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Explainer: नेपाल में बाढ़ के बाद की स्थिति, आपदा से भी दुखद क्यों है?

26 अगस्त की भीषण बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई। 3 सितंबर तक 1,252 मौतें और 4,216 लापता। पुनर्निर्माण में 4-5 अरब डॉलर लग सकते हैं। बिजली, सड़क, खेती और पर्यटन पर पड़ा असर।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 4, 2026, 01:30 pm IST
inविश्व
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

नेपाल में 26 अगस्त की अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 3 सितंबर तक मौत का आंकड़ा 1,252 पहुंच चुका था और 4,216 लोग अभी भी लापता थे। बचाव और राहत का काम चल रहा है, लेकिन अब असल चुनौती बाढ़ के बाद की है—आर्थिक नुकसान और बुनियादी ढांचे का नुकसान।

वित्त मंत्री स्वर्निम वागले ने कहा है कि पुनर्निर्माण और पुनर्वास में 4 से 5 अरब डॉलर लग सकते हैं। यह अभी शुरुआती अनुमान है क्योंकि पूरा नुकसान अभी नहीं आंका गया। IMF के मुताबिक नेपाल की साल 2026-27 की जीडीपी करीब 48.1 अरब डॉलर रहने वाली है। यानी यह राशि जीडीपी के लगभग 8-10 प्रतिशत के बराबर है। केंद्रीय सरकार का पूंजीगत खर्च उसी साल जीडीपी का 4.8 प्रतिशत अनुमानित है, तो यह खर्च लगभग 1.7 से 2.2 गुना ज्यादा है।

बाढ़ से पहले भी अर्थव्यवस्था कमजोर थी

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक साल 2025-26 में विकास दर सिर्फ 2.3 प्रतिशत रहने का अनुमान था (पिछले साल 4.6 प्रतिशत थी)। IMF ने भी इसी साल 3 प्रतिशत और अगले साल 4.6 प्रतिशत की बात कही थी। पूंजी बजट का सिर्फ 12.1 प्रतिशत ही पहले छह महीनों में खर्च हो पाया था। परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और खरीद प्रक्रिया में देरी आम है। वर्ल्ड बैंक परियोजनाओं में खरीद का समय दक्षिण एशिया में सबसे लंबा—231 दिन—रहा।

बिजली उत्पादन ठप

UNDP की तेजी से की गई जांच में पता चला कि 11 जलविद्युत स्टेशन और एक सोलर प्लांट बंद हो गए। इनकी कुल क्षमता 431.1 मेगावाट थी। निर्माणाधीन 15 परियोजनाएं (470 मेगावाट) भी क्षतिग्रस्त हुईं। नेपाल बिजली निर्यात करता है। पिछले साल भारत और बांग्लादेश को 29.32 अरब नेपाली रुपये की बिजली बेची और 10.55 अरब की खरीदी। बाढ़ के बाद निर्यात 1,000 मेगावाट से घटकर करीब 650 मेगावाट रह गया। बांग्लादेश को सप्लाई करने वाले प्रोजेक्ट खराब होने से वहां निर्यात रुक गया।

सड़कें और पुल टूटे

सड़क विभाग के अनुसार, रसुवागढ़ी से मालेखू के बीच करीब 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई और 41 पुल टूटे या क्षतिग्रस्त हुए। सिर्फ सड़क-पुल का नुकसान करीब 20 अरब नेपाली रुपये का है। नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज लगाने में मदद मांगी है। नुवाकोट को चीन सीमा से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर बेतरावती-रसुवागढ़ी सड़क भी कई जगह क्षतिग्रस्त है।

चीन के साथ व्यापार प्रभावित

रसुवा कस्टम से पिछले साल 45.73 अरब नेपाली रुपये का आयात हुआ था। बाढ़ ने कस्टम इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट कर दिया और सैकड़ों कंटेनर दब गए या बह गए। वैकल्पिक रास्ता कोरला (मुस्तांग) है, लेकिन उसकी क्षमता बहुत कम है।

खेती और पर्यटन पर असर

UNDP के अनुसार छह जिलों के 17 नगरपालिकाओं में 84,270 लोग प्रभावित हुए। ज्यादातर पहाड़ी इलाके हैं जहां 67.4 प्रतिशत लोग खेती करते हैं। मानसून की मुख्य फसल का समय था, इसलिए फसल, पशु और जमीन के नुकसान से आमदनी और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। पर्यटन जीडीपी में 6-7 प्रतिशत योगदान देता है। अगस्त में विदेशी पर्यटक 3.65 प्रतिशत कम आए। लंगतांग वैली सड़क और पुल टूटने से कट गई। वहां सालाना 25,000 से ज्यादा पर्यटक आते हैं।

मलबा साफ करने का खर्च

पुनर्निर्माण शुरू करने से पहले मलबा हटाना होगा। UNDP के अनुमान में अभी तक आंके गए इलाकों में कम से कम 22 लाख टन मलबा जमा है। सिर्फ इमारतों से संबंधित मलबा 5.56 लाख टन है। इमारतों के संभावित नुकसान का अनुमान 158.6 मिलियन डॉलर है।

Topics: नेपाल जीडीपी प्रभावनेपाल बाढ़ 2026नेपाल बाढ़ आर्थिक क्षतिनेपाल पुनर्निर्माण लागतबाढ़ से बिजली उत्पादन ठपरसुवा बाढ़ नुकसान
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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