ब्रिटेन में पांच साल में 100 से ज्यादा बच्चों की हुई शादी? कई की उम्र 5 साल से भी कम, आंकड़ों से मचा हंगामा
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ब्रिटेन में पांच साल में 100 से ज्यादा बच्चों की हुई शादी? कई की उम्र 5 साल से भी कम, आंकड़ों से मचा हंगामा

पत्रकार खदिजा खान का कहना है कि ये सौ की संख्या तो महज हिमखंड का ऊपरी हिस्सा है। असली समस्या बहुत बड़ी है और व्यापक है क्योंकि आंकड़े सामने आ ही नहीं पाते हैं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Sep 2, 2026, 06:50 pm IST
inविश्व
ब्रिटेन में बाल विवाह के आंकड़ों से मचा हड़कंप

ब्रिटेन में बाल विवाह के आंकड़ों से मचा हड़कंप

ब्रिटेन में यूं तो शादी की उम्र अभी कुछ ही साल पहले 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष की गई थी। फिर भी कुछ ऐसे आंकड़े आए हैं, जो हैरत में डालने वाले हैं। इन पर सोशल मीडिया से लेकर हर जगह चर्चा हो रही है।

ऐसा ही एक आंकड़ा आया है छोटे बच्चों की शादियों का! यह आंकड़ा सामने आया था ब्रिटिश सरकार की फोर्स्ड मैरिज यूनिट (जबरन शादी इकाई) के जरिए। इसने जो आंकड़े दिए हैं, उसमें है कि 12 साल या उससे कम के लगभग 100 बच्चों को साल 2021 से लेकर 2025 तक इस यूनिट में भेजा गया था। इसमें भी 27 बच्चे ऐसे थे, जिनकी उम्र 5 साल से भी कम थी। इन आंकड़ों के सामने आने से एक बार फिर से बच्चों के विवाह पर बहस तेज हो गई है।

ऐसा माना जा रहा है कि इन 100 मामलों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान जैसे देशों से आए लोग शामिल हैं।

क्या है फोर्स्ड मैरिज यूनिट?

ब्रिटेन में फोर्स्ड मैरिज यूनिट पूरे देश में काम करती है और उसका काम है उन बच्चों की मदद करना, जिनकी उम्र से पहले शादी की जा रही होती है। यहां पुलिस, सामाजिक सेवाओं, शैक्षणिक कर्मियों, दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों या फिर व्यक्तियों से खुद ही सहायता के अनुरोध आते हैं। इसमें 100 बच्चों के आंकड़े हैं और जिनमें से 62 बच्चे 10 से कम उम्र के हैं और 27 ऐसे हैं, जिनकी उम्र 5 वर्ष से भी कम है।

मीडिया के अनुसार होम ऑफिस का कहना है कि जो भी रेफरेल आते हैं, उनका अर्थ यह होता है कि उन्हें किसी असली, संभावित या संदिग्ध जबरन शादी के बारे में सूचना मिलती है, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि ये शादियां हुई हैं या हो चुकी हैं? वहीं होम ऑफिस का यह भी कहना है कि ये जबरन शादियां किसी एक धर्म या देश से जुड़े हुए मामले नहीं हैं। किसी भी एक पृष्ठभूमि के अपराधी नहीं हैं।

मगर सोशल मीडिया पर लोग इसे मानने के लिए तैयार नहीं है और न ही कर्म निर्वाण नामक संस्था चलाने वाली डेम जसविंदर संघेरा इस बात को मानने के लिए तैयार हैं। जसविंदर भी चौदह वर्ष में हो रही शादी से बचकर आई थीं। उनका कहना है कि ऐसा काम करने वाले लोग नस्लवाद के आवरण में छिपने की कोशिश करते हैं। इस तरह के काम लोग करते हैं, वे आपको बैकफुट पर लाने की कोशिश करते हैं। और कहते हैं कि ‘यह हमारी तहज़ीब है, यह हमारा मजहब है। आप नस्लवाद कर रहे हैं। और आपको अपने कदम पीछे हटाने पर मजबूर कर देंगे। उनका कहना है कि “दूसरे की तहज़ीब को अपनाने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं होता कि जो स्वीकार्य नहीं है, उसे भी स्वीकार किया जाए”

सोशल मीडिया और मीडिया पर चर्चा

सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि इनमें से अधिकांश मामले बाहरी देशों से आए लोगों के हैं। हालांकि होम ऑफिस का कहना है कि अब बाहरी नहीं बल्कि वहीं के लोगों से जुड़े हुए मामले आ रहे हैं। मगर सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है, इनका मूल अलग है। Centre for Migration Control नामक हैंडल का कहना है कि 2025 में इसी यूनिट के पास जो मामले आए थे, उनमें से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मामले थे। यह बहुत अधिक माइग्रेशन और मल्टीक्लचरिज्म के कारण हो रहा है।

In 2025 the Forced Marriage Unit handled cases relating to 34 'focus countries'.

41% of all cases related to Pakistan, with a further 9% to Bangladesh and 7% to Afghanistan. These figures are the result of mass migration and multiculturalism. https://t.co/HcnDvLoE1P

— Centre for Migration Control (@migrationCtrl) August 31, 2026

जीबी न्यूज के अनुसार 2025 में फोकस कन्ट्री द्वारा यूके में मामले थे उसमें पाकिस्तान का हिस्सा बहुत अधिक था।

In 2025 the Forced Marriage Unit handled cases relating to 34 'focus countries'.

41% of all cases related to Pakistan, with a further 9% to Bangladesh and 7% to Afghanistan. These figures are the result of mass migration and multiculturalism. https://t.co/HcnDvLoE1P

— Centre for Migration Control (@migrationCtrl) August 31, 2026

लोगों का कहना है कि यह समस्या उन्होंने आयात की है। वहीं पत्रकार खदिजा खान का कहना है कि ये सौ की संख्या तो महज हिमखंड का ऊपरी हिस्सा है। असली समस्या बहुत बड़ी है और व्यापक है क्योंकि आंकड़े सामने आ ही नहीं पाते हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों के साथ ऐसा होना “भयानक है” और उससे भी भयानक यह कि यह सब अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है।

उन्होंने उन समुदायों का भी खुलकर नाम लिया, जिनमें यह लगातार होता है और उनमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगानी समुदाय सबसे बढ़कर है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जबरन शादी को “अरैन्ज मैरिज” के दायरे में कर दिया जाता है। मीडिया के अनुसार उन्होंने यह कहा कि यह सब परिवार अपनी इज्जत के लिए, परिवार के भीतर ही दौलत रहे इसके लिए या फिर पैसे के लिए करते हैं।

लोगों का कहना है कि जो स्कूल अब खुलेंगे उनमें कई बच्चे ऐसे आएंगे जिनकी या तो शादी हो चुकी होगी या फिर ऐसे होंगे, जिनकी शादी तय हो चुकी होगी। अप्रैल में होम ऑफिस से एक अलग डाटा जारी किया गया था, जिसमें सभी आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया था। उसमें यह दिखाया था कि ऐसे मामलों की संख्या यूके में बढ़ रही है, जिनमें बाहरी तत्व शामिल नहीं है। ऐसे में लोगों के प्रश्न हैं कि क्या वे सभी लोग यूके के नागरिक बन गए हैं?

“रिफॉर्म यूके के प्रवक्ता ज़िया यूसुफ ने इसे राजनीतिक रंग देते हुए कहा कि कंज़र्वेटिव पार्टी ने जो विश्वासघात किया है, उसके लिए उन्हें माफ नहीं किया जाएगा

 

Topics: जबरन शादीUK Forced MarriageChild Marriage in BritainForced Marriage Unitब्रिटेन में बाल विवाहPakistani Community in UKUK Home Office Report
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