जयपुर, राजस्थान। भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, जनजातीय चेतना और राष्ट्रीय चिंतन के सबसे प्रतिष्ठित और वृहद राष्ट्रीय मंच ‘लोकमंथन 2026’ की मेजबानी इस बार गुलाबी नगरी जयपुर करने जा रही है। इस त्रिदिवसीय भव्य राष्ट्रीय महोत्सव का आयोजन आगामी 4, 5 एवं 6 दिसंबर 2026 को जयपुर में किया जाएगा।
लोकमंथन 2026 की तैयारियों को गति देते हुए बुधवार, 1 जुलाई को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक विशेष उच्च स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में स्वागत समिति एवं आयोजन समिति की औपचारिक घोषणा के साथ ही देश के इस बड़े सांस्कृतिक महाकुंभ की तैयारियों का शंखनाद हो जाएगा।
लोकमंथन के मंच पर जुटेंगे दिग्गज: एक नज़र में अतिथियों की सूची
प्रज्ञाप्रवाह के प्रचार प्रमुख डॉ. राजेश मेठी के अनुसार, 1 जुलाई को होने वाले प्रारंभिक शुभारंभ कार्यक्रम में देश और राज्य के शीर्ष नीति-निर्माता और सांस्कृतिक अगुआ उपस्थित रहेंगे, जिनका विवरण इस प्रकार है:
| मुख्य अतिथि / वक्ता का नाम | प्रशासनिक पद / राष्ट्रीय सांगठनिक दायित्व |
|---|---|
| भजनलाल शर्मा | माननीय मुख्यमंत्री, राजस्थान (मुख्य अतिथि) |
| जे. नंदकुमार | अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह (मुख्य वक्ता) |
| गजेंद्र सिंह शेखावत | माननीय केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, भारत सरकार |
| दिया कुमारी | माननीय उपमुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार |
| डॉ. प्रेमचंद बैरवा | माननीय उपमुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार |
| तगाराम भील | पद्मश्री सम्मानित प्रख्यात लोक कलाकार (विशिष्ट अतिथि) |
| डॉ. रमेश अग्रवाल | क्षेत्र संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) |
इस वर्ष का मुख्य विषय: “हम भारत के लोग”
इस वर्ष आयोजित हो रहे लोकमंथन 2026 की वैचारिक रीढ़ की हड्डी इसकी अनूठी थीम को बनाया गया है। इस बार का मुख्य विषय “हम भारत के लोग” रखा गया है, जो हमारे देश की लोकतांत्रिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक जड़ों को सीधे तौर पर परिभाषित करता है।
“यह त्रिदिवसीय लोकमंथन महासमागम भारत की प्राचीन लोक परंपराओं, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सुदूर वनांचलों के जनजातीय ज्ञान, सनातन भारतीय ज्ञान परंपरा तथा मूल राष्ट्रीय जीवन मूल्यों पर एक व्यापक और समावेशी राष्ट्रीय विमर्श का जीवंत मंच बनेगा। इस विमर्श के जरिए उन विचारों को मुख्यधारा में लाया जाएगा जो भारत को वैचारिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हैं।”
क्या है लोकमंथन 2026 का मुख्य उद्देश्य?
इस ऐतिहासिक समागम के दूरगामी लक्ष्यों और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है:
- विद्वानों का समागम: इस महाआयोजन में देश भर के शीर्षस्थ विद्वान, प्रबुद्ध शिक्षाविद, गंभीर शोधकर्ता, विभिन्न कलाओं के धर्मी, मूर्धन्य साहित्यकार, जमीनी लोक कलाकार और जनजातीय समाज के प्रतिनिधि एक छत के नीचे जुटेंगे।
- भारतीय दृष्टि से विमर्श: लोकमंथन का प्राथमिक उद्देश्य पूरी तरह भारतीय और देशज दृष्टि से समकालीन राष्ट्रीय विषयों पर एक सकारात्मक और सार्थक संवाद को आगे बढ़ाना है।
- लोक परंपराओं का विस्तार: आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच भारत की लुप्तप्राय हो रही अनूठी लोक विधाओं और पारंपरिक ज्ञान को समाज के युवा और विविध वर्गों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
- वैचारिक पुनरुत्थान: यह भव्य आयोजन भारत की सांस्कृतिक चेतना, चिरंतन लोकबोध और मूल राष्ट्रचिंतन को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
जयपुर में होने जा रहा यह आयोजन न केवल राजस्थान के सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism) को वैश्विक पटल पर एक नई ऊंचाई देगा, बल्कि ‘स्व’ पर आधारित भारतीय विमर्श को भी वैश्विक बौद्धिक जगत में मजबूती से स्थापित करेगा। 1 जुलाई को होने वाली स्वागत समिति की घोषणा के बाद से ही आयोजन के मुख्य वेन्यू और देश भर के संभागियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी जाएगी।

















