalist Aparna Kurup was forced to apologise over remarks criticising Sunni…

— Facts (@BefittingFacts) September 6, 2026

यहां यह भी बात देखने वाली है कि उनकी सार्वजनिक माफी के बाद भी उन्हें माफी नहीं दी गई और सोशल मीडिया के अनुसार उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं। कुरूप ने सलाफ़ी संगठन विज़्डम यूथ के नेता अब्दुल्ला बासिल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि पैनल डिस्कशन की आलोचना करते हुए उसपर साइबर अटैक हो रहा था। बासिल ने अपर्णा की उस चर्चा में भाग लिया था और उसने कुरूप की टिप्पणियों को इस्लामोफोबिया बताते हुए एक वीडियो अपलोड किया था।

मुस्लिम लीग के नेताओं ने किया था विरोध

जब अपर्णा ने यह शिकायत दर्ज कराई थी तो इसका विरोध सत्ताधारी यूडीएफ के नेताओं ने किया था। जिनमें मुस्लिम यूथ लीग के राज्य आम सचिव से लेकर कोडुवली के विधायक पीके फिरोज और यूथ कांग्रेस के नेता रेजिल मक्कुट्टी भी शामिल थे। इन्होंने यह मांग की थी कि बासिल के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लिया जाए। newindianexpress के अनुसार फिरोज ने कहा था कि जब तक इंडियन मुस्लिम लीग सत्ता में है, तब तक ऐसा कोई भी मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। फिरोज ने कहा था कि हम किसी भी ऐसे व्यक्ति का समर्थन नहीं करेंगे, जो सांप्रदायिक भाषा बोलता हो और न ही हम किसी को भी यह इजाजत देंगे कि वह ऐसे किसी भी आदमी को फंसाए, जो ऐसे तत्वों का पर्दाफाश कर रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि गृह विभाग ने पुलिस से कहा था कि इस मामले पर कदम न उठाए।

अपर्णा पर किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है?

कोच्चि सिटी साइबर पुलिस ने पत्रकार अपर्णा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 (दंगा भड़काने का प्रयास), धारा 299 और धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना), धारा 353(2) (दुश्मनी को बढ़ावा देना) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(o) (जनता के लिए उपद्रव पैदा करना) के तहत मामला दर्ज किया है। भाजपा ने अपर्णा पर एफआईआर का विरोध किया है।

भाजपा नेता पीके कृष्णदस ने यह आरोप लगाया कि कांग्रेस अब मजहबी कट्टरपंथियों के हाथों खेल रही है। भाजपा के राज्य प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने इसे तालिबान के शासन जैसी स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए हैं और कुरूप के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जहां एक तरफ राहुल गांधी महिलाओं के अधिकारों और समानता पर बात करते हैं, तो वहीं केरलम में कांग्रेस की सरकार ऐसी पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कर रही है, जिसने महिलाओं के अधिकारों पर आवाज उठाई।

Topics: प्रेस फ्रीडमस्मैश द पैट्रियार्कीराहुल गांधी
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