पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) में पिछले कुछ महीनों से महंगाई, बिजली के ऊंचे बिल, आर्थिक उपेक्षा और विवादित चुनाव प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की, जिसमें कई मौतें हुईं। इसके बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि इलाके की शिकायतों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि मुद्दों को टेबल पर बैठकर और संवाद के जरिए हल करना चाहिए। शरीफ ने संकेत दिया कि सरकार प्रतिबंधित जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से भी बात करने को तैयार है, जो दो महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही है।
शरीफ का बदलता रुख
यह पाकिस्तान के प्रदर्शनकारियों के प्रति रवैये में एक बदलाव माना जा रहा है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PMLN-N) पीओके चुनावों के बाद क्षेत्रीय सरकार बनाने वाली है। शरीफ ने उम्मीद जताई कि नई सरकार आने के बाद भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब नई सरकार सत्ता में आएगी तो प्रदर्शनकारियों से संवाद आगे बढ़ेगा।
अराजकता पर सख्ती का जिक्र
बातचीत की पेशकश के साथ शरीफ ने साफ फर्क भी बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग अराजकता फैलाने और परेशानी पैदा करने पर तुले हैं, उन्हें ऐसा नहीं करने दिया जाएगा। वहीं जो शांति, धैर्य और सहनशीलता के साथ मुद्दे रखना चाहते हैं, नई सरकार उन्हें मौका देगी।
प्रदर्शन जून से शुरू हुए थे। कई रिपोर्टों के मुताबिक तब से अब तक करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है। JAAC को छात्रों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टर्स, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला। जून में क्षेत्रीय सरकार ने इस समूह पर प्रतिबंध लगा दिया था। समिति की मुख्य मांगों में पीओके विधानसभा की 12 विवादित शरणार्थी सीटों को खत्म करना शामिल है। समिति का आरोप है कि इन सीटों के जरिए स्थापना क्षेत्रीय सरकार बनाने को प्रभावित करती है।
पीएमएल-एन का नरम रुख
शरीफ के बयान से पहले उनके करीबी सलाहकार राना सनाउल्लाह ने भी नरम स्वर अपनाया। सनाउल्लाह ने कहा कि जेएएसी से जुड़े 99 प्रतिशत लोग देशभक्त हैं। उन्होंने बताया कि PMLN-N के प्रतिनिधि समूह के सदस्यों से मिलेंगे। सनाउल्लाह ने कहा कि जब PMLN-N दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाएगी तो वह एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों से बैठेगी और मुद्दा हल करना उनका पहला काम होगा।
पहले अधिकारियों ने दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों में तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के लोग भी शामिल हैं। इस आरोप का इस्तेमाल सख्त कार्रवाई को जायज ठहराने के लिए किया गया।
चुनाव के दौरान बढ़ी अशांति
अशांति पीओके के तीन चरणों वाले चुनावों के साथ और बढ़ी। चुनाव में धांधली, बैलट लूट, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों और चुनाव बहिष्कार की मांगों के आरोप लगे। पहले दो चरण 27 जुलाई और 3 अगस्त को हुए, जिनमें PMLN-N ने 45 चुनी हुई सीटों में से 25 जीत लीं। तीसरा चरण सोमवार को चार सीटों पर होना था, जबकि सात अन्य क्षेत्रों में मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया।
JAAC का आरोप है कि चुनाव शुरू होने के बाद 40 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। समूह का दावा है कि जून के पहले हफ्ते से अब तक करीब 400 प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तान सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर बताया है। अधिकारियों ने नागरिक मौतों की रिपोर्टों से इनकार किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एमनेस्टी इंटरनेशनल और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने हिंसा की जांच और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी 7 अगस्त को पीओके की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जवाबदेही पर जोर दिया।
















