पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों काफी चर्चा में है। यह फिल्म 4 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के लगभग 48 घंटे बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इसके बाद फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई दर्शकों ने फिल्म हटाने के फैसले पर नाराजगी जताई, जबकि सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा और संवेदनशीलता से जुड़े कारण बताए हैं।
फिल्म की कहानी की होगी जांच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म की कहानी और उसके विषय-वस्तु की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) बनाई है। यह समिति फिल्म की पूरी समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएं। ‘सतलुज’ की कहानी पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म में साल 1990 के दशक के दौरान पंजाब में हुई कथित गैर-कानूनी हत्याओं और जबरन लोगों के लापता होने जैसी घटनाओं को दिखाया गया है। यही वजह है कि फिल्म का विषय काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिल्म के कुछ दृश्य ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतें गलत तरीके से कर सकती हैं। इसी आशंका के चलते फिल्म को ZEE5 से हटाया गया और अब इसकी विस्तार से जांच कराई जा रही है। सरकार का कहना है कि किसी भी ऐसी सामग्री पर सावधानी बरतना जरूरी है, जिससे देश की छवि या सुरक्षा पर असर पड़ सकता हो। इस फिल्म का सफर भी काफी लंबा रहा है। पहले इसका नाम ‘पंजाब 95’ था। यह फिल्म लंबे समय तक सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही। बताया जाता है कि बोर्ड ने फिल्म में 120 से अधिक बदलाव करने के सुझाव दिए थे। इसके बावजूद फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं मिल सका। इसके बाद निर्माताओं ने फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा और इसे सीधे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का फैसला किया। हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि केवल नाम बदल देने से फिल्म की प्रमाणन प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा सकती। इसी वजह से इस मामले की जांच कराई जा रही है।
















