भुवनेश्वर: ओडिशा में जारी नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। मलकानगिरि जिले के घने जंगलों में छिपाकर रखे गए माओवादियों के भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक, संचार उपकरण तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री का विशाल जखीरा बरामद किया गया है। 28 जून को हुई यह कार्रवाई मलकानगिरि जिले में जून महीने के दौरान तीसरी बड़ी बरामदगी है, जबकि पिछले तीन सप्ताह में पूरे ओडिशा में यह सातवां बड़ा माओवादी हथियार भंडार बरामद किया गया है। इससे राज्य में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक और खुफिया जानकारी आधारित नक्सल विरोधी अभियान की सफलता स्पष्ट होती है।
यह बरामदगी जिला स्वयंसेवी बल (डीवीएफ) द्वारा कालिमेला थाना क्षेत्र के गुंटाबेड़ा और कदमगुड़ा के घने जंगलों में चलाए गए विशेष तलाशी अभियान के दौरान हुई। यह अभियान विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं तथा आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से लगातार पूछताछ के दौरान प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर शुरू किया गया था।
रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में कार्रवाई
सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया यह अभियान ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा से लगे उस संवेदनशील वन क्षेत्र में संचालित किया गया, जो आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मोटुगुडेम और डोंकराई थाना क्षेत्रों से सटा हुआ है। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह इलाका लंबे समय से माओवादी गतिविधियों, आवाजाही और हथियारों के भंडारण के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल होता रहा है।

भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामग्री में दो सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), दो देशी पिस्तौल, एक राइफल बैरल, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), एक क्लेमोर माइन, बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) के गोले, बड़ी संख्या में जीवित कारतूस, गोला-बारूद रखने वाले पाउच, सात वॉकी-टॉकी उनके सहायक उपकरणों सहित, 45 पेन ड्राइव, एक हार्ड डिस्क, बैटरियां, पावर बैंक, प्राथमिक उपचार किट तथा विस्फोटक सामग्री के भंडारण एवं निर्माण में उपयोग होने वाले कई उपकरण शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जंगल के भीतर भूमिगत रूप से छिपाए गए स्थानों से विस्फोटकों से संबंधित लगभग 37 प्रकार की सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि यह हथियार और विस्फोटक प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी (एओबीएसजेडसी) के कैडरों के थे। माना जा रहा है कि इन हथियारों को भविष्य में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमले करने के उद्देश्य से जंगलों में छिपाकर रखा गया था।
एसपी ने बताया बड़ी उपलब्धि
मलकानगिरि के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनोध पाटिल एच ने एक प्रेस वार्ता में इस कार्रवाई को वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण सफलता बताया। उन्होंने कहा, “आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से लगातार पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और उनके खुलासों के आधार पर डीवीएफ की एक विशेष टीम को कालिमेला थाना क्षेत्र के गुंटाबेड़ा और कदमगुड़ा जंगलों में भेजा गया। तलाशी अभियान के दौरान टीम ने भूमिगत रूप से छिपाए गए एक बड़े हथियार भंडार का पता लगाया, जहां से दो एसएलआर, देशी पिस्तौल, एक आईईडी, क्लेमोर माइन, बीजीएल लॉन्चर, ग्रेनेड तथा 37 प्रकार की अन्य सामग्री बरामद की गई।”

उन्होंने बताया कि जून महीने में मलकानगिरि जिले में यह तीसरा बड़ा माओवादी हथियार भंडार बरामद हुआ है। इससे पहले 9 जून को मथिली क्षेत्र से इंसास राइफल, आईईडी और ग्रेनेड का जखीरा बरामद किया गया था। इसके बाद 15 जून को पोडिया क्षेत्र में चलाए गए अभियान में स्टेन कार्बाइन, एक पिस्तौल, आईईडी और अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (यूबीजीएल) ग्रेनेड बरामद किए गए थे।
माओवादी मुक्त घोषित होने के बावजूद सतर्क हैं सुरक्षा बल
पुलिस अधीक्षक ने दोहराया कि मलकानगिरि जिला 31 मार्च तक सक्रिय माओवादी उपस्थिति से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं क्योंकि माओवादी संगठन के बचे हुए सदस्य पीछे हटने से पहले जंगलों में हथियारों और विस्फोटकों के कई गुप्त भंडार छिपाकर गए होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि विशेष अभियान समूह (एसओजी) और जिला स्वयंसेवी बल (डीवीएफ) भविष्य में भी संवेदनशील वन क्षेत्रों में खुफिया सूचनाओं के आधार पर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाते रहेंगे ताकि छिपाए गए हथियार, विस्फोटक और अन्य रसद सामग्री को बरामद कर माओवादी गतिविधियों के किसी भी संभावित पुनरुत्थान को रोका जा सके।
तीन सप्ताह में ओडिशा में सातवीं बड़ी बरामदगी
मलकानगिरि की यह सफलता 21 जून को कोरापुट जिले के बैपारीगुड़ा क्षेत्र में हुई एक अन्य बड़ी कार्रवाई के ठीक एक सप्ताह बाद सामने आई है। उस अभियान में भी आत्मसमर्पण कर चुके एक माओवादी की सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने जंगलों से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए थे। ताजा बरामदगी के साथ ही पिछले तीन सप्ताह के दौरान ओडिशा में कुल सात बड़े माओवादी हथियार भंडार बरामद किए जा चुके हैं। इनमें मलकानगिरि जिले में तीन, कंधमाल जिले में दो, रायगढ़ा जिले में एक तथा कोरापुट जिले में एक बड़ी बरामदगी शामिल है।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि लगातार मिल रही इन सफलताओं से स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियों की मजबूत खुफिया व्यवस्था, समन्वित अभियान तथा आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से प्राप्त सटीक सूचनाएं नक्सल विरोधी अभियान को प्रभावी बना रही हैं। उनका मानना है कि हालांकि राज्य के कई जिलों में सक्रिय माओवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन जंगलों में छिपे हथियारों के भंडार इस बात का संकेत हैं कि उग्रवादी ढांचे के अवशेष अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने दोहराया है कि पूर्व में माओवादी प्रभाव वाले सभी क्षेत्रों में तलाशी अभियान निरंतर जारी रहेंगे ताकि छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों को पूरी तरह बरामद कर किसी भी प्रकार के उग्रवादी पुनर्गठन की संभावना को समाप्त किया जा सके। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि खुफिया सूचनाओं पर आधारित ऐसे अभियान भविष्य में भी ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास को और अधिक मजबूत करेंगे।













