विभाजन की विभीषिका : ‘सरकार ने हिंदुओं को मरने के लिए छोड़ दिया था’
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विभाजन की विभीषिका : ‘सरकार ने हिंदुओं को मरने के लिए छोड़ दिया था’

श्री केशव स्मारक समिति के तत्वावधान में नई दिल्ली के झंडेवाला स्थित केशव कुंज में ‘भारत विभाजन की त्रासदी’ विषय पर संगोष्ठी एवं वार्ता का आयोजन हुआ। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रख्यात लेखक, विचारक, स्तंभकार प्रशांत पोल ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने 1905 में बंग-भंग की घोषणा की। इसके विरुद्ध बंगाल सहित पूरा देश एकजुट होकर खड़ा हो गया।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 21, 2026, 03:42 pm IST
inदिल्ली
संगोष्ठी को आनलाइन संबोधित करते हुए प्रशांत पोल

संगोष्ठी को आनलाइन संबोधित करते हुए प्रशांत पोल

गत 8 अगस्त को श्री केशव स्मारक समिति के तत्वावधान में नई दिल्ली के झंडेवाला स्थित केशव कुंज में ‘भारत विभाजन की त्रासदी’ विषय पर संगोष्ठी एवं वार्ता का आयोजन हुआ। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रख्यात लेखक, विचारक, स्तंभकार प्रशांत पोल ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने 1905 में बंग-भंग की घोषणा की। इसके विरुद्ध बंगाल सहित पूरा देश एकजुट होकर खड़ा हो गया। ब्रिटिश सत्ता को इस एकजुटता के सामने झुकना पड़ा तथा 1911 में बंग-भंग का प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इसके पश्चात ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि देश को विभाजन झेलना पड़ा और इतना बड़ा नरसंहार हुआ।

भारत विभाजन की त्रासदी अत्यंत वेदनादायक थी। विश्व के इतिहास में अन्य किसी देश ने ऐसी त्रासदी नहीं झेली होगी। स्वतंत्रता से पहले और बाद में हुए दंगों या कहें नरसंहार से लाखों हिंदू (अधिकांश) प्रभावित हुए। मुस्लिम लीग ने ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की घोषणा कर पहले 16 अगस्त, 1946 को, फिर अक्तूबर 1946 में नोआखली में हिंदुओं का नरसंहार किया। 15 हजार से अधिक हिंदुओं को मारा गया। विभाजन से ठीक पहले पाकिस्तान में दंगे हो रहे थे, हिंदू और सिखों को मारा व भगाया जा रहा था। सिंध प्रांत की सरकार में मंत्री खुर्रम ने अपने भाषणों में यहां तक कह दिया था कि अपनी बहू-बेटियों को छोड़ जाओ और यहां से भाग जाओ।

उन्होंने कहा कि जून, 1947 में कांग्रेस के अधिवेशन में विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। 14-15 अगस्त की रात देश का विभाजन हुआ। उस समय कांग्रेस देश की बड़ी ताकत थी। तत्कालीन अतंरिम सरकार व कांग्रेस के पास दो-ढाई माह का समय था, लेकिन तत्कालीन अंतरिम सरकार ने लोगों की सुरक्षा के लिए क्या किया, क्या कदम उठाए? जब तथ्यों को देखते हैं तो ध्यान में आता है कि सरकार ने एक तरह से लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया था। लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाए।

अंतरिम सरकार और कांग्रेस आवश्यक कदम उठाते तो अनेक लोगों की जान बच सकती थी। इसके विपरीत, सीमित शक्ति के बावजूद संघ के स्वयंसेवक राहत व सेवा कार्य में जुटे हुए थे। स्वयंसेवकों ने राहत शिविरों में प्रतिदिन 1.25 लाख से अधिक विस्थापितों के लिए भोजन की व्यवस्था की।उन्होंने कहा कि लाहौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक में गांधी जी ने अपने भाषण में कहा, “…मुझे यह देखकर बहुत ही बुरा लग रहा है कि पश्चिमी पंजाब से सभी गैर-मुस्लिम लोग पलायन कर रहे हैं। कल ‘वाह’ के शिविर में भी मैंने यही सुना, और आज लाहौर में भी मैं यही सुन रहा हूं, ऐसा नहीं होना चाहिए। यदि आपको लगता है कि आपका लाहौर शहर अब मृत होने जा रहा है, तो इससे दूर न भागें, बल्कि इस मरते हुए शहर के साथ ही आप भी अपना आत्मबलिदान करते हुए मृत्यु का वरण करें। जब आप भयग्रस्त हो जाते हैं, तब वास्तव में आप मरने से पहले ही मर जाते हैं, यह उचित नहीं है। मुझे कतई बुरा नहीं लगेगा, यदि मुझे यह खबर मिले कि पंजाब के लोगों ने डर के मारे नहीं, बल्कि पूरे धैर्य के साथ मृत्यु का सामना किया…!”

उन्होंने कहा कि इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने कराची में प्रभात शाखा में प्रार्थना की और शाखा पूर्ण करने के उपरांत एक बैठक में उपस्थित रहे। सिंध प्रांत के सभी प्रमुख शहरों के संघचालक, कार्यवाह एवं प्रचारक बैठक में उपस्थित थे। बैठक में पाकिस्तान के हिंदू-सिखें को भारत में सुरक्षित रूप से कैसे पहुंचाया जाए, इस बारे में योजना बनाई जा रही थी।

उन्होंने कहा कि जहां एक ओर कराची में जिन्ना की ताजपोशी हो रही थी। उसी दिन शाम के समय राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका लक्ष्मीबाई केलकर (मौसी जी) सेविकाओं, हिंदू महिलाओं को ढाढस बंधा रही थीं। संक्षिप्त भाषण के अंत में मौसीजी ने कहा… “बहनें धैर्यशाली बनें, धीरज रखें… अपनी इज्जत बचाएं… अपने संगठन पर पूरा भरोसा करें। इस कठिन समय में भी अपनी मातृभूमि की सेवा का व्रत निरंतर जारी रखें। संगठन की ताकत द्वारा, हम इस संकट से सुरक्षित रूप से निकल जाएंगे।” संगोष्ठी में बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Topics: श्रीगुरुजीविभाजन की त्रासदीलक्ष्मीबाई केलकरझंडेवालाराष्ट्र सेविका समितिमहात्मा गांधी भाषणविभाजन की विभीषिकाहिंदू-सिख पलायनडायरेक्ट एक्शन डेराहत शिविर एवं सेवा कार्यनोआखली दंगेकेशव कुंजRSSश्री केशव स्मारक समितिअंतरिम सरकारभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसप्रशांत पोल
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