सरसंघचालक जी का विदेश प्रवास : बात भारत की
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम संघ @100

सरसंघचालक जी का विदेश प्रवास : बात भारत की

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ के मंच से एकात्म मानवता और विविधता में एकता का संदेश दिया।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 7, 2026, 04:58 pm IST
inसंघ @100
न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत इन दिनों विदेश प्रवास पर हैं। उनका यह प्रवास भारतीय विचार, संस्कृति और वैश्विक मानवता के बीच संवाद की एक नई कड़ी बन रहा है। 28 अगस्त को न्यूयॉर्क में उन्होंने सेवा और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया तथा इस्कॉन मंदिर पहुंचकर लोगों से संवाद किया। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ के मंच से उन्होंने एकात्म मानवता और विविधता में एकता का संदेश दिया। इसके बाद 31 अगस्त को टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने भारत की सनातन परंपरा, विविधता, सेवा और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा-जब हम अमेरिका, अर्थात् यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की बात करते हैं, तो एक शब्द की प्रायः चर्चा होती है-‘प्लूरलिज्म’ यानी बहुलतावाद। वहीं, जब हम भारत की बात करते हैं, तो एक दूसरा शब्द अथवा वाक्यांश सामने आता है-‘यूनिटी इन डायवर्सिटी’ यानी विविधता में एकता। भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं होते। इस ब्रह्मांड की संरचना में राष्ट्रों को एक दायित्व निभाना होता है। हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है। भारत को जो नियति मिली है, वह है विविधता में एकता के सत्य को साकार करना और समय-समय पर पूरी दुनिया को भी इस एकत्व का बोध कराना। हम एक हैं और विविधता के कारण हमारी वह एकता और भी सुसज्जित होती है। इसलिए विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही, हमें इस एकत्व की भावना को ध्यान में रखना चाहिए। राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं बनते।

टोरंटो में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्र्रम का उद्घाटन करते (बाएं से) श्री नरेश चावड़ा, श्री मोहनराव भागवत और कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री श्री जेसन केनी

स्वामी विवेकानंद के शब्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र के पास विश्व को देने के लिए एक संदेश, पूरा करने के लिए एक मिशन और प्राप्त करने के लिए एक नियति होती है। विश्व में दो प्रवृत्तियां हैं। एक प्रवृत्ति कहती है, ‘जियो और जीने दो।’ दूसरी प्रवृत्ति कहती है, ‘जियो और केवल उन्हें जीने दो, जो हमारी बात मानें।’ जो लोग कहते हैं कि यदि आप हमारी बात मानेंगे, तो हम आपकी रक्षा करेंगे। रक्षा को संस्कृत और हिंदी में ‘रक्षण’ कहा जाता है। इसलिए जो केवल उनकी रक्षा करते हैं, जो उनकी बात मानते हैं, वे राक्षस हैं।
इसके विपरीत, उन्होंने ऐसी दृष्टि की बात कही जिसमें यह महत्व नहीं रखता कि कोई व्यक्ति आपकी बात मानता है या नहीं, आपकी बात सुनता है या नहीं, आपके बारे में क्या सोचता है अथवा आपके लिए कितना उपयोगी है। सबसे बड़ी बात यह है कि हम सभी मनुष्य हैं। हमें जीवन को बनाए रखना है और इसलिए हमें बंधुत्व के साथ रहना है।

आपसी अपनत्व की भावना पर जोर देते हुए पूजनीय सरसंघचालक जी ने कहा-भौतिक भिन्नताओं और हर प्रकार की विविधता के उपरांत हमारे भीतर कुछ ऐसा है, जो समान है। हम एक-दूसरे के हैं। वह सिद्धांत, जो सबको जोड़ता है, सबको आत्मसात करता है, किसी प्रकार का विभाजन उत्पन्न नहीं करता, सभी के बीच संतुलन बनाए रखता है और मध्य मार्ग दिखाता है, वही धर्म है।

पर्यावरण के प्रति अपना दायित्व

पर्यावरण की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए उन्‍होंने कहा-हम आजकल फादर्स डे, मदर्स डे आदि क्यों मनाते हैं? क्योंकि हम उनके प्रति अपने दायित्व को याद करते हैं। हमें पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व को भी याद रखना चाहिए। आपके खाने से पहले दुनिया में कृषि होनी चाहिए। इसीलिए आप खा सकते हैं। यदि किसान खेती करना बंद कर दें, तो आप क्या खाएंगे? आप कपड़े इसलिए पहन रहे हैं, क्योंकि फैक्ट्रियां हैं। श्रमिक काम कर रहे हैं और कपास उगाने वाले किसान अभी भी हैं। हम हर चीज के लिए किसी न किसी के ऋ णी हैं। इसलिए हमें वापस देने की आवश्यकता है।

न्यूयॉर्क में श्री मोहनराव भागवत के उद्बोधन को सुनता जनसमूह

भारत की वैश्विक भूमिका

भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए पूजनीय सरसंघचालक जी ने कहा-मानव जीवन इस ज्ञान को सभी तक पहुंचाने और स्वयं उस ज्ञान को जीने के लिए मिला है, अपने मोक्ष के लिए और दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए। यही वह मिशन है, जिसे भारत को पूरा करना है। यही वह संदेश है, जिसे विश्व भर के भारतीयों को उपदेश देकर नहीं, बल्कि अपने आचरण और उदाहरण से देना है। यही भारत की नियति है। विश्व भर में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए, लेकिन जन्मभूमि के मूल्यों के अनुरूप सतत जीवन जीना चाहिए। यही भारत की उनसे अपेक्षा है। हम एकत्व से जुड़े हैं और विविधता से सुसज्जित हैं। विविधता प्राकृतिक है और एकता ही सत्य है। हम एकत्व की सजावट के रूप में विविधता का उत्सव मनाते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते श्री मोहनराव भागवत

टोरेंटो प्रवास

“अपने जीवन से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए”

सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने 31 अगस्त को कनाडा के टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु – एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ (हिंदू विश्व बंधु: मैत्री में विश्व को अपनाएं) कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम कॉर्ड (सीएचओआरडी-कनाडियन हिंदूज फॉर आउटरीच रिलेशंस एंड डायलॉग) द्वारा आयोजित किया गया था। कनाडा के सभी 10 प्रांतों से 175 मेजबान संगठनों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

समागम को संबोधित करते हुए उन्होंने बिना किसी भेदभाव के दूसरों की सहायता करने की भारत की परंपरा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और पारसी समुदायों ने ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना उत्पीड़न और भय के शांतिपूर्ण आश्रय पाया है। उदाहरणों से स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के निवासी, जिनमें से अनेक शरणार्थी बन गए थे, समुद्र पार करके भारत आए। उस समय भारत स्वतंत्र नहीं था। उस समय भारत में ब्रिटिश शासन था और उन्होंने शरण देने से इनकार कर दिया। उस समय जामनगर एक रियासत था। जामनगर के राजकुमार ने उन्हें बुलाया और कहा-यहां आइए, यहां बस जाइए। जब तक आपका देश फिर से आपके लिए स्वतंत्र नहीं हो जाता और आप यहां से जाने के लिए स्वतंत्र नहीं होते, तब तक मैं आपकी रक्षा करूंगा। और यह चलता आ रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “कुछ वर्ष पहले जब मध्य-पूर्व में युद्ध हुआ और लोग वहां फंस गए थे, तब भारत के सैन्य विमान वहां गए और लोगों को बचाकर लाए। केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि सात देशों के नागरिकों को वहां से बचाया गया। जब भी विश्व में कहीं संकट आया और भारत से सहायता मांगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मदद के लिए पुकार किए भी वह सहायता करता है। यही परंपरा है। यही भारत का डीएनए (मूल स्वभाव) है।”

एकता की विविधताएं

भारत की एकता की परंपरा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “भारत की परंपरा केवल यूनिटी इन डायवर्सिटी (विविधता में एकता) ही नहीं बताती, बल्कि डायवर्सिटीज ऑफ यूनिटी (एकता की विविधताएं) भी बताती है। सभी विविधताएं एकता की अभिव्यक्ति हैं। इसलिए हमें, जिन्हें इस पृथ्वी पर कुछ वर्षों तक जीना है, ऊबना नहीं चाहिए। हमें इस विविधता की सेवा करनी है, इसे स्वीकार करना है, इसका सम्मान करना है, क्योंकि यह एकता की अभिव्यक्ति है। यह इसे सुंदर बनाती है। यह इसकी शोभा है। हम इसका उत्सव मनाते हैं। हम हमेशा एकता को देखते हैं। भारत में अनेक जातियां, अनेक पंथ, अनेक भाषाएं रही हैं। कुछ भी एकल नहीं है, किन्तु यह सब एक ही है। हम यह नहीं कहते कि सभी एक हैं, बल्कि कहते हैं कि सब एक ही है।”

अधिक एकजुट, अधिक मुक्त मानवता

पूज्य सरसंघचालक जी ने कहा, “जब भारत बड़ा बना-वह कभी सुपरपावर (विश्व महाशक्ति) नहीं बना। वह एक गौरवशाली देश बना। हां, कोई उस समय के भारत को महाशक्ति कह सकता है। किन्तु वह महाशक्ति नहीं था। जब भारत बड़ा बना, तब उसने विश्व की सेवा की। अपने चरित्र के कारण वह विश्वगुरु बना, महाशक्ति नहीं। इसलिए भारत का उदय अर्थात् अधिक एकजुट, अधिक मुक्त मानवता।”
उन्होंने कहा कि भारत ने यह कार्य बहुत पहले किया था, जब न सड़कें थीं, न नावें, न हवाई जहाज, न मोटर वाहन, केवल बैलगाड़ियां और घोड़े थे। हमारे पूर्वज मैक्सिको से साइबेरिया तक के क्षेत्रों में गए और उन्हें समस्त ज्ञान दिया। वे पैदल हिमालय पार करके चीन गए, मंगोलिया गए, छोटी नावों से गए। वे दक्षिण-पूर्व एशिया गए। उस समय के ज्ञात विश्व तक वे पहुंचे। और उन्होंने क्या किया? उन्होंने किसी देश पर विजय प्राप्त नहीं की। उन्होंने किसी को कन्वर्ट नहीं किया। वे जहां भी गए, ज्ञान दिया, गणित दिया, ज्योतिष दिया, आयुर्वेद दिया और सभ्यतागत मूल्यों का प्रसार किया।’

‘हिंदू’ की व्यापक अवधारणा

भारत की विविधता के संदर्भ में उन्होंने कहा, “जब मैं हिंदू कहता हूं, तो ‘हिंदू’ शब्द को किसी विशिष्ट भाषा, किसी विशिष्ट उपासना या किसी विशिष्ट जीवन-शैली के माध्यम से परिभाषित नहीं किया जा सकता। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं। हिंदू सभी को स्वीकार करते हैं। उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होती। हम कहते हैं कि हमारी सभी प्रार्थनाएं भारत कहलाने वाली भूमि से उत्पन्न हुई हैं, किन्तु वे कभी केवल भारत के लिए नहीं थीं। वे उस पूरे ब्रह्मांड के लिए थीं, जिसे हम जानते हैं। मैं आपको कोई नई बात नहीं बता रहा हूं। मैं वही बता रहा हूं, जो आप परंपरागत रूप से सीखते आए हैं, जिसे आप परंपरागत रूप से जपते और गाते आए हैं। किन्तु आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अब समय आ गया है कि हिंदुओं को इस पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि विश्व को इन सभी बातों की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा, “हमें वह सृजित करना है, जिसकी विश्व को आवश्यकता है और फिर उसे देना है। किन्तु हम उसे कैसे दें? हम किसी पर दबाव नहीं डालते। हमारे पूर्वज हर देश में गए। उन्होंने कभी किसी पर कुछ थोपा नहीं। हम ऐसे नेता हैं, जो भीतर से नेतृत्व करते हैं और उदाहरण के द्वारा नेतृत्व करते हैं।”

टोरंटो में आयोजित कार्यक्रम के मंच पर (बाएं से) श्री कश्मीर सिंह धालीवाल, श्री मोहनराव भागवत और श्री जेसन केनी

हिंदू समाज की भूमिका

हिंदू समाज की भूमिका पर उन्होंने कहा, “हिंदू समाज दिशा प्रदान करता है। वह दिशा मूल्यों की है, एक विशेष ज्ञान की है-ऐसे ज्ञान की, जो अत्यंत प्रासंगिक और शाश्वत है। हम एक हैं और उस आधार पर जीवन कैसे जीना है? हिंदू समाज को इसका उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। भारत में भी यदि कोई व्यक्ति हिंदू समाज के बीच ऐसा आदर्श जीवन देखना चाहता है, तो उसे ऐसे जीवन के उदाहरण मिलेंगे। किन्तु हमें इसे और अधिक व्यापक अनुपात में करना होगा ताकि लोग देख सकें, राष्ट्र देख सकें और अपनी-अपनी विशिष्ट प्रवृत्ति तथा अपने-अपने आधार पर, इसे ध्यान में रखते हुए अपने जीवन का पुनर्निर्माण कर सकें।”

उन्होंने कहा, “सभी राष्ट्र फलें-फूलें, समृद्ध हों, सहयोग करें, मानव प्रगति और सृष्टि की प्रगति में योगदान दें। यही वह स्वप्न है, जो हिंदुओं के मन में है। हमें स्वयं का विकास करना है। हमें एक फूल की तरह बनना है और अपनी सुगंध पूरे वातावरण में फैलानी है। इस प्रकार हम विकसित हों और मानवता के उद्देश्य के प्रति समर्पित तथा निष्ठावान बनें। यही हिंदू का जीवन है।”

भारत-कनाडा संबंधों में नई गति का स्वागत

कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी ने भारत और कनाडा के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा, “कनाडा-भारत संबंधों में नए सिरे से गति पकड़ते देखना बहुत सुखद है। इसका प्रतिनिधित्व इस वर्ष के अंत में प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा की दूसरी यात्रा से भी होगा।”

वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश

ग्रेटर टोरंटो एरिया के हिंदू सभा मंदिर के राजिंदर प्रसाद ने कहा, “डॉ. मोहन भागवत जी की यात्रा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश लेकर आई है। हमें अपनी संस्कृति के मूल्यों का संदेश विश्व तक पहुंचाना चाहिए। हम मोहन भागवत जी का स्वागत करते हैं।”

हिंदू-सिख साझा विरासत

खालसा दीवान सोसाइटी और ऐतिहासिक रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारे का प्रतिनिधित्व कर रहे कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कश्मीर सिंह धालीवाल ने कहा कि टीयूएसएचए (द यूनाइटेड स्टेट्स एंड हिंदू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका) की ओर से बोलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। हिंदू और सिख अलग-अलग धर्मों और परंपराओं का पालन कर सकते हैं, किन्तु हम एक अत्यंत मूल्यवान चीज साझा करते हैं। हम भाषाएं, भोजन, संगीत, पारिवारिक परंपराएं, त्योहार, मूल्य और सबसे बढ़कर समुदाय तथा सेवा की भावना साझा करते हैं। आज हिंदू और सिख समुदाय कनाडा के बहुसांस्कृतिक समाज में सबसे अधिक योगदान देने वाले समुदायों में सम्मिलित हैं। हमें वास्तव में गर्व है कि हमारा जन्म विश्व के सबसे पुराने बहुसांस्कृतिक देश भारत में हुआ है और हम विश्व के सबसे युवा बहुसांस्कृतिक देश कनाडा में रह रहे हैं।”

एक विश्व : एक मानवता : एक आस्था

न्यूयॉर्क में श्री मोहनराव भागवत के संबोधन की प्रमुख बातें
  • जहां “मैं” और “मेरा” है, वहां कोई समाधान नहीं है। “हम” और “हमारा” ही समाधान है।
  • विविधता हमारी एकता की सजावट है। इसे स्वीकार करना होगा। इसका सम्मान करना होगा। इसकी रक्षा करनी होगी। जिस प्रकार मैं अपनी विशिष्ट प्रकृति की रक्षा करता हूं, उसी प्रकार मुझे दूसरों की विशिष्टता की भी रक्षा करनी होगी।
  •  मत-पंथ अनेक हैं। आज के विश्व में धार्मिक कार्य काफी हद तक कर्मकांडों से परिभाषित होते हैं। लेकिन कर्मकांडों का अनुशासन भी आवश्यक है।
  • भारत में सभी मत-पंथों के लोग रहते हैं। परंपरा से भारत ने सभी को आश्रय दिया है।
  •  हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूप में यह मानते हैं कि हमारे पास यह ज्ञान है कि विश्व की मानवता एक है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम पूरी दुनिया में जाएं और सभी को बताएं कि विविधताओं के बावजूद हम एक हैं।
  • हमें अपने-अपने स्थान पर उस विश्व के आदर्श स्वरूप का निर्माण करना चाहिए, जैसा विश्व हम चाहते हैं और फिर एक-दूसरे से जुड़ना चाहिए।
  •  हम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेवा कर रहे हैं। सेवा करते समय हम भेदभाव नहीं देखते। जो भी जरूरतमंद है, हम उसकी सेवा करते हैं। समाज की सहायता से हमारे स्वयंसेवकों द्वारा एक लाख तीस हजार सेवा परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने हर जगह सेवा की है और सभी की समान रूप से सेवा की है।
  • 1996 में हरियाणा के दादरी में दो विमान आपस में टकरा गए थे। दोनों विमान मुस्लिम देशों के थे। अधिकांश यात्री मुस्लिम थे। दुर्घटना के बाद हमारे स्वयंसेवक सबसे पहले वहां पहुंचे और उन्होंने सेवा कार्य किया। सभी यात्री मृत थे। हमारे स्वयंसेवकों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की और जब उनके परिजन वहां पहुंचे तो शवों की पहचान करने में उनकी सहायता की।
  • 2018 के बाद, दिल्ली में मेरे भाषण के बाद, कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुझे संवाद के लिए बुलाया। इसलिए हमने संवाद शुरू किया, मुख्य रूप से भारत के मुसलमानों और ईसाइयों के साथ। धीरे-धीरे हम संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं। संवाद पहला कदम है।
  • सेवा दूसरा कदम है। लेकिन यह संवाद के बाद शुरू होने वाली चीज नहीं है। इसे एक साथ शुरू करना था। हम शुरुआत से इसी तरह करते आए हैं। हम सेवा कर रहे हैं और सेवा करते समय हम किसी के साथ भेदभाव नहीं देखते। जो भी जरूरतमंद है, हम उसकी सेवा करते हैं।
  • मनुष्यों द्वारा अपनी-अपनी प्रवृत्तियों के अनुसार अपनाए गए विभिन्न मार्ग अलग-अलग दिखाई देते हैं। वे चाहे सीधे हों या टेढ़े, अंततः सभी तुम्हीं तक पहुंचते हैं, जैसे विभिन्न स्थानों से निकलने वाली अलग-अलग धाराएं अंत में समुद्र में जाकर मिलती हैं।
  • केवल राजनीति के माध्यम से चीजें हासिल नहीं की जा सकतीं। क्षमा कीजिए, लेकिन तथ्य यह है कि राजनीति अब स्वार्थ का खेल बन गई है।
  •  भारत का हमारा अनुभव है कि हमें समाज से शुरुआत करनी होगी और हमने इसकी शुरुआत कर दी है।
  •  हमें समाज में कार्य करना होगा और स्थानीय स्तर पर कार्य करना होगा। हमें ऐसे स्थानों और वातावरण का निर्माण करना होगा, जहां निस्वार्थ सेवा और एकता की भावना हो।
  •  संवाद जारी रहना चाहिए और इस संवाद के माध्यम से हम लोगों को जोड़ेंगे। फिर हमें इसका विस्तार करना चाहिए। जब लोग इसे देखेंगे और इसका अनुभव करेंगे, तब वे बदलेंगे।
  •  हमें अपने-अपने स्थान पर उस विश्व का आदर्श स्वरूप बनाना चाहिए, जैसा विश्व हम चाहते हैं।
Topics: पाञ्चजन्य विशेषभारतीय प्रवासीRSSएकात्म मानवतावादबहुलतावादवैश्विक भूमिकायूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशनसरसंघचालकमैडिसन स्क्वायर गार्डनधर्म और संस्कृतिहिंदू विश्व बंधुMohan Bhagwatविदेश प्रवासवसुधैव कुटुम्बकम्टोरंटो प्रवासविविधता में एकता
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आज का श्लोक : नेतृत्व और टीम भावना का सूत्र, श्लोक में छिपी है सफलता की 3 मुख्य शर्तें

RSS Sunil Ambekar Praises Captain Smit Machhar Flydubai Flight Saved Panchjanya

“पूरे देश को गर्व है”: कैप्टन स्मित मछार के साहस पर बोले संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर- वे वास्तव में एक सच्चे वीर हैं

हनुमान अंश : जड़ों की ओर लौटता सिनेमा

अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

35 सवाल, 15 साल का डाटा और घुसपैठ का नेटवर्क: डेमोग्राफी चेंज पर गृह मंत्रालय की जांच से क्यों मची हलचल?

‘कन्वर्जन हिंसा है, हम इसे सहन नहीं करेंगे; प्रेम, करुणा, तपस्या और शुचिता है- हिंदुत्व’

हरिपुर कालसी में हरिघाट के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ स्वामी चिदानंद सरस्वती और महामंडलेश्वर अरुण गिरि जी महाराज

हरिपुर : विरासत का पुनरुत्थान

Load More

ताज़ा समाचार

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पुतिन ने PM मोदी को धन्यवाद दिया: कहा-वे यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए सक्रिय, उनके पास बेहतरीन आइडियाज

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने रचा इतिहास, दक्षिण कोरिया को हराकर जीता पहला गोल्ड

Indian Captain Smit Flydubai Flight Saved Attack Oman Co Pilot Saudi Arabia Panchjanya

फ्लाईदुबई में हुआ आतंकी हमला इस्लामिक रेडिकल इंडोक्ट्रिनेशन: बेंजामिन नेतन्याहू

अमेरिकी नौसेना मध्य पूर्व भेज रही तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, ट्रंप का ईरान पर नए हमलों का संकेत

कैप्टन स्मित मछार

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर दुनिया कर रही सलाम, फिर भारत का लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम चुप क्यों ?

लाल बहादुर शास्त्री जयंती: सत्ता के शिखर पर सादगी की मिसाल

आज का श्लोक : नेतृत्व और टीम भावना का सूत्र, श्लोक में छिपी है सफलता की 3 मुख्य शर्तें

MP Weather Today

दिल्ली से MP तक 5 राज्यों में कैसा रहेगा 2 अक्टूबर का मौसम? बारिश होगी या नहीं! IMD का अलर्ट 

आज का राशिफल

आज का राशिफल: किसकी खुलेगी किस्मत और किसे रहना होगा सावधान? जानें सभी 12 राशियों का हाल

महात्मा गांधी

Mahatma Gandhi Jayanti Special : जब गांधीजी पहुंचे संघ के शिविर में

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies