हमेशा एक बात कही जाती है कि ‘वॉर इज अ ब्लडी बिजनेस’। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद अब ईरान अमेरिका युद्ध में भी साबित हो चुकी है। ऐसा इसलिए कि ईरान संघर्ष के दौरान तेल कीमतें बढ़ने और जलवायु संकट से जुड़ी गर्मी की लहरों के बीच दुनिया की आठ बड़ी तेल कंपनियों ने अप्रैल से जून 2026 तक के तीन महीनों में लगभग 93 अरब डॉलर (करीब 69 अरब पाउंड) का मुनाफा कमाया है।
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, यह सब पिछले साल के उसी अवधि के करीब 50 अरब डॉलर के मुनाफे से लगभग दोगुना है। ये कंपनियां हैं – सऊदी अरामको, बीपी, शेल, इक्विनोर, टोटलएनर्जीज, एनी, शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल। इनके मुनाफे का हिसाब लगाएं तो हर मिनट करीब 7 लाख डॉलर से ज्यादा कमाई हुई। इनकी बाजार वैल्यू भी करीब 600 अरब डॉलर बढ़कर 3 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गई।
ईरान संघर्ष और तेल कीमतें
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। यह बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा सप्लाई व्यवधान माना जा रहा है। इसी वजह से कंपनियों के मुनाफे में तेज उछाल आया।
कंपनियों के मुनाफे
- सऊदी अरामको ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया – 33 अरब डॉलर से ज्यादा, जो पिछले साल से 34 प्रतिशत ज्यादा है। इसकी सुविधाओं पर ड्रोन और मिसाइल हमले भी हुए थे।
- बीपी ने 5.73 अरब डॉलर का मुनाफा बताया, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के पहले साल के बाद सबसे ऊंचा है और पिछले तीन महीने के 2.5 अरब डॉलर से दोगुने से भी ज्यादा।
- शेल का मुनाफा 9.84 अरब डॉलर रहा, जो उसके इतिहास का दूसरा सबसे ऊंचा क्वार्टरली मुनाफा है। इक्विनोर का मुनाफा 3.2 अरब डॉलर हो गया।
- शेवरॉन ने 12.2 अरब डॉलर और एक्सॉनमोबिल ने 14.5 अरब डॉलर का मुनाफा बताया। ये दोनों पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल पर आरोप लगाया कि वे युद्ध से बहुत ज्यादा पैसा कमा रहे हैं और इसे जनता को वापस करना चाहिए।
जलवायु संकट और गर्मी की लहरें
इसी अवधि में यूरोप में अब तक की सबसे खराब गर्मी की लहर चली। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मानव-जनित ग्लोबल हीटिंग के बिना संभव नहीं थी। करीब 20 हजार लोगों की मौत का अनुमान है, जिसमें ब्रिटेन में मई-जून में करीब 3 हजार मौतें शामिल हैं। दक्षिण कोरिया और जापान में तापमान 42.5 डिग्री तक पहुंचा। अफ्रीका में भी जुलाई में असामान्य गर्मी रही।
एक वैज्ञानिक विश्लेषण में बताया गया था कि बड़ी तेल कंपनियों के कार्बन उत्सर्जन घातक गर्मी की लहरों से जुड़े हैं। अरामको इतिहास में सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार मानी जाती है।
सूखा, जंगल की आग और बाढ़
यूरोप में सूखे से मिट्टी सूख गई। मक्का, सूरजमुखी और सलाद जैसी फसलें प्रभावित हुईं। करीब 9 मिलियन टन अनाज का नुकसान होने का अनुमान है। फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल और ग्रीस में बड़े जंगल की आग लगी। अमेरिका और कनाडा में जुलाई की आग से करीब 4 हजार मौतों का अनुमान है।
दक्षिण एशिया में भारी बारिश से बाढ़ आई। बांग्लादेश में 24 घंटे में 40 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हुई। पाकिस्तान, भारत और चीन में बाढ़ और भूस्खलन से मौतें और नुकसान हुए। बीपी ने हरित ऊर्जा पर खर्च घटाया है और कुछ रिन्यूएबल बिजनेस बेचने की योजना बना रही है। कंपनियों से टिप्पणी मांगी गई थी।

















