इसी साल 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली जा रही फ्लाइट के हादसे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की शुरुआती जांच में पता चला है कि जब A320 विमान 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तो उसके तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम (ग्रीन, ब्लू और येलो) का प्रेशर कुछ ही सेकंड में खत्म हो गया था।
चार सेकंड बाद ब्लू और येलो सिस्टम भी फेल हो गए। इस तरह तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ प्रेशर खो बैठे। ऑटोपायलट बंद हो गया, बार-बार घंटी बजी और दो सेकंड के लिए स्टॉल वार्निंग भी आ गई। विमान की ऊंचाई में उतार-चढ़ाव हुआ। पहले 372 फीट ऊपर गया फिर 292 फीट नीचे आ गया। को-पायलट उस समय उड़ान चला रहे थे। उन्होंने पहले प्रतिक्रिया दी, फिर कैप्टन ने कंट्रोल संभाला। करीब 04:02:52 UTC पर ब्लू सिस्टम वापस आ गया। कुछ सेकंड बाद येलो और ग्रीन भी ठीक हो गए। कंट्रोल सतहें सामान्य हो गईं।
यात्रियों और क्रू पर असर
क्रूज के दौरान सीटबेल्ट साइन बंद था। अचानक हुए झटके से यात्री और क्रू केबिन में इधर-उधर हो गए। लैंडिंग के बाद 24 लोगों को मेडिकल मदद की जरूरत पड़ी, जिसमें चार केबिन क्रू भी शामिल थे। चार लोगों को गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया।
केबिन में नुकसान भी हुआ। कई पंक्तियों में छत के पैनल टूटे, ओवरहेड बिन अपनी जगह से हटे, इमरजेंसी एग्जिट का हैंडल टूटा, लैवेटरी का कमोड अपनी जगह से उखड़ गया और एक क्रू सीट मुड़ गई। क्रू ने डायवर्ट न करने का फैसला किया। वे दिल्ली तक गए और ATC से मेडिकल प्राथमिकता मांगी। विमान 05:30 UTC पर रनवे 11L पर सुरक्षित उतर गया। यह घटना के करीब 90 मिनट बाद की बात है।
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पायलट की टेस्ट रिपोर्ट
उड़ान के बाद दोनों पायलटों का ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट हुआ, जो ठीक रहा। लेकिन साइकोएक्टिव सब्सटेंस डिटेक्शन टेस्ट में पायलट-इन-कमांड का रिजल्ट नॉन-नेगेटिव आया। बाद में लैब ब्लड टेस्ट से इसकी पुष्टि हो गई। को-पायलट दोनों टेस्ट में नेगेटिव रहे।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रीलिमिनरी रिपोर्ट में DGCA से कहा गया है कि पायलट-इन-कमांड के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। रिपोर्ट में लिखा है कि साइकोएक्टिव सब्सटेंस के इस्तेमाल की पुष्टि चिंता का विषय है और इस पर प्राथमिकता से कार्रवाई होनी चाहिए। रिपोर्ट यह नहीं कहती कि इस सब्सटेंस की वजह से ऊंचाई में गड़बड़ी हुई।
हाइड्रोलिक सिस्टम और जांच की स्थिति
एयरबस A320 में तीन हाइड्रोलिक सिस्टम होते हैं—ग्रीन, ब्लू और येलो। ये 3000 पीएसआई प्रेशर देते हैं। हर सिस्टम का अपना रिजर्वायर होता है और फ्लूइड एक से दूसरे में नहीं जाता। विमान फुकेट से पावर ट्रांसफर यूनिट (PTU) के लिए एक्टिव मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट आइटम के साथ रवाना हुआ था। यह आइटम 28 जुलाई को लगाया गया था। PTU ग्रीन और येलो सिस्टम के बीच सहायक स्रोत का काम करता है। जांच में इसकी स्थिति पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
फ्लाइट रिकॉर्डर का डेटा डाउनलोड हो चुका है और विश्लेषण चल रहा है। अगस्त के मध्य में एयरबस और फ्रांस की BAE की टीम ने दिल्ली में विमान का निरीक्षण किया। हाइड्रोलिक पार्ट्स और फ्लूइड सैंपल आगे की जांच के लिए निकाले गए हैं। यह रिपोर्ट प्रीलिमिनरी है और विस्तृत तकनीकी जांच जारी है।











