दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद एक अमेरिकी नागरिक इन दिनों अपने खाने को लेकर चर्चा में है। वैन डाइक नाम के इस कैदी का दावा है कि भारतीय जेल में मिलने वाला मसालेदार और तला-भुना खाना उसकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। उसका कहना है कि जेल का खाना खाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ जाती है, इसलिए उसने पिछले करीब 50 दिनों से सामान्य भोजन नहीं किया है। फिलहाल वह सिर्फ सोया मिल्क और दूसरे तरल पदार्थों के सहारे रह रहा है। अब उसने अपनी इस परेशानी को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जहां कोर्ट ने जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
हल्के भोजन की मांग
वैन डाइक की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने पिछले 50 दिनों से जेल में मिलने वाला सामान्य भोजन नहीं खाया है। उनका कहना है कि जब भी उसने मसालेदार और तला-भुना खाना खाने की कोशिश की, उसे पेट दर्द, अपच और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी वजह से वह केवल तरल पदार्थों का सेवन कर रहा है। वकीलों ने अदालत से मांग की है कि उसे उसकी सेहत के अनुसार हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन उपलब्ध कराया जाए। सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए तय कर दी।
वैन डाइक को 13 मार्च को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया था। एनआईए के अनुसार, यह समूह म्यांमार से मिजोरम सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था और बाद में देश के अलग-अलग हवाई अड्डों से पकड़ा गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह समूह भाड़े के लड़ाकों के रूप में काम करता था और भारत व म्यांमार में सक्रिय कुछ सशस्त्र संगठनों की मदद करने के साथ उन्हें ड्रोन ट्रेनिंग भी दे रहा था। एनआईए का यह भी कहना है कि वैन डाइक ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नाम की संस्था का संस्थापक है। एजेंसी ने उसके और उसके साथियों के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है।

















