नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को कई नए और अहम सुराग मिले हैं। एजेंसी ने इस मामले में अपनी पूरक चार्जशीट दाखिल करते हुए तीन और लोगों को आरोपी बनाया है। एनआईए का कहना है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसकी तैयारी काफी समय पहले से की जा रही थी। जांच में सामने आए नए तथ्यों से पता चलता है कि इस साजिश के पीछे एक संगठित आतंकी नेटवर्क सक्रिय था।
डॉक्टर निकला साजिश का मास्टरमाइंड
एनआईए ने फरार चल रहे बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज, जमीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद भट को इस मामले में आरोपी बनाया है। एजेंसी के अनुसार, डॉ. मुजफ्फर इस पूरी साजिश का प्रमुख मास्टरमाइंड था। वह एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई कर चुका है और आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) इंटरिम का संस्थापक सदस्य भी बताया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में हुई एक गुप्त बैठक में इस आतंकी मॉड्यूल की नींव रखी गई थी। इसके बाद फरीदाबाद स्थित एक गुप्त ठिकाने पर टीएटीपी जैसे खतरनाक विस्फोटक तैयार किए गए। यहीं इनका परीक्षण और भंडारण भी किया गया।
एनआईए का दावा है कि इसी योजना के तहत 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास वाहन आधारित बम विस्फोट को अंजाम दिया गया, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई थी। जांच के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से संचालित यह आतंकी नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था। जमीर अहमद संगठन के आतंकियों तक हथियार, गोला-बारूद और नकदी पहुंचाने का काम करता था। वहीं तुफैल अहमद भट ने आतंकियों के लिए एके-47, क्रिंकोव राइफल, पिस्तौल और कारतूस की व्यवस्था की थी। एनआईए ने डॉ. मुजफ्फर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी ने बताया कि फोरेंसिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों, जियो-लोकेशन और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर मजबूत सबूत जुटाए गए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

















