उत्तराखंड

सलीम वास्तिक हरिद्वार पहुंचे, कांवड़ यात्रा में हवन पर विवाद पर कहा- हिंदू-मुस्लिम हैं भाई, सौहार्द जरूरी

पूर्व मुस्लिम सलीम वास्तिक हरिद्वार पहुंचे, कांवड़ यात्रा में हवन करने पर पंडितों से विवाद के बाद हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया। बोले- दोनों समुदाय भाई हैं, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखें।

Published by
उत्तराखंड ब्यूरो

हरिद्वार। हरिद्वार पहुंचे पूर्व मुस्लिम समाजसेवी सलीम वास्तिक ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हुए दोनों समुदायों से प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे के भाई हैं तथा दोनों समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना चाहिए। सलीम वास्तिक ने मुस्लिम समाज से आग्रह किया कि वे आपसी सम्मान और अपनापन बढ़ाएं तथा समाज में सौहार्द का वातावरण बनाए रखें।

उन्होंने यह भी कहा कि “कोई काफिर इस्लाम का विरोधी नहीं होता है” और सभी लोगों को मिलकर भाईचारे की भावना के साथ रहना चाहिए।अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दावा किया कि भविष्य में “कई और लोगों की घर वापसी” होगी। साथ ही उन्होंने अपने विरोधियों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उनका कहना था कि इस बार उन पर हमला करने वाले लोग भी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें, जैसा पहले भी हो चुका है।

यज्ञ और कांवड़

30 जुलाई से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो गई है। इस बीच चर्चा में रहे और स्वयं को एक्स मुस्लिम बताने वाले सलीम वास्तिक समेत पांच लोग कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंचे हैं। पहले दिन हवन करने और गंगा जल लेने पर उनका पंडितों से विवाद हो गया। पंडितो की आपत्ति के बाद सलीम वास्तिक दूसरी धर्मशाला चला गया, लेकिन उसने कहा कि वह हवन जारी रखेगा और सात अगस्त को गंगा जल लेकर गाजियाबाद के डासनापीठ लौटेगा।

जानकारी के अनुसार, रोड धर्मशाला में हवन-यज्ञ के दौरान धर्मशाला समिति की आपत्ति पर इसे रोक दिया गया। हंगामे की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद सलीम वास्तिक और उनके साथ आए सभी लोग धर्मशाला छोड़कर किसी दूसरे आश्रम में चले गए। समूह के सदस्यों ने बताया कि वे हरिद्वार से कांवड़ लेकर गाजियाबाद के डासनापीठ में जलाभिषेक करेंगे। सलीम वास्तिक और उनके साथियों की हरिद्वार में मौजूदगी को लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क रहीं।

Share