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‘यूक्रेन पर पमाणु हमला करने वाला था रूस, पीएम मोदी के समझाने पर पुतिन ने बदला फैसला’, बोले पोलैंड के उप-विदेश मंत्री

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जय प्रकाश गुप्ता

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच लंबे समय से युद्ध चल रहा है, करीब 4 साल से। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यह युद्ध रुकवाने की कोशिश की थी, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इस युद्ध से जुड़ा आज एक बड़ा खुलासा हुआ है वो यह कि ये युद्ध भयावह रूप ले सकता था अगर पीएम नरेंद्र मोदी ने बीच में आकर रूस को परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से न रोकते। यह खुलासा पोलैंड के उप-विदेश मंत्री व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोशेवस्की ने किया है। उनका कहना है कि साल 2022 में पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ सामरिक परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करने के लिए राजी करने में बेहद अहम और निर्णायक भूमिका निभाई थी।

पीएम मोदी की सलाह को गंभीरता से मानते हैं पुतिन

उन्होंने यह बयान नई दिल्ली में आयोजित ‘भारत-पोलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग’ की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया। पोलैंड के उप-विदेश मंत्री बार्टोशेवस्की ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के उन गिने-चुने और बेहद सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं जिनकी सलाह को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बेहद गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बहुत ही प्रसिद्ध और सम्मानित वैश्विक स्टेट्समैन (राजनेता) हैं। भारत के रूसी गणराज्य और उससे पहले सोवियत संघ के साथ बेहद पुराने और गहरे रणनीतिक संबंध रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन वास्तव में इस बात पर पूरा ध्यान देते हैं कि पीएम मोदी उनसे क्या कह रहे हैं।’

पीएम मोदी की वजह से टला यूक्रेन पर परमाणु हमला

बार्टोशेवस्की ने आगे कहा कि साल 2022 के अंत में जब यूक्रेन युद्ध बेहद नाजुक और खतरनाक मोड़ पर था, तब पीएम मोदी ने अपने इन्हीं गहरे और मजबूत संबंधों का इस्तेमाल करते हुए पुतिन को परमाणु हमले जैसा आत्मघाती कदम उठाने से रोक दिया था। पोलिश मंत्री के अनुसार, भारत इस युद्ध को समाप्त कराने में सबसे बड़ी और प्रभावी भूमिका निभा सकता है क्योंकि पुतिन पर दबाव बनाने की क्षमता बहुत कम देशों के पास है।

पहले भी भारत की भूमिका की पश्चिमी देश कर चुके हैं तारीफ

पोलिश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। सितंबर 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन के सामने बैठकर ऐतिहासिक रूप से कहा था कि ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनके इस बयान की पूरे पश्चिमी जगत और अमेरिका ने जमकर तारीफ की थी।

इसके बाद साल 2024 में पीएम मोदी ने यूक्रेन की राजधानी कीव का भी ऐतिहासिक दौरा किया और राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात कर कहा था कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है।

दबाव के बावजूद स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम भारत

यूक्रेन संकट की शुरुआत से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारत पर रूस के खिलाफ खड़े होने और उन पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में शामिल होने का भारी दबाव बनाया। इसके बावजूद भारत ने हमेशा राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी। भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल का आयात जारी रखा। खुद राष्ट्रपति पुतिन ने भी पिछले महीने भारत को एक ‘महान देश’ बताते हुए नई दिल्ली की स्वतंत्र और संप्रभु विदेश नीति का पुरजोर बचाव किया था। पोलैंड ने भी पहले भारत के रूस से तेल खरीदने का विरोध किया था, लेकिन इस कॉन्फ्रेंस में पोलिश मंत्री ने भारत के इस कदम को सही ठहराया और कहा कि अब उनके सारे मतभेद दूर हो गए हैं।

ईरान और यूएनएससी पर पोलैंड का मिला समर्थन

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पोलिश मंत्री ने मध्य पूर्व (खासकर ईरान और खाड़ी देशों के तनाव) में भी भारत के संतुलित रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करने के कारण भारत स्थिरता चाहता है और पोलैंड भी ठीक भारत की तरह ही ईरान के साथ राजनयिक बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने का पक्षधर है। इसके साथ ही बार्टोशेवस्की ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएन सिक्योरिटी काउंसिल) में स्थायी सीट के लिए भारत की लंबे समय से चली आ रही दावेदारी का पोलैंड की तरफ से एक बार फिर पुरजोर समर्थन किया।

 

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