
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है. अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर और हिंदू संतों के खिलाफ कथित रूप से कूटरचित अभिनय व अपमानजनक बयानबाजी के मामले में प्रयागराज की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है.
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया मामला बनता देख सांसद पप्पू यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में नोटिस जारी कर उन्हें 11 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है.
यह कानूनी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधि विभाग के प्रदेश सह-संयोजक सुशील कुमार मिश्रा की याचिका पर हुई है. उन्होंने अदालत में आपराधिक याचिका (वाद) दाखिल कर पप्पू यादव पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और जालसाजी का आरोप लगाया था.
“अयोध्या के राम मंदिर में कुछ असामाजिक तत्वों ने दान राशि चोरी करने का अपराध किया था, जिन पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है। परंतु सांसद पप्पू यादव ने संसद भवन के सामने फर्जी दानपात्र रखकर नाटक किया और संत-महात्माओं व पुजारियों को सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाने की नीयत से फर्जी व कूटरचित कहानी पेश की।” – एडवोकेट सुशील कुमार मिश्रा, शिकायतकर्ता
| पहलू | मामले का पूरा विवरण |
|---|---|
| आरोपी | पप्पू यादव (सांसद, पूर्णिया, बिहार). |
| न्यायालय का आदेश | नोटिस जारी; 11 अगस्त को अदालत में पेश होने के निर्देश. |
| लागू BNS धाराएं | धारा 318(4) [धोखाधड़ी/जालसाजी], 338, 196, 298 एवं 356 (मानहानि व धार्मिक भावनाएं भड़काना). |
| मूल विवाद का कारण | संसद भवन के बाहर नकली दानपात्र रखकर मंदिर व साधु-संतों का कथित रूप से अपमान करना. |
शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि सांसद पप्पू यादव का यह कृत्य लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर (संसद भवन) के ठीक सामने देश की बहुसंख्यक आबादी और सनातन धर्म को अपमानित करने का सुनियोजित प्रयास था.
याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु:
अदालत द्वारा नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. अब सभी की नजरें 11 अगस्त को होने वाली सुनवाई और पप्पू यादव के संभावित रुख पर टिकी हैं.