नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार जुलाई यानी शनिवार को राजस्थान में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन किया। यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार की साझेदारी से विकसित की गई है। इसमें एचपीसीएल की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह रिफाइनरी केवल तेल साफ नहीं करेगी, बल्कि बाड़मेर के बेसिन से निकलने वाले कच्चे तेल को सीधे इस्तेमाल के योग्य बनाएगी, जिससे परिवहन का खर्च बचेगा और देश में स्वच्छ ईंधन (BS-VI ग्रेड पेट्रोल-डीजल) की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित होगी। यह ग्रीनफील्ड रिफाइनरी 90 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाली है। इसे 79,450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है।
10 बिंदुओं में समझिए इस रिफाइनरी का महत्व
- यह रिफाइनरी हर साल 9 मिलियन मीट्रिक टन (90 लाख टन) कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रखती है।
- पचपदरा में हर दिन करीब 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल की सफाई की जाएगी जो न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देशों की कुल क्षमता से भी अधिक है।
- तेल के साथ-साथ यहां हर साल 2.4 मिलियन मीट्रिक टन मूल्यवान पेट्रोकेमिकल उत्पादों का निर्माण होगा।
- इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है। यानी ये दुनिया की सबसे उन्नत रिफाइनरियों में से एक है।
- यह प्लांट पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से BS-VI ग्रेड के पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करेगा।
- प्लांट के चालू होने पर भारत के सालाना तेल आयात बिल में अरबों रुपये की बचत का अनुमान लगाया जा रहा है।
- रिफाइनरी के निर्माण में 16 लाख घन मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया जो बुर्ज खलीफा के निर्माण में लगे कंक्रीट से लगभग पांच गुना अधिक है।
- इस रिफाइनरी को बनाने में 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग हुआ जो एफिल टॉवर में इस्तेमाल स्टील से करीब 40 गुना अधिक है।
- यह रिफाइनरी लगभग 4,400 एकड़ क्षेत्र में फैली है। इसका परिसर करीब 32 किलोमीटर की दूरी तक फैला है।
- इसमें कुल 13 प्रसंस्करण इकाई हैं। इनमें नौ रिफाइनरी और चार पेट्रोकेमिकल इकाई शामिल हैं।
- इस रिफाइनरी के निर्माण के दौरान करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। यह रिफाइनरी आगे भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेगी।
- यह ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी पश्चिमी भारत ईंधन उत्पादन और वितरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
- आम तौर पर पुरानी रिफाइनरियों में केवल पेट्रोल, डीजल और केरोसिन ही बनता था। लेकिन पचपदरा की सबसे बड़ी खासियत इसकी पेट्रोकेमिकल यूनिट है। जो प्लास्टिक, टेक्सटाइल, पेंट, फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयों) और कॉस्मेटिक्स उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल तैयार करेगी।
- इसके कंट्रोल सिस्टम और हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान और यूरोप की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
- आत्मनिर्भर भारत के तहत इस रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम और भारी टैंक भारत में ही बनाए गए हैं।
















