अंग्रेजों द्वारा किए गए जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड को लेकर पंजाब का एक मशहूर देशभक्ति पूर्ण लोकगीत है ‘लखड़ी लै के भैणां उड़ीकन, वीर ना घर नूं आए नीं, उड्ड गए गोलीयां नाल बेदोषे, कई मावां दे जाए नी।’ पर इस रक्षाबंधन के पर्व से पहले पंजाब में बढ़े नशे के चलते इस दर्दनाक गीत का नया वर्जन भी प्रसिद्ध हो रहा है, जो इस तरह है ‘रखड़ी लै के भैणां उड़ीकन वीर ना घर नूं आए नी, मुक्क गए नशेयां नाल प्यारे कई मावां दे जाए नी।’ अर्थात बहनें राखी लेकर अपने भाईयों का इंतजार कर रही हैं, पर वो घर लौट कर नहीं आने वाले, माँओं के ये प्यारे नशों के कारण मारे जा चुके हैं।
भाजपा नेता अक्षय बने इन बहनों के भाई
रक्षाबंधन के पावन पर्व के उपलक्ष्य में गुरुओं की नगरी अमृतसर में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अक्षय शर्मा ऐसे में इन सैंकड़ों बहनों के भाई बन कर सामने आए हैं। उनकी ओर से राखी महासम्मेलन का आयोजन किया गया। भव्य कार्यक्रम में भारी संख्या में मातृशक्ति ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का सबसे भावुक पहलू वह रहा जब नशे के दंश के कारण अपने पिता, पुत्र या भाई को खो चुकीं करीब 356 पीडि़त महिलाओं ने अक्षय शर्मा को राखी बांधकर अपना भाई स्वीकार किया।
प्रभावित परिवारों से निरंतर संपर्क
कार्यक्रम के दौरान माहौल उस समय अत्यंत भावुक हो गया जब इन पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने अक्षय शर्मा की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। बता दें कि अक्षय शर्मा लंबे समय से नशे से प्रभावित इन परिवारों के निरंतर संपर्क में हैं और उनकी हरसंभव सहायता करते आ रहे हैं। भावुक बहनों को ढांढस बंधाते हुए भाजपा नेता अक्षय शर्मा ने कहा कि ये महिलाएं उनके लिए केवल हलका उत्तरी की निवासी नहीं, बल्कि उनके अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं।
कई परिवार गरीबी रेखा से नीचे
उन्होंने इन परिवारों के दर्द को बहुत करीब से देखा और महसूस किया है। कार्यक्रम के जरिए जहां उन्होंने विरोधियों के समक्ष अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ और जनसमर्थन का प्रदर्शन किया, वहीं यह संदेश भी दिया कि जनता के साथ सच्चा जुड़ाव ही वास्तविक ताकत है। शर्मा ने कहा कि हलका उत्तरी के कई इलाकों में परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने को विवश हैं।
माताओं का आशीर्वाद देता है ऊर्जा
गरीबी कोई स्थायी मजबूरी नहीं बल्कि परिस्थितियों की देन है, जिसे इच्छाशक्ति और सही नीतियों से बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए युवाओं को आगे आकर नेतृत्व और जिम्मेदारी संभालनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि माताओं और बहनों का आशीर्वाद ही युवा शक्ति को नई ऊर्जा देता है। उनका मुख्य लक्ष्य हलका की तस्वीर को बदलना है, ताकि यहां का हर नागरिक मजबूर नहीं बल्कि आत्मनिर्भर और मजबूत बने।
















