आज का श्लोक : यह श्लोक और इसका भावार्थ आज के आधुनिक और बदलते दौर में भी अत्यंत प्रासंगिक है।
भारत-वन्दना-
विदेशीयविज्ञाजनाः यस्य कीर्ति पुरा ज्ञान-विज्ञानयोर्वर्णयन्ति।।
सुवृद्धः सुसिद्धः समृद्धः प्रसिद्धः स देशः सदा वर्धतां भारताख्यः।।
भावार्थ : विदेशी विद्वज्जन जिसके ज्ञान और विज्ञान की कीर्ति को बखानते हैं। अतिप्राचीन, अतिसिद्ध, समृद्धशाली तथा अति प्रसिद्ध वह ‘भारत’ देश सदा प्रगति करने वाला हो। ऐसी मेरी शुभकामना हैं।
प्रासंगिकता: जब दुनिया वैश्विक संकटों (जलवायु परिवर्तन, युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता) से जूझ रही है, तब भारत का प्राचीन ज्ञान और समावेशी दृष्टि (योग, पर्यावरण संरक्षण का दर्शन) विश्व को एक नई दिशा दे रही है। विदेशी विद्वान आज भी भारत के विचार-दर्शन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
















