
अयोध्या के राम मंदिर से दान पेटियों में जमा पैसे की कथित चोरी के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपियों से करीब 80 लाख रुपये पहले ही वसूल कर लिए थे। यह पुलिस में FIR दर्ज होने से पहले की बात है। ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय के एक पत्र में यह जानकारी सामने आई है।
ट्रस्ट ने इस मामले को खुद सुलझाने की कोशिश की थी, बाद में इसे सार्वजनिक होने पर SIT जांच का अनुरोध किया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चंपत राय के पत्र के अनुसार, 4 जून की रात को दान पेटियों की गिनती के दौरान एक ट्रस्टी को सूचना मिली कि पांच-छह युवक दान पेटियों से पैसे ले जा रहे हैं। अगले दिन सुबह CCTV फुटेज देखी गई और कुछ आरोपियों की पहचान हो गई। ट्रस्ट ने तुरंत पुलिस में शिकायत करने की बजाय पहले आरोपियों से पूछताछ की।
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आरोपियों और उनके परिवार वालों ने 8 जून तक ट्रस्ट को पैसे लौटा दिए। साथ ही उन्होंने लिखित बयान भी दिए जिसमें उन्होंने चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। अयोध्या पुलिस के अनुसार कुल करीब 80 लाख रुपये ही आरोपियों से बरामद हुए हैं।
जब मामला सार्वजनिक होने लगा तो ट्रस्ट ने फैसला किया कि स्वतंत्र जांच जरूरी है। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का अनुरोध किया गया, जो अब इस मामले की जांच कर रही है। चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि पैसे जब्त करना और बयान लेना FIR दर्ज होने से पहले हुआ था, यानी मामला सार्वजनिक होने से पहले ट्रस्ट ने कार्रवाई कर ली थी।
FIR 25 जून को दर्ज हुई थी। चंपत राय का यह पत्र FIR के दो दिन बाद सबमिट किया गया। ट्रस्ट ने इस पत्र को उनके इस्तीफे के रूप में माना और 6 जुलाई को हुई बैठक में इसे स्वीकार कर लिया। पत्र में चंपत राय ने खुद को आगे की जिम्मेदारियों से अलग रखते हुए जांच का इंतजार करने की बात भी कही।
राम मंदिर में रोजाना 80 हजार से 1 लाख श्रद्धालु आ रहे हैं। सावन महीने में यह संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है, खासकर सोमवार को। ट्रस्ट ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। ज्यादा भीड़ होने पर मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों और राम दरबार वाले पहले तल तक पहुंच को नियंत्रित या अस्थायी रूप से रोका जा सकता है, क्योंकि वहां जगह सीमित है।