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ट्रंप प्रशासन ने ICC को पूरी तरह खत्म करने की मुहिम शुरू की, मार्को रुबियो बोले- अमेरिकी संप्रभुता पर खतरा

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC को पूरी तरह खत्म करने की मुहिम शुरू कर दी है। ट्रंप प्रशासन दूसरे देशों पर दबाव बनाकर ICC का साथ छुड़वाने और अमेरिकी सैनिकों व नेताओं को विदेशी मुकदमों से बचाने की तैयारी में है।

Published by
कुलदीप सिंह

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को पूरी तरह से खत्म करने की एक बड़ी मुहिम शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि यह अदालत अमेरिकी सेना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के काम में दखल दे रही है और अमेरिका की संप्रभुता को खतरा पहुंचा रही है।

द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, रुबियो ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक लंबा लेख लिखा और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो भी पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कल्पना की कि अगर कुछ नहीं किया गया तो अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल के जवान, चुने हुए नेता और सैनिक विदेशी जजों के सामने खड़े होकर मुकदमे का सामना करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि हजारों मील दूर बैठे जज अपने देश की रक्षा करने के ‘अपराध’ के लिए इन लोगों पर मुकदमा चला सकते हैं और उन्हें जेल भी भेज सकते हैं।

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क्या है ट्रंप की योजना

स्टेट डिपार्टमेंट की योजना दूसरे देशों पर दबाव डालने की है ताकि वे ICC का साथ छोड़ दें। CNN के मुताबिक, जो देश ICC की ‘झूठी सत्ता’ को नकारने से इनकार करेंगे और फिर भी अमेरिकी मदद पर निर्भर रहेंगे, उन पर ज्यादा नजर रखी जाएगी। संभावित सजाओं में प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध और वीजा रद्द करना शामिल हो सकता है।

ICC की वास्तविकता

ICC का मुख्यालय हेग में है। यह सिर्फ उन देशों में हुए अपराधों की जांच कर सकता है जिन्होंने 2002 के रोम स्टेट्यूट को मंजूरी दी है। अमेरिका ने इस संधि को कभी रत्नीकृत नहीं किया। ICC ने अमेरिकी धरती पर हुए किसी अपराध की जांच भी शुरू नहीं की है। कुछ अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि रुबियो के बयान ICC की शक्तियों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के पूर्व डायरेक्टर केनेथ रॉथ ने कहा कि ICC अमेरिका में हुए कामों पर दावा नहीं कर रहा। वे इसे अमेरिकी युद्ध अपराधों से बचने का तरीका बता रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन ने पहले भी ICC के खिलाफ कदम उठाए थे। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती हफ्तों में उन्होंने ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित किया और ICC के चीफ प्रॉसीक्यूटर करीम खान समेत कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए। यह इजरायल-फिलिस्तीन और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी जांचों के कारण था।

ICC की कुछ गतिविधियां

ICC ने इजरायल के गाजा अभियान की जांच की और प्रधानमंत्री नेतन्याहू तथा रक्षा मंत्री गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी अपराधों की जांच का स्वागत भी अमेरिका ने किया था क्योंकि यूक्रेन रोम स्टेट्यूट का सदस्य है। रुबियो की नई मुहिम का ICC पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। अफवाहें हैं कि पूरे ट्रिब्यूनल पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिकी नागरिक ICC के साथ काम नहीं कर पाएंगे और कंपनियां या बैंक इससे जुड़े काम करने पर सजा का सामना कर सकते हैं।

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