प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल 17 जुलाई को पंजाब का दौरा कर रहे हैं। मोदी अपनी यात्रा में स्वास्थ्य, रेलवे और आधारभूत ढांचे से जुड़ी 500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का यह महज एक पहलू है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
संत गुरु रविदास एक्सप्रेस होगी प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की सबसे बड़ी सौगात
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे की सबसे बड़ी सौगात संत गुरु रविदास एक्सप्रेस (स्लीपर वंदे भारत) है, जो अमृतसर के छेहरटा से वाराणसी के बीच चलाई जाएगी। यह रेल सेवा लाखों रविदासिया श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मांग को मोदी सरकार पूरा करने जा रही है। अब तक वाराणसी स्थित संत गुरु रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धनपुर तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को कई ट्रेनों का सहारा लेना पड़ता था। नई रेल सेवा शुरू होने से यह यात्रा अधिक सुविधाजनक, तेज और सुगम हो जाएगी। इस कारण रविदासिया श्रद्धालुओं में खुशी और उत्साह देखा जा रहा है।
पंजाब और काशी के बीच आस्था और संस्कृति का नया सेतु
गुरु रविदास एक्सप्रेस (संत रविदास वंदे भारत स्लीपर) ट्रेन केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि पंजाब और काशी के बीच आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का नया सेतु के तौर पर देखी जा रही है। संत गुरु रविदास ने समानता, सामाजिक न्याय और भाईचारे का संदेश दिया था। नई रेल सेवा उसी संदेश को मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। अगले वर्ष संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती होने के कारण इस पहल का विशेष महत्व है।
संत गुरु रविदास की विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र की मोदी सरकार ने संत गुरु रविदास की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने के लिए कई प्रयास किए हैं। वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित जन्मस्थल के विकास, डेरा सचखंड बल्ला के संतों से संवाद, संत निरंजन दास का सम्मान, रविदास जयंती कार्यक्रमों में सहभागिता तथा आदमपुर हवाई अड्डे का नाम श्री गुरु रविदास जी के नाम पर रखने जैसे कदमों के बाद अब संत रविदास एक्सप्रेस की शुरुआत को भी उसी श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
रविदासिया श्रद्धालुओं में नई रेल सेवा को लेकर उत्साह
जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्ला के श्रद्धालुओं में इस रेल सेवा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्षभर बड़ी संख्या में संगत वाराणसी स्थित जन्मस्थान के दर्शन के लिए जाती है। पहले ट्रेनों की उपलब्धता और लंबी यात्रा के कारण काफी असुविधा होती थी, लेकिन अब सीधी और तेज रेल सेवा मिलने से यात्रा कहीं अधिक आसान होगी।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह सुविधा केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगी। डेरा सचखंड बल्ला के प्रतिनिधियों का कहना है कि संत गुरु रविदास के जन्मस्थान के विकास में डेरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज भी हजारों श्रद्धालु नियमित रूप से वाराणसी और जालंधर के बीच आते-जाते हैं। ऐसे में नई ट्रेन धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक जुड़ाव को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ
प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया जा रहा है। पीजीआई और अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है।
पंजाब की राजनीति में भाजपा के लिए बड़ा अवसर
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी इस दौरे का महत्व है। पंजाब में इस समय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। जहां आम आदमी पार्टी कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और संगठनात्मक अस्थिरता को लेकर विपक्ष के निशाने पर है, वहीं कांग्रेस गुटबाजी और नेतृत्व संकट के मुद्दे पर चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच आपसी लड़ाई के कारण सुर्खियों में है।
भाजपा के लिए इन दोनों दलों की लड़ाई पंजाब की राजनीति में अपना पैर जमाने का बड़ा मौका दे रही है। ऐसे माहौल में भाजपा विकास, विरासत और सामाजिक समरसता को प्रमुख मुद्दा बनाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।
डेरा सचखंड बल्ला का पंजाब की राजनीति में गहरा प्रभाव
पंजाब की राजनीति में जालंधर के पास स्थित डेरा सचखंड बल्लां का प्रभाव अत्यंत गहरा और निर्णायक है। यह डेरा ‘रविदासिया धर्म’ और दलित सामाजिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। दोआबा क्षेत्र की 23 विधानसभा सीटों में से लगभग 19 सीटों पर रविदासिया समाज और डेरा से जुड़े मतदाताओं का गहरा प्रभाव है। इसके अलावा मालवा और माझा क्षेत्र में भी इस समाज की महत्वपूर्ण उपस्थिति है।
नई ट्रेन का मार्ग इन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। अमृतसर, जालंधर कैंट और लुधियाना जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरने वाली यह रेल सेवा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और यात्रियों को लाभ पहुंचाएगी।
विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 से लगातार विकास और विरासत के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए दोनों को बराबर का महत्व दिया है। काशी विश्वनाथ धाम के विकास के साथ-साथ संत गुरु रविदास की विरासत को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास इसी सोच का हिस्सा है। अब पंजाब में भी उसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया जा रहा है, जहां धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
पंजाब की बदलती राजनीति पर कितना असर डालेगी यह पहल?
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि संत गुरु रविदास की विरासत से जुड़ी यह पहल केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से आगे बढ़कर पंजाब की बदलती राजनीति में किस हद तक प्रभाव छोड़ती है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा विकास योजनाओं के साथ-साथ सामाजिक सम्मान, सांस्कृतिक जुड़ाव और राजनीतिक संदेश को एक साथ लेकर आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।














