भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनते ही बड़ा एक्शन लिया गया है। 27 मार्च को उन्होंने अपने पद की शपथ ली। इसके ठीक अगले ही दिन पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ ही पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों ही शीर्ष नेताओं को भक्तपुर स्थित उनके घरों से उठाया गया।
गिरफ्तारी का कारण
रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 के ‘जेन जेड’ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और दमन से जुड़ी है। एक उच्च स्तरीय जांच आयोग ने इस मामले में मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी। दोनों पर लापरवाही से हत्या का केस है। अगर दोषी साबित हुए तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है।
क्या है जेन जेड प्रदर्शन
दरअसल, सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। शुरू में यह डिजिटल फ्रीडम यानी ऑनलाइन आजादी की मांग को लेकर था, लेकिन जल्दी ही यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, खराब शासन और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन बन गया। युवा इसे ‘जेन जेड रिवोल्यूशन’ कह रहे थे।
सरकार ने प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्ती बरती। पहले दिन ही कई घंटों तक फायरिंग हुई, जिसमें कम से कम 19 युवा मारे गए। कुल मिलाकर इन घटनाओं में करीब 76 लोगों की जान गई और 2000 से ज्यादा लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस दोनों तरफ से हिंसा हुई। आखिरकार ये आंदोलन इतना बड़ा हो गया कि ओली सरकार गिर गई और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
जांच और जवाबदेही
जांच आयोग ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में ओली को हर अच्छे-बुरे का जिम्मेदार माना जाना चाहिए। आयोग ने पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की थी। ओली ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट बहुत लापरवाही भरी है, यह चरित्र हनन है और नफरत की राजनीति दिखाती है।
वामपंथी हैं केपी ओली
गौरतलब है कि मार्च 2026 के आम चुनाव में बालेन शाह ने ओली को उनके गढ़ झापा-5 सीट से हराया था। बालेन शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता हैं और उन्होंने युवाओं के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। ओली चार बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं और कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के प्रमुख नेता हैं।
















