आज जब पूरे देश में Gen Z की पहचान अक्सर सोशल मीडिया, रील्स और डिजिटल ट्रेंड्स से जोड़ी जाती है, ऐसे समय में देश के 14 राज्यों से आए 40 युवा पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोकविधा कजरी सीखने के लिए चंदौली स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य पहुँचे। ये युवा केवल कजरी के विद्यार्थी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के भावी संवाहक हैं।
कितनी सभ्यताएं आईं और मिट गईं, हमारा भारत टिका रहा
भारत की संस्कृति ही भारत की शक्ति है और इसी शक्ति की आधारशिला पर हमारा देश सदा हरा भरा रहेगा।
मैं प्रतिवर्ष युवाओं को साथ लेकर निर्जन स्थलों पर प्रवास करती हूं। इस विश्वास के साथ कि परंपरा तभी आगे बढ़ेगी जब युवा साथ जुड़ेगा। उनके साथ योग, ध्यान, संवाद, गायन से लेकर जीवन के विभिन्न विषयों पर संवाद होता है।

माध्यम बनती है, कजरी की कार्यशाला
इस क्रम को छह वर्ष हो गए। इस वर्ष भी चंदौली राजदरी बनारस में देश भर से लगभग 56 छात्र छात्राएं आए और पांच दिन साथ रहे। 56 शिष्यों में 40 बच्चों की अवस्था 38 वर्ष से कम थी।
हैदराबाद कोलकाता अहमदाबाद भागलपुर सीवान गुड़गाँव मेरठ सहारनपुर लखनऊ कानपुर बनारस अलग अलग स्थानों के युवा आए और तन्मयता के साथ रहे, वरिष्ठ प्रशिक्षार्थियों के साथ रम गए। विनम्र जिज्ञासु और शिष्ट युवा! दिन हो या रात, उमस भरी गर्मी हो या वर्षा की बौछार, सभी शिष्य मन से जमे रहे, जुड़े रहे।

जब दुनिया नई पीढ़ी की परिभाषा बदलने में लगी है, Gen Z के बारे में धारणा बना रही है, तब चंद्रप्रभा के जंगलों और बनारस के घाटों पर गूँजती कजरी यह संदेश दे रही थी कि भारत का भविष्य वहीं युवा लिखेंगे, जिनके हाथों में आधुनिकता होगी और हृदय में अपनी मिट्टी की महक।











