अफगानिस्तान में तालिबान शासन के 5 साल: मानवाधिकार संकट और बढ़ते राजनयिक संपर्क
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अफगानिस्तान में तालिबान शासन के 5 साल: मानवाधिकार संकट और बढ़ते राजनयिक संपर्क

तालिबान के शासन के पाँच साल पूरे। महिलाओं की शिक्षा बंद, मानवाधिकारों का कब्रिस्तान बना अफगानिस्तान। भारत, चीन, रूस समेत कई देशों से संपर्क बढ़े।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 16, 2026, 06:23 am IST
inविश्व

अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के पाँच साल पूरे हो चुके हैं। 2021 में काबुल पर कब्जा करने के बाद से कई देश अब उनके साथ राजनयिक संपर्क बढ़ा रहे हैं। मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि ये संपर्क उनके अधिकारों की मांग को कमजोर कर सकते हैं।

मानवाधिकार की मौजूदा स्थिति

संयुक्त राष्ट्र ने हाल में कहा कि तालिबान के कई नए नियम और कानूनों की वजह से अफगानिस्तान मानवाधिकारों का कब्रिस्तान बन गया है। महिलाओं को विश्वविद्यालय और ज्यादातर नौकरियों से रोक दिया गया है। किशोर लड़कियों की शिक्षा बंद है। सख्त ड्रेस कोड लागू है। अल्पसंख्यक समुदायों पर दबाव है। कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर भी दमन हो रहा है। नए कानूनों में घरेलू हिंसा को सिर्फ अत्यधिक मारपीट तक सीमित कर दिया गया है और लड़कियों की शादी बिना सहमति के आसान बना दी गई है।

किन देशों से संपर्क बढ़े

भारत, कतर, चीन, ईरान और कई मध्य एशियाई देशों ने हाल में तालिबान अधिकारियों का स्वागत किया या नए संपर्क खोले। रूस ने पिछले साल तालिबान सरकार को मान्यता दी और पिछले महीने सैन्य सहयोग समझौता किया। जून में यूरोपीय संघ ने ब्रुसेल्स में तालिबान अधिकारियों से बातचीत की। यह 2021 के बाद पहली औपचारिक मुलाकात थी, जिसमें असफल शरणार्थियों को वापस भेजने पर चर्चा हुई। कुछ यूरोपीय देशों ने भी अपने संपर्क बढ़ाए हैं।

ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के अधिकारी काबुल गए। वे व्यापार मार्ग और पाइपलाइन डील की बात कर रहे हैं ताकि उनके भूमिबद्ध देशों को समुद्री बंदरगाह तक पहुंच मिले। भारत ने तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के लिए प्रतिबंध में छूट हासिल की ताकि वे वहां जा सकें। भारत के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि ने कहा कि अफगानिस्तान की राजनीतिक हकीकत बदल गई है, इसलिए प्रतिबंधों पर फिर से सोचना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी : सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लगभग एक दशक बाद काबुल का दौरा किया। चीन ने तालिबान अधिकारियों का स्वागत किया और अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव पर बातचीत की मेजबानी भी की। ब्रिटेन सीमित और व्यावहारिक संपर्क रखता है। जर्मनी सहित कुछ यूरोपीय राजधानियों में तालिबान के नियंत्रण वाले वाणिज्य दूतावास हैं।

संपर्क क्यों बढ़ रहे हैं

क्षेत्रीय सुरक्षा की चिंता, पश्चिमी देशों में अवैध प्रवास कम करने का दबाव और यह समझ कि तालिबान जल्दी सत्ता नहीं छोड़ेंगे, ये मुख्य वजहें हैं। तालिबान खनन क्षेत्र बढ़ा रहे हैं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर जोर दे रहे हैं। चीन और पड़ोसी देशों की कंपनियां खनिज संसाधनों में रुचि दिखा रही हैं।

विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं की राय

दिल्ली के ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के शिवम शेखावत कहते हैं कि तालिबान अब आत्मविश्वास में हैं। वे किसी भी संपर्क को राजनयिक जीत मानते हैं और इससे अपनी वैधता बढ़ाने की कोशिश करते हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच की अफगानिस्तान शोधकर्ता फरेशता अब्बासी कहती हैं कि मदद एजेंसियों के लिए संपर्क जरूरी हो सकता है, लेकिन अंत में क्या चर्चा हो रही है, इसकी चिंता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट संदेश देना चाहिए कि महिलाओं और मानवाधिकारों में असली सुधार के बिना दोस्ती नहीं मिलेगी।

तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद कहते हैं कि वे सभी देशों से संबंध चाहते हैं, खासकर क्षेत्रीय और पड़ोसी देशों से क्योंकि आर्थिक हित जुड़े हैं। विश्लेषक कहते हैं कि तालिबान के अंदर महिलाओं की शिक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन रूढ़िवादी गुट हावी हैं। हिबतुल्लाह अखुंदजादा का प्रभाव जारी है। पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रामिन मंसूरी कहते हैं कि तालिबान का मुख्य फोकस घरेलू एजेंडा है और बड़े रियायत देने की संभावना कम है।

Topics: तालिबान शासन 5 सालअफगानिस्तान मानवाधिकारतालिबान राजनयिक संपर्कमहिलाओं की शिक्षा अफगानिस्तानभारत तालिबान संबंधरूस तालिबान मान्यताअफगानिस्तान वर्तमान स्थिति
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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