वैसे तो नरेंद्र सिंह नेगी अपनी गढ़वाली गीत-लेखन, गायन और लोक संगीत के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके नाम से जुड़ी एक घटना है जो उन्हें पुरस्कारों की दुनिया में अलग पहचान दिलाती है। उनके नाम पर सम्मान शुरू हुआ और उस सम्मान की पहली कड़ी में सम्मानित भी स्वयं नरेंद्र सिंह नेगी हुए। जिस नाम को सम्मान का नाम बनाया गया, उसी नाम के व्यक्ति को पहला सम्मान मिलना अपने आप में अनोखी बात है। नरेंद्र सिंह नेगी भारत में अकेले ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें अपने नाम पर पहला सम्मान मिला।
अपने नाम के सम्मान पाने वाले दिग्गज
दुनिया में अपने नाम पर बने सम्मान को स्वयं पाने वाले बड़े व्यक्तित्वों के उदाहरण जरूर मिलते हैं। सबसे उल्लेखनीय उदाहरण भौतिकी के महान वैज्ञानिक मैक्स प्लैंक का है। मैक्स प्लैंक के नाम पर जर्मन फिजिकल सोसाइटी ने 1929 में Max Planck Medal की शुरुआत की। उसी वर्ष पहला Max Planck Medal स्वयं मैक्स प्लैंक और अल्बर्ट आइंस्टीन को प्रदान किया गया। यानी प्लैंक को अपने नाम का सम्मान मिला, लेकिन वे अकेले पहले सम्मानित व्यक्ति नहीं थे। उनके साथ आइंस्टीन भी उस पहली सम्मान-सूची में थे। विज्ञान-कथा की दुनिया में ह्यूगो गर्नसबैक का प्रसंग भी अपने ढंग का है। उनके नाम पर Hugo Award की शुरुआत 1953 में हुई। मगर उस पहले आयोजन में स्वयं ह्यूगो गर्नसबैक सम्मानित नहीं हुए। अलग-अलग श्रेणियों में दूसरे लेखक और कलाकार पुरस्कार पाने वाले बने। वर्षों बाद 1960 में गर्नसबैक को Special Hugo Award दिया गया। यानी उनके नाम पर बने पुरस्कार और स्वयं उनके सम्मानित होने के बीच समय का अंतर रहा।
भारत में लता मंगेशकर का उदाहरण इस फर्क को और साफ करता है। लता मंगेशकर के नाम पर एक नहीं, अलग-अलग राज्यों में सम्मान की परंपराएं बनीं। मध्य प्रदेश सरकार ने 1984 में लता मंगेशकर सम्मान शुरू किया। यह सम्मान संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है और इसकी पहली सम्मानित हस्ती स्वयं लता मंगेशकर नहीं, बल्कि महान संगीतकार नौशाद थे। महाराष्ट्र सरकार ने भी 1992 में लता मंगेशकर पुरस्कार की शुरुआत की। इसका उद्देश्य संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित करना था और इसकी पहली सम्मानित हस्ती माणिक वर्मा रहीं। यानी यहां भी वही बात सामने आती है- सम्मान का नाम लता मंगेशकर का, लेकिन उस सम्मान की पहली कड़ी में सम्मानित कोई दूसरा कलाकार।
अपने ही नाम का पहला सम्मान
आंध्र प्रदेश में भी लता मंगेशकर के नाम से पुरस्कार दिए जाने का उल्लेख मिलता है। 2011 में शंकर महादेवन और के. एस. चित्रा को लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबरें सामने आई थीं। इस तरह लता मंगेशकर के नाम से अलग-अलग जगहों पर सम्मान की परंपरा बनी और उनके नाम के साथ अनेक बड़े कलाकारों के नाम जुड़े। नरेंद्र सिंह नेगी का प्रसंग इसी जगह आकर अलग हो जाता है। वर्ष 2024 में ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान’ की शुरुआत हुई और उसका पहला सम्मान स्वयं नरेंद्र सिंह नेगी को प्रदान किया गया। ये इन्होंने स्वयं तय नहीं किया बल्कि एक स्वतंत्र ज्यूरी ने किया। यही वह छोटा-सा फर्क है, जो इस पूरे प्रसंग को बड़ा बना देता है। दुनिया में मैक्स प्लैंक हैं, ह्यूगो गर्नसबैक हैं; भारत में लता मंगेशकर जैसा विराट नाम है। अपने नाम से जुड़े सम्मान पाने वाले व्यक्तित्वों के उदाहरण दुनिया में मिलते हैं, लेकिन नरेंद्र सिंह नेगी का प्रसंग अपनी पहली ही कड़ी में अपने नाम और सम्मानित व्यक्ति को एक कर देता है।
किसी व्यक्ति के नाम पर सम्मान होना उसके योगदान की स्वीकृति है। लेकिन उसी नाम से शुरू हुई सम्मान-परंपरा की पहली सम्मानित हस्ती वही व्यक्ति बने, तो यह पुरस्कारों के इतिहास का एक दुर्लभ और रोचक प्रसंग बन जाता है। भारत के पुरस्कारों के इतिहास में नरेंद्र सिंह नेगी का नाम इस बात के लिए भी याद किया जाएगा कि उनके नाम पर शुरू हुए सम्मान की पहली सम्मानित हस्ती स्वयं नरेंद्र सिंह नेगी रहे।

















