राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के विदेश दौरे पर उन शक्तियों की भी नजर है, जो भारत को बढ़ते हुए नहीं देख सकती। अमेरिका की संस्था यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (USCIRF) ने एक बार फिर भारत के प्रति अपनी कुटिल सोच का परिचय दिया है। इस संस्था ने सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे का विरोध किया है। यहां यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस संस्था के मुखिया आसिफ महमूद हैं, जिनका जन्म ही आतंकवाद के गढ़ पाकिस्तान में हुआ है।
इसी माह के अंत तक अमेरिका दौरे पर जाएंगे मोहन भागवत
श्री मोहन भागवत इसी महीने के अंत में अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। यह बात वामपंथी संगठनों और डीप स्टेट को कैसे सही लगती। यूएससीआईआरएफ ने उनके इस दौरे का विरोध किया है। इसका यह भी कहना है कि यह संगठन धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और इसके सदस्यों पर प्रतिबंध लगाया जाए। वैसे USCIRF की यह कुटिल चाल नई नहीं है। इससे पहले भी वह भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ और राष्ट्रनिष्ठ संगठन आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग पहले भी कर चुका है। इसके अध्यक्ष आसिफ महमूद को संघ ही नहीं भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से भी तकलीफ है। महमूद ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं। यह भारत का एक बड़ा संगठन है और जिसके कुछ संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, ईसाई और मुस्लिम पर हमले के आरोप हैं। अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका की यात्रा की योजना बना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भारत के खिलाफ उगला था जहर
इसी यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम ने गत दिनों एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें उनसे भारत को “विशेष चिंता का देश” घोषित करने की सिफारिश की थी। इस संस्था के चीफ आसिफ महमूद से पारदर्शिता की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि वह एक ऐसी जगह (पाकिस्तान) से आते हैं जहां हिंदू, ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध जैसे अल्पसंख्यकों को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया है, उनकी हत्याएं की गई हैं, उन्हें जबरदस्ती इस्लाम में परिवर्तित किया गया है।
पहले की रिपोर्ट और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा रॉ को प्रतिबंधित करने की उनकी जहरीली योजना ने पहले ही दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह आयोग उन आतंकी समूहों और देशों को संरक्षण देकर मानवता को मिटाने की कोशिश कर रहा है, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनकी संस्कृतियों की हत्या कर रहे हैं। इसमे अमेरिकी हिंदू मंदिरों पर हमलों को लगातार अनदेखा किया? संयुक्त राज्य अमेरिका में विभिन्न अल्पसंख्यकों पर नस्लीय हमलों को अनदेखा किया गया? 11 सितंबर, 2001 को पाकिस्तान के एक आतंकवादी द्वारा किए गए आतंकी हमले को भुला दिया?

















