हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए हवन-यज्ञ एवं कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को कांग्रेस द्वारा भाजपा, आरएसएस और मल्लिकार्जुन खड़गे जी की सामाजिक पृष्ठभूमि से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इस संबंध में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
1. शुद्धिकरण कार्यक्रम भाजपा या सरकार द्वारा आयोजित नहीं किया गया
10 अगस्त को रामलीला मैदान में आयोजित हवन-यज्ञ एवं शुद्धिकरण कार्यक्रम श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास द्वारा आयोजित किया गया था। यह न तो उत्तराखंड सरकार का कार्यक्रम था और न ही भाजपा द्वारा आधिकारिक रूप से आयोजित कार्यक्रम। ऐसे में स्वतंत्र संगठन के आयोजन को सीधे भाजपा अथवा राज्य सरकार से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।
2. आयोजकों ने कार्यक्रम को जाति से नहीं, धार्मिक आस्था से जोड़ा
आयोजक संगठन का साफ कहना है कि यह कार्यक्रम मल्लिकार्जुन खड़गे जी की जाति अथवा सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर नहीं किया गया था। इसे रामलीला मैदान की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान तथा कांग्रेस की जनसभा के दौरान कथित रूप से हुई कुछ *आपत्तिजनक गतिविधियों (जगह जगह पिशाब की बोतल फेंकी गई थी, जिहादी नारे लगाए गए थे)* के विरोध से जोड़ा गया।
3. शुद्धिकरण में दलित समाज के लोगों की भागीदारी
हवन-यज्ञ एवं शुद्धिकरण कार्यक्रम में अनुसूचित जाति समाज से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया और भगवान श्रीराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। इसलिए इसे केवल दलित विरोध से जोड़ने से पहले इस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
4. रामलीला मैदान की अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान है
हल्द्वानी का रामलीला मैदान लंबे समय से रामलीला एवं अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। आयोजक संगठन का कहना है कि उनका कार्यक्रम इसी धार्मिक आस्था और मैदान की सांस्कृतिक गरिमा से संबंधित था।
5. जनसभा के दौरान कथित घटनाओं को लेकर आयोजकों ने जताई थी आपत्ति
कांग्रेस की 8 अगस्त की जनसभा के दौरान कुछ आपत्तिजनक गतिविधियां होने के आरोप सामने आए थे। आयोजक संगठन ने इन्हीं कथित घटनाओं को अपनी धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए हवन-यज्ञ आयोजित करने की बात कही है। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
रामलीला मैदान में हुआ हवन-यज्ञ एवं शुद्धिकरण कार्यक्रम एक स्वतंत्र धार्मिक संगठन द्वारा आयोजित किया गया था। इसे भाजपा अथवा उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित किए जाने का कोई पुष्ट आधार सामने नहीं आया है। इसी प्रकार, आयोजकों ने कार्यक्रम का कारण मल्लिकार्जुन खड़गे जी की जातीय पहचान को नहीं, बल्कि रामलीला मैदान की धार्मिक-सांस्कृतिक गरिमा और जनसभा के दौरान हुई कथित गतिविधियों को बताया है।
अतः बिना पुष्ट प्रमाण के इस स्वतंत्र धार्मिक आयोजन को भाजपा या राज्य सरकार से जोड़ना अथवा इसे मल्लिकार्जुन खड़गे जी की जाति के आधार पर की गई कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना तथ्य नहीं, बल्कि एक राजनीतिक आरोप है।












