उधम सिंह नगर: रुद्रपुर में मिलाद-उन्नबी जुलूस के दौरान एक मौलवी द्वारा दिये गये भड़काऊ बयान का मामला अभी गर्माया हुआ है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि देवभूमि में मुल्लावादी सोच नहीं चलेगी।
उधर ये जानकारी मिली है कि भड़काऊ भाषण देने वाला मौलवी भी बिना अनुमति के मदरसा चला रहा है साथ ही राज्य में कई और मदरसे भी बिना अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की अनुमति के चल रहे हैं। जिनके खिलाफ कार्रवाई न होने पर मदरसा बोर्ड खत्म किए जाने उसके स्थान पर प्राधिकरण की मान्यता लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। उत्तराखंड देश का वह पहला राज्य है जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मदरसा बोर्ड को भंग कर 1 जुलाई 2026 से ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया था।
‘एक राज्य, एक शिक्षा’ है उद्देश्य
इस पहल का एकमात्र और स्पष्ट उद्देश्य था—’एक राज्य, एक शिक्षा’। सरकार की मंशा थी कि मदरसों में पढ़ने वाले गरीब से गरीब बच्चे भी केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक विज्ञान, गणित और तकनीक सीखकर डॉक्टर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट और पायलट बनने का सपना पूरा कर सकें। लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों को बच्चों का यह उज्ज्वल भविष्य फूटी आंख नहीं सुहा रहा। उल्लेखनीय है कि मदरसों के नाम पर आने वाला मोटा चंदा और संदिग्ध फंडिंग हमेशा के लिए बंद हो जाएगी। यही कारण है कि प्राधिकरण के गठन के खिलाफ मुल्ला मौलवी उलेमाओं के धामी सरकार के खिलाफ बिगड़े बोल बोले जा रहे हैं।
रुद्रपुर में मौलवी जाहिद रजा जैसे लोगों ने मदरसों के संचालकों को भड़काकर एक यूनियन बनाई और उन्हें शिक्षा विभाग से मान्यता न लेने के लिए उकसाया। हकीकत यह है कि जाहिद रजा द्वारा संचालित मदरसा जमीअतुल हसनात (शीर गोटिया, रुद्रपुर) खुद बिना किसी कानूनी मान्यता के अवैध रूप से चल रहा है। त्रिशूल चौक से जहरीले बयान देने वाले मुफ्ती का मदरसा फैजूल मुस्तफा रजा पब्लिक स्कूल (वार्ड 18, खेड़ा ईदगाह, रुद्रपुर) भी पूरी तरह अवैध है और बिना अनुमति के चल रहा है। उधम सिंह नगर जिले में आधा दर्जन मदरसे और हरिद्वार जिले में 9 मदरसे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि अपने पहले सत्र में 7 मदरसों समेत 9 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता दे चुका है और 2 सितंबर को 26 अन्य मदरसों को मान्यता देने जा रहा है। लगभग 200 मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए इन्वेस्टमेंट पोर्टल पर आवेदन कर रखा है। लगभग 200 से अधिक मदरसे आज भी शिक्षा विभाग में बिना आवेदन किए पूरी तरह अवैध रूप से फल-फूल रहे हैं। इन्हें उत्तराखंड में संचालित नहीं करने दिया जायेगा।
जानकारी के मुताबिक कुछ कट्टरपंथी मौलवी अपनी निजी दुकानदारी और राजनीतिक रसूख बचाए रखने के लिए अपने धार्मिक विचारों वाली शिक्षा से हज़ारों बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे है।
स्कूल नहीं, अभेद्य किलों की तरह बनाए गए हैं मदरसे
उत्तराखंड में संचालित अधिकांश बड़े मदरसे किसी सामान्य स्कूल या शैक्षणिक संस्थान की तरह नहीं दिखते, बल्कि वे ‘अभेद्य किलों’ की तरह निर्मित किए गए हैं। इन किलेनुमा इमारतों में रहने और पढ़ने वाले बच्चों का बाहरी समाज, आधुनिक विचारों और मुख्यधारा से संपर्क लगभग शून्य कर दिया जाता है। यह अलगाववाद की मानसिकता को जन्म देने की पहली सीढ़ी है। इतने बड़े-बड़े किलेनुमा ढांचे, जहां सैकड़ों बच्चों के रहने-खाने की व्यवस्था होती है, उन्हें चलाने के लिए अकूत पैसा कहां से आ रहा है? इन संस्थानों के वित्तीय स्रोतों की जांच पड़ताल हुई तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आएंगे।
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बिना प्राधिकरण मान्यता वाले मदरसे नहीं चलने दिए जाएंगे ये सरकार का स्पष्ट निर्देश है और इस बारे में सभी जिलाधिकारियों और जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों शिक्षा विभाग को जानकारी दे दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि देवभूमि में मुल्लावादी सोच नहीं चलेगी , यहां मदरसे ,अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अम्ब्रेला के नीचे मान्यता लेकर शिक्षा विभाग से संबद्ध होंगे और इनमें राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा।

















