अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी छात्रों की मुश्किलों को बढ़ाने वाला फैसला लिया है। उनके होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने विदेशी छात्रों और कुछ अन्य वीजा धारकों के लिए नया नियम बनाया है। अब एफ-1 छात्र वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर और आई वीजा (विदेशी मीडिया कर्मियों) पर आने वालों के अमेरिका में रहने की अवधि अधिक से अधिक 4 साल तक ही सीमित रहेगी। यह बदलाव 15 सितंबर 2026 से लागू होगा।
कौन-कौन प्रभावित होंगे?
एफ-1 छात्र वीजा: ज्यादातर भारतीय छात्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। पहले कई कोर्स की लंबाई के हिसाब से रहने की छूट मिलती थी, लेकिन अब कुल समय 4 साल से ज्यादा नहीं हो सकेगा। कोर्स की अवधि जितनी भी हो, रहने की इजाजत सिर्फ उतने समय तक ही रहेगी और वह भी 4 साल की ऊपरी सीमा के साथ।
जे-1 एक्सचेंज विजिटर: कल्चरल और एक्सचेंज प्रोग्राम में आने वाले लोग भी इसी नियम में आएंगे।
आई वीजा: विदेशी पत्रकार और मीडिया कर्मी भी प्रभावित होंगे।
नए नियम के मुताबिक, लोग अपने कोर्स या प्रोग्राम की तय अवधि तक ही रुक सकेंगे। अगर कोई लंबा प्रोग्राम है तो भी 4 साल से ज्यादा नहीं।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत सरकार इस पूरे मामले पर नजर रख रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम अमेरिकी सरकार से लगातार संपर्क में हैं। वास्तविक छात्रों और यात्रियों को आने वाली मुश्किलों पर हम अपनी बात रखते रहेंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वीजा और इमिग्रेशन के नियम हर देश के अपने अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन प्रशासनिक बदलावों से लोगों को दिक्कत हो तो भारत अपने नागरिकों का समर्थन करता है।
विशेषज्ञों की चिंता
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से छात्रों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ जाएगा। उन्हें पहले की तुलना में जल्दी नौकरी ढूंढनी पड़ेगी और स्पॉन्सरशिप हासिल करनी होगी। भारतीय छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है, इसलिए इस नियम का उन पर सीधा असर देखा जा रहा है।











