
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया सेशेल्स दौरे के दौरान उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान ‘गार्जियन ऑफ़ द ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया गया। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते किए गए। लेकिन, प्रधानमंत्री को विदेशों में मिल रहे सम्मान पर न केवल विदेशी, बल्कि देश का विपक्ष भी तिलमिला रहा है।
प्रधानमंत्री के सेशेल्स दौरे के दौरान चाहिए था कि मीडिया और विपक्ष अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर चर्चा करे, लेकिन दुखद ये है कि देश का विपक्ष बाल की खाल निकाल रहा है। द गॉर्जियन में इसको लेकर एक रिपोर्ट छापी गई है। इसे दिल्ली स्थित उसके पत्रकार हन्नाह एलिस पीटरसन ने लिखा है। इसमें हर मुद्दे नुक्स निकालने वाली कांग्रेस के बयानों को विदेशी मीडिया ने मुद्दा बनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को खराब करने की कोशिश की।
इस लेख में लिखा गया, इस अवार्ड में कई चीजें अजीब थीं, सर्टिफिकेट में “republic” की जगह “repubblic” था और “Seychelles” की जगह “Seycheeles” लिखा गया था। पत्रकार का दावा है कि इस अवार्ड को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से ठीक तीन दिन पहले ही तैयार किया गया था और इसे पाने वाले वे पहले और एकमात्र व्यक्ति थे।
विदेशी मीडिया का दावा यह भी है कि पीएम मोदी को दिए गए सम्मान के दौरान प्रदान किया गया सर्टिफिकेट AI-जनरेटेड था। हालांकि, अजीब ये है कि जो विदेशी मीडिया इतने बड़े-बड़े दावे अपने लेख में कर रहा है, उसकी पुष्टि के लिए एक भी तथ्य नहीं दिया।
जैसा कि पहले से अपेक्षित था कि अगर कोई विदेशी मीडिया देश के नाम पर कीचड़ उछाले तो भारत का विपक्ष उस कीचड़ को फैलाने में जी जान लगा देता है। ऐसा ही इस बार भी हुआ। जैसे ही विदेशी मीडिया ने भारत के प्रधानमंत्री को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा तो कांग्रेस ने इस हाथों हाथ लिया। कांग्रेस ने एक्स के जरिए लिखा, “उन्हें (मोदी को) कोई भी अवॉर्ड दे दो, वे दौड़े चले आएँगे।”
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर कहा, “वे इतनी जल्दी में थे कि उन्होंने ‘रिपब्लिक ऑफ़ सेशेल्स’ का आधिकारिक नाम भी गलत लिख दिया।”
बशर्मी की हद ये है कि विरोधी प्रधानमंत्री को विदेशों में मिले सम्मानों का जिक्र करते हुए मखौल बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए दावा किया गया कि इजरायल की यात्रा से कुछ दिन पहले, इजरायली संसद ने एक अवार्ड बनाया और पीएम मोदी को देश के सबसे बड़े सम्मानों में से एक ‘मेडल ऑफ़ द नेसेट’ दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी उन्हें अवार्ड पाने का लालायित व्यक्ति साबित करने पर तुले हैं। इसीलिए ये प्रधानमंत्री को विदेशों में दिए गए सम्मानों का जिक्र इस लेख में कर रहे हैं।
वहीं विदेशी मीडिया की भारत विरोधी इस हरकत पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी “ग्रीन लीडरशिप” (पर्यावरण के प्रति नेतृत्व) के लिए यह अवॉर्ड मिलना “भारत के लिए गर्व का क्षण” था। बीजेपी का कहना है कि ये पुरस्कार मोदी के अंतरराष्ट्रीय कद की पहचान हैं। जानकारों का कहना है कि ये सब दुनिया में भारत के बढ़ते कद को दबाने और देश की छवि को धूमिल करने के लिए किया जा रहा है।