भारत मंदिरों का देश था और जब हम भारत की बात करते हैं तो उसमें वर्तमान में पाकिस्तान और बांग्लादेश आते ही हैं, क्योंकि महज कुछ ही वर्ष पूर्व ये दोनों ही देश भारत के हिस्से थे, और सम्पूर्ण भारत ऐतिहासिक मंदिरों से भरा हुआ था। मगर हिंदुओं से अलग अस्तित्व की रट और उसके लिए तमाम हिंसा के बाद अंतत: 15 अगस्त 1947 को भारत के दो टुकड़े हो गए थे। और मुसलमानों के लिए जिन्ना ने पाकिस्तान मांग लिया था।
तो क्या उसके बाद पाकिस्तान में मंदिर रह पाए? बार-बार पाकिस्तान अपने मुल्क में हिंदुओं को लेकर तमाम ऐसे आँकड़े पेश करता रहता है, जिसमें झूठ और सफेद झूठ होता है, क्योंकि सच्चाई पाकिस्तान में ढहते हुए मंदिर और गुरुद्वारे बिना कहे खुद ही कहते देते हैं।
पंजाब के नारोवाल जिले में 100 से अधिक साल पुराने मंदिर को ढहाया गया
पाकिस्तान के पंजाब में लाहौर से लगभग 130 किलोमीटर दूर सिराज गाँव में एक सौ साल पुराना मंदिर था। और उसके बगल में एक मदरसा था, ऐसा कहा जा रहा है कि उस मदरसे की जमीन बढ़ाने के लिए इस मंदिर को ढहा दिया गया। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ग मीटर में फैला था। जिसे 21 अगस्त को जमीन में मिला दिया गया।
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) ने गिराया?
स्थानीय हिन्दू नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी का यह कहना है कि इस मंदिर को ढहाने में और किसी का नहीं बल्कि स्थानीय मजहबी कट्टरपंथियों का हाथ है, जिन्होंने मदरसा की जमीन को बढ़ाने के लिए इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया है। और ऐसा करने वाले लोग प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़े हुए लोग थे।
सरकार ने क्या कहा
वहीं स्थानीय शासन और अधिकारियों का यह कहना है कि यह मंदिर किसी ने जानबूझकर नहीं गिराया है, बल्कि यह मूसलाधार बारिश से अपने आप ढह गया, क्योंकि इसका ढांचा बहुत पुराना था, जो बारिश सह नहीं पाया। मगर उनके पास इस बात का कोई उत्तर नहीं है कि बारिश में पुराना ढांचा तो ढह गया, मगर मंदिर के पास जो मदरसा था, उसकी लीज जनवरी 2026 में ही रद्द करने के बाद अभी तक इस आदेश को लागू क्यों नहीं करवाया गया था।
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर ने जनवरी में ही मंदिर परिसर से मदरसा के अवैध कब्जे को हटाने का आदेश दिया था, मगर स्थानीय दबाव इतना था कि इस आदेश को लागू नहीं किया जा सका।
हिन्दू नेताओं ने की मंदिर को दोबारा बनाने की मांग
वहीं हिन्दू नेताओं ने सरकार से मांग की है कि मंदिर तोड़ने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाए और मंदिर का पुनर्निर्माण किया जाए। उन्होंने जो औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, उसमें राजस्व विभाग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि मंदिर पर पहले से ही कई लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। और इतना ही नहीं मंदिर को ध्वस्त करने के बाद उसके शिखर पर लगी कीमती धातुओं, फिटिंग्स, और ईंटों को भी वहाँ से तुरंत ही चोरी करके हटा दिया।
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान क्या है?
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान का एक मजहबी कट्टरपंथी समूह और राजनीतिक दल है, और कहने के लिए यह इस्लाम के पैगंबर की इज्जत की रक्षा करने के लिए है, मगर वह इतना कट्टर समूह है कि बेअदबी के लिए “सिर तन से जुदा” तक के नारों को उसने आम अवाम में लोकप्रिय बना दिया है।
बेअदबी की आरोपी ईसाई महिला आसिया बीबी का बचाव करने वाले सलमान तासीर की हत्या करने वाले मुमताज कादरी के बहाने इस संगठन की शुरुआत हुई थी, जो बाद में एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत हुआ। वह बेअदबी के कानून का कट्टर समर्थक है और उसका मानना है कि इस्लाम के पैगंबर की बेअदबी के लिए केवल मौत की सजा ही दी जानी चाहिए और उसका यह भी मानना है कि यह काम अदालत से बाहर भी किया जा सकता है।
हालांकि, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसे एक आतंकी संगठन के रूप में प्रतिबंधित करने का साहस दिखाया था, मगर बाद में हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने पैर पीछे खींच लिए थे। यह भी पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट में है कि जहां पर यह मंदिर था अर्थात नारोवाल में, वहाँ पर तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान का काफी असर है और यही कारण है कि मंदिर के एकदम बगल वाली जमीन को एक मदरसे को लीज पर दिया गया था, जिसका कई सालों से किराया नहीं दिया गया था, इसीलिए इस मदरसे को नोटिस जारी किया गया था, मगर तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के कुछ नेताओं के चलते यह आदेश लागू नहीं हो पाया था और अब अंतत: उस मंदिर को ढहा दिया गया है, या शासन के शब्दों में कहें कि बारिश के चलते गिर गया।
मगर इस बात का जबाव नहीं है कि मंदिर के शिखर की कीमती धातुएं कहाँ गईं? अपने आप मंदिर गिरा तो उसकी सामग्री कहाँ गई?
नारोवाल जिला शांति कमिटी और पाक धर्मस्थयन हिन्दू समिति के सदस्य रतन लाल तो यहाँ तक कह रहे हैं कि उन्हें मंदिर वाली जगह पर जाने से भी डर लग रहा है, क्योंकि अभी भी वहाँ पर मदरसा चल रहा है।











