भुवनेश्वर: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘उद्यमी ओडिशा एमएसएमई कार्यक्रम’ के दौरान कई परिवर्तनकारी पहलों का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया और इसे राज्य की औद्योगिक प्रगति तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग के सहयोग से स्थापित ओडिशा महिला उद्यमिता मंच (Women Entrepreneurship Platform–Odisha Chapter) का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक संस्थागत व्यवस्था नहीं, बल्कि महिलाओं को राज्य के आर्थिक विकास का नेतृत्व प्रदान करने वाला एक व्यापक अभियान है। इस अवसर पर मंच की एक वर्षीय कार्ययोजना का भी विमोचन किया गया।
ओडिशा के विकास के केंद्र में महिलाएं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का लक्ष्य ऐसा ओडिशा बनाना है, जहां महिलाएं केवल रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाली बनें। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक बनेंगी और विकास की सहभागी ही नहीं, बल्कि उसकी नेतृत्वकर्ता भी होंगी। उन्होंने बताया कि WEP ओडिशा चैप्टर के माध्यम से मिशन शक्ति, एमएसएमई विभाग, स्टार्टअप ओडिशा, बैंकिंग संस्थानों तथा औद्योगिक संगठनों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इससे महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता, मेंटरशिप, कौशल विकास और बाजार तक पहुंच जैसी सभी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रमुख ‘सुभद्रा योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

महिला उद्यमिता और एमएसएमई क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति
मुख्यमंत्री ने आईआईएम संबलपुर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) तथा एआई आधारित वॉयस सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में महिला-प्रबंधित उद्यमों की संख्या 25 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई है, जो दो गुने से अधिक वृद्धि को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान अब लगभग 30 प्रतिशत है, जो इसे ओडिशा की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बनाता है।
इसके साथ ही, सुभद्रा योजना के लाभार्थियों के बैंक खातों में औसतन ₹6,887 की वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्तीय समावेशन और आर्थिक स्थिरता का सकारात्मक संकेत है।
राज्यभर में औद्योगिक आधारभूत संरचना का विस्तार
राज्य सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई औद्योगिक परियोजनाओं का शुभारंभ किया। बालासोर में ₹24.18 करोड़ की लागत से विकसित राइस मिलिंग क्लस्टर का उद्घाटन किया गया, जिससे राइस ब्रान ऑयल उत्पादन और कृषि आधारित मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। इसी प्रकार पहाला में ₹17.70 करोड़ की लागत से बनने वाले रसगुला क्लस्टर की आधारशिला रखी गई। इससे रसगुला उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 7,000 किलोग्राम से बढ़कर 11,000 किलोग्राम हो जाएगी, जिससे स्थानीय खाद्य उद्योग और पारंपरिक मिठाई व्यवसाय को नई गति मिलेगी।
इसके अलावा गंजाम और कालाहांडी जिलों में ₹10-10 करोड़ की लागत से दो मल्टी-प्रोडक्ट एमएसएमई पार्कों का उद्घाटन किया गया। इन पार्कों से छोटे एवं मध्यम उद्यमों को साझा आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में इंजीनियरिंग क्लस्टर, प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग क्लस्टर तथा काजू क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक मल्टी-प्रोडक्ट एमएसएमई पार्क स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
एमएसएमई क्षेत्र को मिल रही नई मजबूती
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से अब तक 4.32 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को लाभ मिला है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत लगभग 4,900 छोटे उद्यमों को ₹146 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है, जिनमें 42.5 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। इसके अलावा क्रेडिट गारंटी योजना के तहत ₹23,000 करोड़ से अधिक के बिना जमानत वाले ऋण वितरित किए गए हैं, जबकि CM-SRIM योजना के अंतर्गत सरकार ब्याज का भार वहन कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष ओडिशा का कुल निर्यात ₹95,568 करोड़ तक पहुंच गया, जो राज्य की निर्यात क्षमता में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।
2036 तक 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2036 तक ओडिशा को 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य दोहराते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति में एमएसएमई क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, नवाचार और उद्यमिता में निरंतर निवेश से राज्य को नई आर्थिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर “समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत” के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
मजबूत वित्तीय प्रबंधन के लिए ओडिशा की सराहना
कार्यक्रम में नीति आयोग के प्रतिनिधियों ने ओडिशा की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना में निवेश तथा मजबूत वित्तीय प्रबंधन के कारण ओडिशा ने Fiscal Health Index-2026 में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। साथ ही वस्त्र, पर्यटन और अन्य सनराइज सेक्टर्स में राज्य की तेज प्रगति को देखते हुए ओडिशा को “डायनेमिक ओडिशा” की संज्ञा दी गई।
समावेशी विकास की दिशा में साझा प्रयास
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि नया Women Entrepreneurship Platform महिला उद्यमियों के लिए एक समन्वित सहायता प्रणाली विकसित करेगा। इसके माध्यम से बैंक, उद्योग संगठन और सरकारी विभाग मिलकर महिलाओं को उद्यम स्थापित करने और विस्तार देने में सहयोग करेंगे। अधिकारियों ने हस्तशिल्प, कौशल विकास, होम-स्टे और प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों में नई साझेदारियों की भी जानकारी दी।

















