भारतीय सेना का महा-आधुनिकीकरण: ₹52,000 करोड़ के हथियारों को मंजूरी, 'आकाश तरंग' और कामिकाजे ड्रोन से थर्राएंगे दुश्मन
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भारतीय सेना का महा-आधुनिकीकरण: ₹52,000 करोड़ के हथियारों को मंजूरी, ‘आकाश तरंग’ और कामिकाजे ड्रोन से थर्राएंगे दुश्मन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने तीनों सेनाओं के लिए ₹52,000 करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों, आकाश तरंग सिस्टम और कामिकाजे ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 4, 2026, 07:16 pm IST
in भारत, रक्षा
Atmanirbhar Bharat indian defence

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) को भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार करने और स्वदेशी रक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को संपन्न हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) की बैठक में करीब 52,000 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई है।

इन अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के बेड़े में शामिल होने से भारतीय थल सेना (Army), नौसेना (Navy) और वायुसेना (Air Force) की मारक क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक और त्रि-आयामी सुरक्षा तंत्र पहले से कहीं अधिक अभेद्य हो जाएगा।

एक नज़र में समझें: ₹52,000 करोड़ के मुख्य रक्षा प्रस्ताव और हथियार

गूगल डिस्कवर और रक्षा क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों की त्वरित समझ के लिए डीएसी द्वारा स्वीकृत मुख्य हथियारों, उनकी मारक क्षमता और उद्देश्यों का पूरा विवरण नीचे दी गई तकनीकी तालिका में संकलित है:

अत्याधुनिक हथियार/प्रणालीलक्षित सैन्य विंगमुख्य सामरिक कार्य/विशेषता
आकाश तरंग (AKASH TARANG)भारतीय थल सेनाएंटी-यूएवी (Anti-UAV) इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, जो दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करेगा।
MPATGM व MRSAMपैदल सेना व वायु सुरक्षामैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली।
V-SHORADS & एक्टिव प्रोटेक्शनटैंक व एयर डिफेंसकम दूरी की हवाई सुरक्षा और भारतीय टैंकों को एंटी-टैंक मिसाइल हमलों से बचाने वाला कवच।
कामिकाजे ड्रोन सिस्टमइलेक्ट्रॉनिक वारफेयरजेट आधारित आत्मघाती ड्रोन, जो कम लागत में दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम हैं।
MIGM और NSUASभारतीय नौसेनामल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (समुद्री माइन) और शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सर्विलांस सिस्टम।
FW-HAPS सिस्टमभारतीय वायुसेनाफिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट— इंटेलिजेंस, टेलीकॉम और रिमोट सेंसिंग हेतु।

क्या होता है AoN (Acceptance of Necessity)?

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में इन सभी सैन्य प्रस्तावों को आधिकारिक तौर पर एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है। रक्षा खरीद प्रक्रिया (Defence Procurement Procedure) में AoN पहला और सबसे महत्वपूर्ण विधिक चरण होता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि सरकार ने सेना की इस उपकरण संबंधी आवश्यकता को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके बाद अब ग्लोबल/घरेलू टेंडर जारी करने, व्यावसायिक बोलियां मंगाने और अंतिम अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।

नए सैन्य नेतृत्व की टीम के साथ पहली रणनीतिक बैठक

यह रक्षा खरीद परिषद (DAC) की अब तक की सबसे अनूठी बैठक रही, क्योंकि इसमें देश के नए सैन्य नेतृत्व (Military Leadership) ने एक साथ हिस्सा लिया। बैठक में रक्षा मंत्री के साथ निम्नलिखित शीर्ष सैन्य कमांडर मौजूद रहे:

  • जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी: माननीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)।
  • एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन: माननीय नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff)।
  • जनरल धीरज सेठ: हाल ही में कमान संभालने वाले माननीय थल सेना प्रमुख (COAS)।

गौरतलब है कि पदभार संभालते ही सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने स्पष्ट कर दिया था कि भविष्य के आधुनिक और तकनीकी युद्धों (Future Warfare) के लिए भारतीय सेना का तीव्र गति से आधुनिकीकरण करना ही उनकी सबसे सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसकी झलक इस बैठक में साफ दिखाई दी।

थल सेना, नौसेना और वायुसेना: तीनों अंगों को मिली अभूतपूर्व ताकत

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस 52 हजार करोड़ रुपये के पैकेज से तीनों सेनाओं की सामरिक स्थिति में निम्नलिखित बड़े बदलाव आएंगे:

1. थल सेना (Indian Army): ‘आकाश तरंग’ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणाली मिलने से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर दुश्मन के जासूसी और आत्मघाती ड्रोनों को हवा में ही जाम कर नष्ट किया जा सकेगा। MPATGM मिसाइलें हमारी इन्फैंट्री (पैदल सेना) को दुश्मन के भारी बख्तरबंद टैंकों को उड़ाने की अचूक क्षमता देंगी।

2. नौसेना (Indian Navy): नौसेना के लिए स्वीकृत मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों की अवैध आवाजाही को पूरी तरह अवरुद्ध कर देगी। इसके अलावा, जहाजों के स्वदेशी इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के कड़े परीक्षण के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) की स्थापना की जाएगी।

3. वायुसेना (Indian Air Force): वायुसेना को मिलने वाला हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) प्रणाली अंतरिक्ष की निचली कक्षा में रहकर लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस और रिमोट सेंसिंग के जरिए सीमा पार की हर हरकत पर 24 घंटे पैनी नजर रखेगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद रक्षा बजट में हुई थी 15% की भारी बढ़ोतरी

सशस्त्र बलों का यह आधुनिकीकरण केंद्र सरकार की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत फरवरी 2026 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देश के रक्षा बजट में 15 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि की गई थी।

“वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस विशाल बजट में से विशेष रूप से 2.19 लाख करोड़ रुपये केवल ‘पूंजीगत व्यय’ (Capital Outlay) के लिए आरक्षित हैं। इसी पूंजीगत कोष का उपयोग आज नए लड़ाकू विमानों, अत्याधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों, मिसाइल प्रणालियों, स्मार्ट हथियारों और कामिकाजे ड्रोन जैसी मारक तकनीकों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारतीय सेना में शामिल करने के लिए किया जा रहा है।”

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि के रक्षा प्रस्तावों को एकमुश्त हरी झंडी मिलने से न सिर्फ घरेलू रक्षा उत्पादन (Indigenous Defence Production) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत की सैन्य धाक और रणनीतिक स्वायत्तता कई गुना बढ़ जाएगी।


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Topics: भारतीय सेना आधुनिकीकरणरक्षा बजट 2026रक्षा खरीद परिषद हथियार मंजूरीDefence Acquisition Council ₹52000 Croreराजनाथ सिंह डीएसी बैठक
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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