विश्व

नेपाल के साथ खड़ा हुआ भारत

नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही। अब तक 162 लोगों की मौत। बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत सरकार ने भेजी राहत सामग्री। दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अभाविप और विश्व हिंदू परिषद ने हर संभव मदद का दिया आश्वासन

Published by
Panchjanya

गत 26 अगस्त को नेपाल के विभिन्न जिलों में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने व्यापक जनधन की क्षति पहुंचाई। विशेष रूप से रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, चितवन और पूर्वी नवलपरासी में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं, बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और अनेक परिवार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। पशुधन की भी भारी क्षति हुई है। नेपाल पुलिस के अनुसार, भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 162 हो गई है। राहत एवं खोज-बचाव अभियान के दौरान कई शव नदी के निचले प्रवाह वाले क्षेत्रों से बरामद किए गए। इनमें चितवन जिले में 64 तथा पूर्वी नवलपरासी में 26 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं

सैकड़ों पर्यटक लापता

प्राकृतिक आपदा के बीच नेपाल घूमने आए बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों के भी संपर्कविहीन होने की चिंताजनक जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 500 से अधिक पर्यटकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जिनमें 466 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता लोगों में 142 भारतीय, 54 अमेरिकी और 33 ब्रिटिश नागरिक बताए गए हैं। विशेष रूप से गोसाइंकुण्ड तथा मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने तथा संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण कई यात्रियों से संपर्क स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सड़क और पुलों को भारी नुकसान

बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के परिवहन एवं संपर्क तंत्र को भी बुरी तरह प्रभावित किया। विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 40 से 50 किलोमीटर सड़कें बह जाने या क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। करीब 18 पुलों के बह जाने अथवा क्षतिग्रस्त होने से अनेक गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह टूट गया है। कई स्थानों पर राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है। सड़क संपर्क टूटने के कारण प्रभावित बस्तियों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाना राहत एवं बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

राहत अभियान

सेवा इंटरनेशनल नेपाल और हिंदू स्वयंसेवक संघ नेपाल के कार्यर्ता संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्य कर रहे हैं। ये कार्यर्ता प्रभावित क्षेत्रों में जा रहे हैं और पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। अनेक बाधाओं के बावजूद इन संगठनों के स्वयंसेवक राहत कार्य में लगे हैं।

भारत ने भेजी राहत सामग्री

इस आपदा के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की और हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। इसके बाद भारत ने 10 टन मानवीय/आपदा राहत सामग्री नेपाल भेजी। भारतीय वायुसेना का सी-130 जे विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। इसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, हाइजीन किट और मेडिकल सामान शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार भारत की मानवीय सहायता, आपदा राहत और मेडिकल सहायता काठमांडू पहुंच चुकी है, तथा अतिरिक्त सहायता भेजी जा रही है। एस. जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत हर हाल में नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति भी अपनी सहानुभूति व्यक्त की।
भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और दवाइयां नेपाल के राहत प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम हैं। इसके साथ ही भारतीय दूतावास ने नेपाल में फंसे/लापता भारतीयों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन भी जारी की है।

बिजली, पानी और संचार सेवाएं प्रभावित

बाढ़ एवं भूस्खलन के कारण अनेक इलाकों में बिजली, पीने का पानी, टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गई हैं। इससे प्रभावित परिवारों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। अस्पतालों की सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं, जबकि विद्यालयों के भवनों, पहुंच मार्गों तथा शैक्षणिक गतिविधियों पर भी गंभीर असर पड़ा है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में खोज, बचाव और राहत कार्य में जुटी हुई हैं। हालांकि दुर्गम भूगोल, लगातार बदलती मौसम की स्थिति और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण अभियान में कठिनाइयां आ रही हैं।

जग्गी वासुदेव ने दी जानकारी

इस बीच आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव ने मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस यात्रा पर गए 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। उनके अनुसार, वर्तमान में 743 लोग तिब्बत और 148 लोग नेपाल में हैं। इसके अतिरिक्त 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर में हैं तथा उनके तीन स्वयंसेवक तिमुरे, नेपाल में मौजूद हैं। प्राकृतिक आपदा के बीच यात्रियों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को प्राथमिकता दी जा रही है।

राहत सामग्री और खाद्य सामग्री का संकलन

राहत अभियान को व्यापक रूप देने के लिए काठमांडू में राहत सामग्री तथा खाद्य सामग्री के संकलन का कार्य भी शुरू किया गया है। स्वयंसेवक विभिन्न स्थानों से आवश्यक वस्तुएं एकत्रित कर उन्हें प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था में जुटे हैं। भोजन, पेयजल, कपड़े, स्वच्छता सामग्री, प्राथमिक उपचार तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं को प्राथमिकता के आधार पर संकलित किया जा रहा है। स्वयंसेवक प्रभावित परिवारों तक शीघ्र और व्यवस्थित रूप से सहायता पहुंचाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। सेवा कार्य से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना और उनकी तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करना प्राथमिकता है। राहत अभियान को आवश्यकता के अनुसार आगे भी विस्तारित किया जाएगा।

अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने नागरिकों से काठमांडू–नारायणगढ़ मार्ग पर अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की है। लगातार बाढ़, भूस्खलन और सड़क एवं पुलों को हुए नुकसान के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित है और कई स्थानों पर यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से मौसम और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने, जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करने का आग्रह किया है।

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