ओडिशा

जगन्नाथ रथ यात्रा-भगवान का स्वयं भक्तों के बीच आना

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा में देखें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीनों विशाल रथों का भव्य स्वरूप। जानें छेरा पहरा परंपरा, रथ यात्रा का गहरा संदेश और लाखों श्रद्धालुओं की अनुपम भक्ति। भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा का पूरा अनुभव।

Published by
अभय कुमार

ओडिशा के पुरी में ‘बड़ा डांडा’ पर लाखों श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा और उमंग के बीच विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है। इस दौरान गूंजते “जय जगन्नाथ” और “हरि बोल” के जयकारों से पूरा भक्तिमय माहौल गूंज उठता है। भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के ताल ध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ, श्रद्धा और शिल्पकला के अद्भुत प्रतीक माने जाते हैं।

पारंपरिक विधि से निर्मित यह रथ सिंह द्वार के समक्ष स्थापित किया जाता हैं और फिर पहण्डी की अलौकिक परंपरा में भगवान अपने भक्तों के बीच विराजमान होते हैं।

रथयात्रा का सबसे बड़ा संदेश

रथ यात्रा का सबसे बड़ा और भावुक संदेश ईश्वर का स्वयं भक्तों तक पहुंचाना है। गजपति महाराजा द्वारा छेरा पहरा की परंपरा बताती है कि भगवान के समक्ष राजा और प्रजा का भेद मिट जाता है। इसके बाद तीनों रथ श्री गुंडीचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं, जिसे भगवान की मौसी का घर भी कहा जाता है। यही वह क्षण होता है जब लाखों हाथ एक साथ रथ की रस्सियां थाम कर स्वयं को इस दिव्य यात्रा का सहभागी बनते हैं।

भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है यह रथ यात्रा

पुरी की रथ यात्रा केवल उड़ीसा का पर्व नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस दिव्य परंपरा के साक्षी बनते हैं। विशाल जनसमूह, अनुशासित व्यवस्था और सेवा की भावना के कारण इस आयोजन को विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में विशिष्ट स्थान दिलाती है। यहां आस्था केवल मंदिर की चौखट तक सीमित नहीं रहती बल्कि पूरे नगर को एक जीवंत तीर्थ में बदल देती है।

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा केवल देव विग्रहों की यात्रा नहीं बल्कि उस सनातन विचार की यात्रा है जो हर युग में मानवता समरसता और लोक मंगल का संदेश देती है। जब भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं तब आस्था केवल दर्शन नहीं रहती। वो जीवन का उत्सव बन जाती है और शायद यही पूरी की रथ यात्रा की सबसे बड़ी महिमा है।

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