कश्मीरी अलगाववादी नेता और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का मुखिया और आतंकी यासीन मलिक तिहाड़ जेल में बंद है। 2019 से वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। हाल ही में उसने जेल से एक 25 पन्नों का हलफनामा श्रीनगर की अतिरिक्त सत्र अदालत में दाखिल किया है।
यह हलफनामा राज्य जांच एजेंसी (SIA) की चार्जशीट के जवाब में दिया गया है। SIA ने 29 जून को 19 अप्रैल 1990 को कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। उसमें यासीन मलिक को भी आरोपी बनाया गया था।
सरला भट हत्याकांड में भूमिका से इनकार
हलफनामे में यासीन मलिक ने साफ कहा है कि सरला भट की हत्या में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उसने लिखा कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है। उनका कहना है कि अदालत या जांच एजेंसियों से उन्हें कोई शिकायत नहीं है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से उन्हें झूठा फंसाया गया है।
मलिक का दावा है कि अप्रैल 1990 में जब सरला भट की हत्या हुई, उस समय वह खुद गंभीर रूप से घायल था और उसका इलाज चल रहा था। उसका कहना है कि यह आरोप पूरी तरह झूठा है कि उसने बदला लेने के लिए सरला भट की हत्या की साजिश रची। जो व्यक्ति खुद अपनी जान के लिए लड़ रहा था और जिसे लोग मरा हुआ समझ रहे थे, वह ऐसी साजिश कैसे रच सकता है?
केस नहीं लड़ने और फांसी की मांग
यासीन मलिक ने अदालत से कहा है कि उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद फैसला किया है कि अब इस मामले में केस नहीं लड़ेंगे। उसने लिखा कि वह मौत की सजा की मांग करता है। साथ ही उसने साफ कर दिया कि इसे कबूलनामा न समझा जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को तय की है।
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पत्नी मुशाल को तलाक देने का फैसला
हलफनामे में यासीन मलिक ने अपने परिवार को भी संदेश भेजा है। उसने कहा है कि अपनी पत्नी मुशाल मलिक को तलाक देना चाहता है। मलिक की पत्नी उससे करीब 20 साल छोटी है। वह नहीं चाहता है कि उसकी पत्नी उनकी परिस्थितियों का बोझ उठाकर जिंदगी बिताए। उसने लिखा कि फांसी पर चढ़ने से पहले उसने निकाह के रिश्ते से अपनी बीवी को आजाद करने का फैसला किया है। वह अपनी पत्नी को विधवा की तरह नहीं देखना चाहता।
यासीन मलिक ने जेल से भेजे इस हलफनामे में सरला भट हत्याकांड से जुड़े आरोपों से पूरी तरह इनकार करते हुए अदालत से मौत की सजा मांगने और पत्नी को तलाक देने की बात कही है।










