माओवादियों के हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद, सुरक्षा बलों को मिली सफलता
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माओवादियों के हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद, सुरक्षा बलों को मिली सफलता

ओडिशा में माओवाद के बचे-खुचे नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jul 6, 2026, 01:31 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर। ओडिशा में माओवाद के बचे-खुचे नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। कोरापुट जिले के बोइपारिगुड़ा थाना क्षेत्र के तेंतुलीगुम्मा जंगल में छिपाकर रखे गए माओवादियों के हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटकों के बड़े जखीरे को बरामद किया गया है। खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए इस अभियान को ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के लॉजिस्टिक और परिचालन तंत्र को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले और गिरफ्तार किए गए माओवादी कैडरों से पूछताछ के दौरान मिली महत्वपूर्ण सूचनाओं के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस बरामदगी से बड़ी मात्रा में घातक हथियार और विस्फोटक भविष्य में सुरक्षा बलों या आम नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल होने से पहले ही जब्त कर लिए गए।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली अहम जानकारी कोरापुट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रोहित वर्मा ने बताया कि हाल के दिनों में गिरफ्तार और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से लगातार पूछताछ की जा रही थी। पूछताछ के दौरान उन्होंने उन स्थानों की जानकारी दी, जहां संगठन ने वर्षों पहले हथियार, विस्फोटक और अन्य युद्ध सामग्री छिपाकर रखी थी। एसपी ने बताया कि 25 और 26 जून को एक माओवादी की गिरफ्तारी तथा दूसरे के आत्मसमर्पण के बाद उनसे गहन पूछताछ की गई। इसी दौरान उन्होंने जंगलों में बनाए गए गुप्त हथियार भंडारों की जानकारी दी।

इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बल लगातार ऐसे ठिकानों की तलाश कर रहे हैं ताकि भविष्य में इन हथियारों का दोबारा इस्तेमाल न हो सके। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से प्राप्त खुफिया जानकारी अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे प्रभावी साधनों में से एक बन गई है। इसी के जरिए वर्षों से दुर्गम जंगलों में छिपाए गए हथियारों के भंडार तक पहुंच संभव हो रही है। भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद तेंतुलीगुम्मा के घने जंगल में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की। बरामद सामग्री में एक देसी रिवॉल्वर, छह देसी बंदूकें, अलग-अलग क्षमता के 11 टिफिन बम (आईईडी), 25 डेटोनेटर, लगभग 20 मीटर कॉर्डेक्स वायर, .38 बोर की छह जिंदा गोलियां, दो कैमरा फ्लैशलाइट तथा बड़ी मात्रा में बारूद शामिल है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद किए गए आईईडी अत्यंत शक्तिशाली थे और इनका इस्तेमाल सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने अथवा दूरदराज के इलाकों में आम लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता था। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हथियारों और विस्फोटकों को जंगल के भीतर बेहद सावधानी से जमीन में छिपाकर रखा गया था ताकि आवश्यकता पड़ने पर माओवादी उन्हें दोबारा निकालकर इस्तेमाल कर सकें। आंध्र-ओडिशा सीमा विशेष जोनल समिति से जुड़ा होने का संदेह जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा हथियार भंडार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की आंध्र-ओडिशा सीमा विशेष जोनल समिति (एओबीएसजेडसी) के कैडरों का था। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण जब माओवादी अपने पुराने गढ़ों से पीछे हटने लगे, तब उन्होंने कई स्थानों पर भूमिगत हथियार भंडार तैयार कर दिए थे, ताकि भविष्य में संगठन दोबारा सक्रिय होने की स्थिति में उनका उपयोग किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे सभी छिपे हुए हथियार भंडारों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना माओवादियों की दोबारा संगठित होने की संभावना को समाप्त करने के लिए बेहद जरूरी है। पखवाड़े में दूसरी बड़ी सफलता पिछले दो सप्ताह के भीतर कोरापुट जिले में माओवादियों के हथियारों के जखीरे की यह दूसरी बड़ी बरामदगी है।

इससे पहले 22 जून को बोइपारिगुड़ा थाना क्षेत्र के बड़लीपहाड़ जंगल से भी सुरक्षा बलों ने हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद किया था। उस अभियान के दौरान एक इंसास राइफल, भारी मात्रा में गोला-बारूद, आईईडी और कई अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी, जिन्हें माओवादी अपने पीछे छोड़कर चले गए थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लगातार हो रही इन बरामदगियों से यह स्पष्ट होता है कि माओवादियों ने वर्षों पहले सीमा से लगे जंगलों में कई गुप्त हथियार भंडार तैयार किए थे, जिन्हें अब एक-एक कर खोजकर नष्ट किया जा रहा है। कोरापुट घोषित हो चुका है माओवादी मुक्त इस बरामदगी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी वर्ष 31 मार्च को कोरापुट जिले को आधिकारिक रूप से “माओवादी मुक्त जिला” घोषित किया जा चुका है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार के माओवाद उन्मूलन अभियान के तहत हासिल की गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए गए खुफिया अभियानों, कॉम्बिंग ऑपरेशन और माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण से जिले में माओवादी गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं। जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच एक माओवादी नेता गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य कैडर ने आत्मसमर्पण किया। इससे जिले में संगठन की परिचालन क्षमता काफी कमजोर हुई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि भले ही माओवादी गतिविधियों में भारी गिरावट आई हो, लेकिन पुराने समय में छिपाए गए हथियारों के भंडार अब भी समय-समय पर सामने आ रहे हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना होगा। तीन सप्ताह में आठ बड़े हथियार भंडार बरामद कोरापुट की यह कार्रवाई पूरे राज्य में चल रहे व्यापक माओवादी विरोधी अभियान का हिस्सा है। 28 जून को मलकानगिरि जिले के घने जंगलों से भी सुरक्षा बलों ने हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद किया था। वह कार्रवाई भी एक आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी से मिली सूचना के आधार पर की गई थी।

ताजा बरामदगी के साथ पिछले तीन सप्ताह के दौरान ओडिशा में कुल आठ बड़े माओवादी हथियार भंडार पकड़े जा चुके हैं। इनमें से तीन मलकानगिरि, दो कंधमाल, दो कोरापुट और एक रायगढ़ा जिले से बरामद किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन लगातार सफलताओं से स्पष्ट है कि खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियान अब अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं और सुरक्षा बल व्यवस्थित तरीके से माओवादियों के पूरे लॉजिस्टिक नेटवर्क को ध्वस्त कर रहे हैं। अभियान रहेगा जारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण ओडिशा के जंगलों, विशेषकर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में माओवादी विरोधी अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिला स्वैच्छिक बल (डीवीएफ), स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) तथा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चला रहे हैं। इनका उद्देश्य छिपाए गए अन्य हथियारों का पता लगाना, माओवादियों की वित्तीय एवं हथियार आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करना और संगठन के पुनर्गठन की किसी भी संभावना को समाप्त करना है। एसपी रोहित वर्मा ने कहा कि सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। डीवीएफ, एसओजी और अन्य बल जंगलों में सक्रिय हैं, जबकि बीएसएफ सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखे हुए है।

माओवादियों के वित्तीय स्रोतों और हथियार आपूर्ति नेटवर्क की भी जानकारी जुटाई जा रही है तथा इन्हीं सूचनाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी खुफिया सूचनाओं के आधार पर अभियान जारी रहेंगे ताकि छिपे हुए हथियारों को बरामद किया जा सके, सहयोगी नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके और प्रतिबंधित संगठन को ओडिशा में दोबारा पैर जमाने का कोई अवसर न मिले। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक बरामद हथियार भंडार माओवादियों की परिचालन क्षमता को कमजोर करता है। राज्य पुलिस, विशेष माओवादी विरोधी इकाइयों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समन्वित अभियान से यह विश्वास मजबूत हुआ है कि ओडिशा में वामपंथी उग्रवाद के बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह समाप्त किया जा सकेगा। कैप्शन: कोरापुट जिले के तेंतुलीगुम्मा जंगल में सुरक्षा बलों द्वारा बरामद माओवादियों के हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटकों का जखीरा।

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