
भुवनेश्वर: विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। 16 जुलाई को आयोजित होने वाले इस वार्षिक महापर्व के सुचारु संचालन के लिए श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और ओडिशा पुलिस ने धार्मिक अनुष्ठानों, सुरक्षा व्यवस्था तथा भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं।
भव्य रथ यात्रा से पहले एसजेटीए के मुख्य प्रशासक डा अरविंद पाढी ने बताया कि इस वर्ष मंदिर में निर्धारित अनुष्ठानों की अधिकता के कारण नवयौवन दर्शन (नेत्रोत्सव) की अवधि सामान्य वर्षों की तुलना में कम रहेगी। वहीं, ओडिशा पुलिस ने भी व्यापक सुरक्षा योजना को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत कड़ी निगरानी, अतिरिक्त पार्किंग सुविधाएं तथा रथों के आसपास सख्त प्रवेश नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।
नवयौवन दर्शन की अवधि घटाई गई
रथ यात्रा की अंतिम तैयारियों की समीक्षा के बाद अरविंद पाढी ने बताया कि 14 जुलाई की शाम श्रद्धालुओं को नवयौवन दर्शन के लिए सीमित समय ही उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि वार्षिक रथ यात्रा से पहले कई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने हैं। इसी कारण टिकट आधारित दर्शन तथा सहनमेला (सामान्य दर्शन) दोनों की अवधि कम करना आवश्यक हो गया है।
पाढी ने कहा, “इस वर्ष अनुष्ठानों की संख्या अधिक होने के कारण नवयौवन दर्शन अथवा नेत्रोत्सव की अवधि पिछले वर्षों की तुलना में कम रहेगी। सभी सेवायत, छत्तीसा नियोग और श्रीमंदिर प्रबंधन समिति महाप्रभु के सभी अनुष्ठानों को समय पर पूरा कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। हम श्रद्धालुओं से मंदिर प्रशासन का सहयोग करने का अनुरोध करते हैं।” उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पारंपरिक मंदिर परंपराओं के अनुसार उभा अमावस्या के अवसर पर 15 जुलाई को महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे।
रथों पर प्रवेश को लेकर सख्त प्रतिबंध
रथ यात्रा के दौरान अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए मंदिर प्रशासन ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।अरविंद पाढी ने स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को रथों पर चढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति सेवायत बनकर प्रवेश करने का प्रयास करता है या किसी अन्य को अवैध रूप से प्रवेश दिलाने में सहयोग करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसजेटीए इस वर्ष कॉर्डन पास प्रणाली को भी पूरी सख्ती से लागू करेगा। वैध अनुमति के बिना प्रतिबंधित सुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा कर्मी सम्मानपूर्वक वहां से बाहर ले जाएंगे।
प्रशासन ने रथों पर मोबाइल फोन के उपयोग पर लगे प्रतिबंध को भी दोहराया है। यह नियम सेवायतों सहित सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होगा। इसके अनुपालन की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम का गठन किया गया है।
रथ यात्रा के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने रथ खींचने के लिए रस्सियों के दो पूर्ण सेट भी तैयार रखे हैं।
अणसर अनुष्ठानों के दौरान महाप्रभु को अर्पित किया गया दशमूल मोदक
इधर, श्रीजगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक अणसर अनुष्ठान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं।
एकादशी के पावन अवसर पर महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा को दशमूल मोदक अर्पित किया गया। यह एक पवित्र आयुर्वेदिक औषधीय प्रसाद है, जिसे स्नान पूर्णिमा के बाद प्रतीकात्मक रूप से आए ज्वर से उनकी आरोग्यता में सहायक माना जाता है।
दशमूल मोदक का यह अर्पण अणसर काल के उन गुप्त उपचारात्मक अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिनके दौरान विग्रह सार्वजनिक दर्शन से दूर रहकर स्वास्थ्य लाभ करते हैं और इसके बाद नवयौवन दर्शन के अवसर पर पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं। इससे पूर्व दशमी के दिन विशेष रूप से तैयार की गई आयुर्वेदिक औषधि को विधि-विधान के साथ मंदिर के भंडार गृह में स्थापित किया गया। इसी दिन चतुर्धा मूर्तियों को पारंपरिक लकड़ी के आसनों, जिन्हें चका कहा जाता है, पर विराजमान कराया गया।
औषधि अर्पित करने से पहले रघब दास मठ से पारंपरिक रीति से लाए गए चंदन को दक्षिणी घर में कपूर और केसर के साथ मिश्रित किया गया। इसके बाद तैयार सुगंधित लेप को पारंपरिक चंदन सर्वांग अनुष्ठान के तहत महाप्रभु के श्रीविग्रहों पर लगाया गया और तत्पश्चात उन्हें दशमूल मोदक अर्पित किया गया।
प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि की परंपरा
दशमूल मोदक एक पवित्र आयुर्वेदिक औषधीय तैयारी है, जिसे विशेष रूप से महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा के आरोग्य अनुष्ठानों के लिए तैयार किया जाता है। इस औषधि का निर्माण राजवैद्यों द्वारा दस प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों एवं प्राकृतिक तत्वों से किया जाता है। इनमें शालपर्णी, कृष्णपर्णी, गोखरू, बेलपत्र, गंभारी तथा विभिन्न औषधीय वृक्षों की छाल प्रमुख रूप से शामिल होती हैं। यह परंपरा श्रीजगन्नाथ मंदिर की विशिष्ट धार्मिक विधियों में आयुर्वेद के सदियों पुराने समावेश और उसकी समृद्ध विरासत को प्रतिबिंबित करती है।
ओडिशा पुलिस ने सुरक्षा तैयारियां पूरी कीं
वार्षिक रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की संभावना को देखते हुए ओडिशा पुलिस ने व्यापक सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुरानिया की अध्यक्षता में पुरी टाउन हॉल में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात व्यवस्था तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया।डीजीपी ने कहा कि पुलिस प्रशासन रथ यात्रा को शांतिपूर्ण, अनुशासित और निर्विघ्न ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और संरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आठ नए पार्किंग स्थल विकसित
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पुरी के विभिन्न स्थानों पर आठ नए पार्किंग स्थलों का विकास किया है। डीजीपी ने सभी पुलिस कर्मियों को निर्देश दिया कि वे रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता करते समय धैर्य, विनम्रता और सेवा-भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
ग्रैंड रोड तथा रथों के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अनुभवी पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि भीड़ का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सके और रथ खींचने की परंपरा सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो।
व्यापक सीसीटीवी निगरानी और यातायात मॉनिटरिंग
पुरी में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर व्यापक सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। उत्तरा चौक से पुरी तक, पुरी-कोणार्क मार्ग तथा शहर के प्रमुख चौराहों पर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे यातायात और भीड़ की गतिविधियों पर वास्तविक समय (रियल-टाइम) में निगरानी रखी जा सके।
खुफिया निदेशक आर. पी. कोचे ने यातायात प्रबंधन, वीआईपी आवागमन, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा घेराबंदी के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को पूरे उत्सव के दौरान निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस कर्मियों को सेवा-भाव से कार्य करने के निर्देश
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आधुनिकीकरण) सौमेंद्र प्रियदर्शी ने पुलिस कर्मियों को समर्पण, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने निर्धारित ड्यूटी स्थल को न छोड़ें तथा प्रतिकूल मौसम में भी पूरी सतर्कता बनाए रखें। उन्होंने रथ खींचने के दौरान प्रभावी भीड़ प्रबंधन के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित रूप से इस पवित्र आयोजन में भाग ले सके और सकारात्मक अनुभव के साथ लौटे।
परिवहन आयुक्त अमिताभ ठाकुर ने कहा कि यातायात व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, वीआईपी आवागमन और जनसुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। उन्होंने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनी रहे और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
वरिष्ठ अधिकारियों ने तैयारियों की समीक्षा की
उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें एडीजीपी (एसएपी) राजेश कुमार, आईजीपी (क्राइम ब्रांच) डॉ. सार्थक सारंगी, आईजीपी (ऑपरेशंस) डॉ. दीपक कुमार, आईजीपी (प्रशिक्षण) अनूप कुमार साहू, आईजी (नॉर्दर्न रेंज) सत्यव्रत भोई, पुरी कलेक्टर दिव्यज्योति परिड़ा, डीआईजी (प्रोविजनिंग) चरण सिंह मीणा, डीआईजी (एसटीएफ) के. बिशाल सिंह, डीआईजी (ईस्टर्न रेंज) पिनाक मिश्रा तथा डीआईजी (क्राइम ब्रांच) बी. गंगाधर सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
बैठक की शुरुआत में पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि आईजीपी (सेंट्रल रेंज) डॉ. सत्यजीत नायक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। मंदिर के भीतर धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां पूर्ण होने और बाहर प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिए जाने के साथ ही पुरी अब विश्व के सबसे बड़े वार्षिक धार्मिक आयोजनों में से एक की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। इस पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालु महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा की श्रीगुंडिचा मंदिर की पवित्र यात्रा के दिव्य दर्शन करेंगे।