अमेरिका ने भारत सहित 60 से ज्यादा देशों को अगले सप्ताह होने वाली एक अहम मंत्रीस्तरीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ऐसे कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े खतरे पर चर्चा करना है, जिन्हें अमेरिकी प्रशासन “फार-लेफ्ट आतंकवाद” के रूप में देख रहा है। इस जानकारी का खुलासा द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में किया गया है।
भारत समेत 60 देशों के साथ आतंकवाद पर होगी अहम बैठक
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने जिन देशों को बुलाया है उनमें भारत, इंडोनेशिया, सिंगापुर, कई यूरोपीय देश और लैटिन अमेरिका के प्रमुख देश शामिल हैं। बैठक में अलग-अलग देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद से निपटने के नए तरीकों पर चर्चा होगी। बताया गया है कि अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से भेजे गए एक कॉन्सेप्ट नोट में कहा गया है कि कुछ कट्टरपंथी संगठन अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हिंसक रास्ता अपना रहे हैं। इसी वजह से इन गतिविधियों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि कट्टर वामपंथी आतंकवाद कोई नया खतरा नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी समस्या है जो अब नए रूप में सामने आ रही है। उनका कहना है कि अगर देश मिलकर काम करें तो ऐसे संगठनों की गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, इस बैठक को लेकर कई देशों ने सवाल भी उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई विदेशी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें बहुत कम समय में निमंत्रण भेजा गया। कुछ देशों ने यह भी पूछा कि उन्हें इस बैठक में क्यों बुलाया गया है। एक यूरोपीय राजनयिक ने यहां तक कहा कि उनके देश में ऐसे किसी संगठन की मौजूदगी नहीं है। इसके अलावा, कई देशों के विदेश मंत्री और गृह मंत्री पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। ऐसे में उनके इस बैठक में शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है।

















