नई दिल्ली। दिल्ली प्रांत के प्रबुद्ध वर्ग ‘मेधाविनी सिंधु सृजन’ द्वारा राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापिका एवं आद्य संचालिका वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) के अवतरण दिवस पर “संकल्प दिवस” का गरिमामय आयोजन बुधवार, 8 जुलाई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय मार्ग स्थित सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में संपन्न हुआ.
यह विशेष आयोजन राष्ट्र सेविका समिति की सेवा, अद्वितीय समर्पण और राष्ट्र निर्माण की 90 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को समर्पित था. इस अवसर पर वंदनीया मौसीजी के राष्ट्रजीवन, नारी जागरण और समाजसेवा के उच्च आदर्शों का स्मरण करते हुए उपस्थित जनों ने समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए स्वयं को पुनः संकल्पित किया.
“मातृशक्ति से नपेगी भारत की ताकत” : विजया रहाटकर (मुख्य अतिथि)
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष माननीया विजया रहाटकर ने अपने संबोधन में भारतीय नारी के सामर्थ्य को रेखांकित किया.
उन्होंने कहा-
“जब देश की महिला संकल्प लेती है, तब सिर्फ एक समाज ही नहीं बल्कि पूरा देश बदल जाता है। दुनिया भारत की वास्तविक ताकत उसकी सिर्फ अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि उसकी महान मातृशक्ति से नापेगी। विकसित भारत 2047 आज पूरे भारत का एक सामूहिक संकल्प है। आज देश की महिलाएं साइंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, मेडिसिन समेत हर क्षेत्र में सबसे अग्रणी होकर अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं।”
“नारीवाद पाश्चात्य से गोद लेने की जरूरत नहीं” – बांसुरी स्वराज (अध्यक्षा)
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही नई दिल्ली की सांसद माननीया बांसुरी स्वराज ने भारतीय मूल्यों और नारी की मूल भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा-
- वास्तविकता और जड़ें: जब कोई व्यक्ति अपनी वास्तविक संस्कृति और सच्चाई से परिचित होता है, तब संसार की कोई भी ताकत उसकी जड़ों को हिला नहीं सकती.
- स्वदेशी विचार: नारीवाद और समानता जैसे विचारों को हमें पाश्चात्य (वेस्टर्न) देशों से गोद लेने की तनिक भी आवश्यकता नहीं है.
- राष्ट्र की निर्माता: मातृत्व, कृतित्व और कुशल नेतृत्व के त्रिवेणी संगम से महिला इस देश की सच्ची निर्माता बनेगी. महिला उस गुरु और ईंट की भूमिका निभाती है, जिससे मजबूत राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है.
“विश्व का सबसे बड़ा महिला संगठन है राष्ट्र सेविका समिति” : अलका इनामदार (मुख्य वक्ता)
अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका एवं कार्यक्रम की मुख्य वक्ता माननीया अलका इनामदार ने संगठन के विस्तार और वैचारिक चेतना पर अपनी बात रखी. उन्होंने गर्व से साझा किया कि आज विश्व में राष्ट्र सेविका समिति सबसे बड़ा महिला संगठन बन चुका है, जिसकी 5,000 से अधिक सक्रिय शाखाएं संचालित हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व हमारी और हमारे राष्ट्र की मूल पहचान है तथा एक महिला का यह प्रथम और सबसे पवित्र कर्तव्य है कि वह अपनी अगली पीढ़ी को श्रेष्ठ संस्कार प्रदान करे.
प्राचीनता और आधुनिकता का सुंदर समन्वय : मुकुल कानिटकर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य माननीय मुकुल कानिटकर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय नारी आज सारे विश्व में अग्रणी होकर अपना परचम लहरा रही है और आने वाली शताब्दी पूरी तरह मातृशक्ति की शताब्दी होगी. उन्होंने एक अहम सूत्र देते हुए कहा कि आधुनिक होने के लिए हमें अपनी प्राचीनता को छोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और जिसकी हम पूजा करते हैं, वास्तव में उसके जैसा आचरण अपनाना ही सच्ची पूजा है.
9 विशिष्ट महिलाओं का हुआ सम्मान, समाज के प्रबुद्धजन रहे उपस्थित
इस गरिमामय संकल्प दिवस के सुअवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट, अनुकरणीय और निस्वार्थ सेवा सहयोग देने वाली नौ (9) विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया. इससे पहले मेधाविनी प्रान्त संयोजिका प्रो. निशा राणा ने विषय की प्रस्तावना प्रस्तुत कर सभी अतिथियों का स्वागत किया था.
मंच पर डूटा के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी, प्रो. चारु कालरा और अंजू आहूजा भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में संगठित नारी-शक्ति की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया.
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सैकड़ों सेविकाओं, शिक्षाविदों, प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वंदनीया मौसीजी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने तथा संस्कार और राष्ट्र समर्पण की इस गौरवशाली परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया.















