बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में स्थित एक बड़े राज्य अनुदानित (State-Aided) मदरसे में गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर के पीरबटावन इलाके में संचालित मदरसा दारूल उलूम पीरबटावन के खिलाफ मिली गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
एक सामाजिक कार्यकर्ता की लिखित शिकायत पर त्वरित एक्शन लेते हुए शासन द्वारा दो सदस्यीय विशेष जांच समिति (2-Member Probe Committee) का गठन किया गया है। इस समिति को तय समय सीमा के भीतर बिंदुवार जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके बाद मदरसे के प्रबंधन पर बड़ी कानूनी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
मदरसा दारूल उलूम पीरबटावन जांच मामला
गूगल डिस्कवर और पाठकों की त्वरित समझ के लिए इस पूरे शिकायती प्रकरण, शासन के आदेश और जांच के दायरे में आए मुख्य बिंदुओं का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में संकलित है:
| मदरसा एवं जांच का मुख्य आयाम | शासन स्तर का आधिकारिक एवं विधिक विवरण |
|---|---|
| संबंधित मदरसे का नाम | मदरसा दारूल उलूम पीरबटावन (राज्यानुदानित) |
| मुख्य भौगोलिक स्थिति (Location) | जनपद बाराबंकी, उत्तर प्रदेश (UP) |
| शिकायती पत्र की आधिकारिक तिथि | 25 मई 2026 |
| जांच समिति की रूपरेखा | शासन द्वारा गठित दो सदस्यीय विशेष विधिक समिति |
| रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा | आदेश जारी होने के एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर |
कोरोना काल में चहेतों को बांटी नौकरियां! परिवारवाद और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा शासन को सौंपे गए शिकायती पत्र में इस मदरसे के भीतर चल रहे खेल के कई चौंकाने वाले पहलुओं को उजागर किया गया है। मदरसे के प्रबंधन और शिक्षकों की नियुक्तियों पर मुख्य रूप से निम्नलिखित संगीन आरोप लगाए गए हैं-
- फर्जी प्रबंध समिति का संचालन: आरोप है कि मदरसे को चलाने के लिए कागजों पर एक पूरी तरह से अवैध और फर्जी प्रबंध समिति (Management Committee) का गठन किया गया है, जो नियमों को ताक पर रखकर सरकारी अनुदान का बंदरबांट कर रही है।
- कोरोना काल में बैकडोर नियुक्तियां: सबसे गंभीर आरोप वैश्विक महामारी कोरोना काल (COVID-19 Period) के दौरान का है। दावा किया गया है कि आपदा के समय का नाजायज फायदा उठाते हुए मदरसे में चार शिक्षकों की कथित रूप से पूरी तरह अवैध नियुक्तियां की गईं। इन नियुक्तियों में नियमों का पालन करने के बजाय घोर ‘परिवारवाद’ और चहेतों को उपकृत करने का खेल खेला गया।
- मानकों का खुला उल्लंघन: शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह मदरसा बिना किसी निर्धारित शैक्षणिक और ढांचागत मानकों के संचालित हो रहा है।
- दुकानों के ऊपर मदरसा: नियमों के विपरीत, यह पूरा राज्यानुदानित मदरसा व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र यानी कमर्शियल दुकानों के ऊपर संचालित किया जा रहा है, जो सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल दोनों के लिहाज से नियमों के खिलाफ है।
शिकायतकर्ता का पक्ष सुनकर 7 दिनों में साक्ष्य जुटाने का कड़ा निर्देश
मामले की संवेदनशीलता और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन के संबंधित विभाग ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। शासन की ओर से जारी आधिकारिक निलंबन व जांच आदेश में दो सदस्यीय समिति को स्पष्ट कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
“गठित दो सदस्यीय समिति को निर्देशित किया जाता है कि संदर्भित शिकायती प्रार्थना पत्र दिनांक 25-05-2026 में उल्लिखित बिंदुवार (Point-by-Point) शिकायतों की जांच पूरी तरह नियमानुसार करें। जांच के दौरान शिकायतकर्ता का पक्ष अनिवार्य रूप से सुना जाए और उनके द्वारा प्रस्तुत आवश्यक साक्ष्यों का संकलन (Evidence Collection) करते हुए अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर हर हाल में शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए।” – शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अंश
इस आदेश के बाद बाराबंकी के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और मदरसा शिक्षा परिषद के गलियारों में हड़कंप मच गया है। जांच समिति ने साक्ष्यों को खंगालने और नियुक्तियों से जुड़े सेवा अभिलेखों (Service Records) को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई रसूखदार चेहरों का बेनकाब होना और उनके खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज होना तय है।
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