हलाला समाज का काला पन्ना : इलाहाबाद हाई कोर्ट से पीड़िता के पूर्व शौहर, चाचा और मौलाना की याचिकाएं खारिज
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हलाला समाज का काला पन्ना : इलाहाबाद हाई कोर्ट से पीड़िता के पूर्व शौहर, चाचा और मौलाना की याचिकाएं खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निकाह, हलाला और ट्रिपल तलाक पर  टिप्पणी करते हुए कहा  कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

Written byसुनील रायसुनील राय
Jul 3, 2026, 11:53 pm IST
inभारत, उत्तर प्रदेश
कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

यूपी के जनपद अमरोहा के सैदनागली थाना अंतर्गत पीड़िता ने एफआईआर दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि बालिग होने से पहले निकाह किया गया। इसके बाद ट्रिपल तलाक, हलाला और फिर दुबारा निकाह कराने के नाम पर  लगातार यौन शोषण किया जाता था। एफआईआर दर्ज होने के बाद अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में एफआईआर  रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं। उच्च न्यायालय ने इन याचिकाओं को  खारिज कर दिया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों की भूमिका कानून के खिलाफ दिखाई दे रही है।  जांच के इस प्रारंभिक चरण में एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और विवेचना जारी रहेगी।

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व शौहर, चाचा, मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निकाह, हलाला और ट्रिपल तलाक पर  टिप्पणी करते हुए कहा  कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती है। ऐसी प्रथाएं समाज का “काला पन्ना” हैं, जो संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध हैं। ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में पीड़िता को  अजहर नवाज के साथ निकाह करने के लिए विवश किया गया था। तब पीड़िता की  उम्र केवल 15 वर्ष थी। अभियुक्त अजहर नवाज ने वर्ष 2016 के जनवरी माह में पीड़िता को ट्रिपल तलाक दे दिया। कुछ समय बाद अजहर नवाज ने पीड़िता से पुनः निकाह   करने की बात की। वर्ष 2016 के नवंबर में उसने मौलाना कयूम के साथ हलाला  कराया और फिर अभियुक्त मौलाना से तलाक करा कर अजहर नवाज ने निकाह किया।

पहली बार जब हलाला किया गया तो पीड़िता की उम्र 16 वर्ष थी। पीड़िता ने  मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि वह उस समय नाबालिग थी और उस समय  हलाला का मतलब भी नहीं मालूम  था। पीड़िता ने  कहा कि उसके साथ हलाला कि आड़ में अभियुक्त मौलाना कयूम ने दुष्कर्म किया था। अजहर नवाज ने पीड़िता के साथ दुबारा निकाह किया और  उसका फिर  4 वर्ष बाद ट्रिपल तलाक दे दिया। इसके बाद अजहर नवाज ने दूसरी शादी कर ली।

उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि जब पीड़िता नाबालिग थी, तब उसके साथ दुष्कर्म हुआ था। उसके बाद एक घटना के दौरान सामूहिक दुष्कर्म भी हुआ था, जिसे कथित तौर पर दूसरे हलाला के नाम पर छिपाया गया। पीड़िता की ओर से लगाये गए आरोपों की पूरी जांच की आवश्यकता है।

Topics: इलाहाबाद उच्च न्यायालयहलालाअमरोहा हलाला मामलातीन तलाक
सुनील राय
सुनील राय
पाञ्चजन्य ब्यूरो चीफ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश [Read more]
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