पेरिस / मैड्रिड। पश्चिमी देशों में इन दिनों भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) ने हाहाकार मचा रखा है। पश्चिमी यूरोप का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस हफ्ते एक खतरनाक मौसमी परिघटना ‘हीट डोम’ (Heat Dome) की चपेट में है। कई यूरोपीय देशों में तापमान 40°C से लेकर 44°C के पार पहुंच चुका है, जिससे वहां की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।
दिन हो या रात, गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड लगातार ध्वस्त हो रहे हैं। तापमान बढ़ने के साथ-साथ उमस (Humidity) ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
क्या होता है हीट डोम? हीट डोम उच्च वायुमंडलीय दबाव (High Atmospheric Pressure) का एक ऐसा क्षेत्र होता है, जो आसमान में एक गर्म ढक्कन की तरह काम करता है। यह ढक्कन अपने नीचे उठने वाली गर्म हवा को बाहर नहीं निकलने देता और उसे एक ही जगह पर लॉक कर देता है। इसके चलते सूरज की लगातार मिलने वाली गर्मी से तापमान अचानक 45°C के करीब पहुंच जाता है।
यूरोप के अलग-अलग देशों में गर्मी का मीटर: आंकड़ों में देखें तबाही
‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी यूरोप में यह झुलसाने वाली गर्मी उत्तरी अफ्रीका की ओर से आ रही गर्म हवाओं के कारण पड़ रही है। इस मौसमी मार का पूरा सांख्यिकीय और भौगोलिक विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है-
| देश / प्रभावित क्षेत्र | दर्ज किया गया तापमान (2026) | मौसम विभाग का अलर्ट / मुख्य जमीनी प्रभाव |
|---|---|---|
| फ्रांस (पिसोस शहर) | 43.8°C | बुधवार (24 जून) फ्रांस के इतिहास का सबसे गर्म दिन बना; नदियों में डूबने से 40 की मौत। |
| स्पेन (मैड्रिड व अन्य) | 38°C से 40°C+ | हीटवेव के कारण मैड्रिड में 327 लोगों की मौत; ठंडे इलाके कैंटाब्रिया में भी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी। |
| ब्रिटेन (साउथ-वेस्ट इंग्लैंड) | 36.7°C (समरसेट में) | जून महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन; मध्य-दक्षिणी इंग्लैंड और वेल्स में ‘रेड अलर्ट’। |
| नीदरलैंड | 35°C+ | इतिहास में पहली बार देश के बड़े हिस्से में सबसे ऊंचे स्तर का ‘कोड रेड’ अलर्ट जारी। |
| जर्मनी (बैड बर्गजाबर्न) | न्यूनतम तापमान 26.2°C से नीचे नहीं गिरा | जर्मनी के इतिहास (जुलाई 2019) की सबसे गर्म रात के पुराने रिकॉर्ड की पूरी बराबरी। |
स्पेन में 327 मौतें, फ्रांस में गर्मी से बचने के चक्कर में 40 डूबे
स्पेन के ‘कार्लोस III हेल्थ इंस्टीट्यूट’ के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रविवार और गुरुवार के बीच महज कुछ ही दिनों के भीतर भीषण हीटवेव के चलते केवल मैड्रिड में ही 327 लोगों की मौत हो चुकी है। स्पेन के उत्तरी इलाके कैंटाब्रिया में, जो आम तौर पर अपनी हरियाली और ठंडे सुहावने मौसम के लिए जाना जाता है, वहां भी इस बार अटलांटिक तट के पास के तापमान ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
दूसरी ओर, फ्रांस के मौसम विभाग के अनुसार, देश के 30 मौसम केंद्रों पर बुधवार को मापा गया औसत तापमान 30°C रहा, जिसने बुधवार को फ्रांस के इतिहास का सबसे गर्म दिन बना दिया। गर्मी से तड़प रहे लोग राहत पाने के लिए प्रशासनिक चेतावनियों को दरकिनार कर नदियों और तालाबों में कूद रहे हैं।
फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू का बड़ा बयान:
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने अत्यंत चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि इस हफ्ते भीषण गर्मी के चलते ठंडे पानी में तैरने के चक्कर में कम से कम 40 लोगों की डूबने से मौत हो गई है। सबसे दुखद बात यह है कि डूबने की इन अधिकतर घटनाओं में देश के कम उम्र के युवा शामिल थे, जो अधिकारियों की सुरक्षा गाइडलाइंस की अनदेखी कर रहे थे।
एयर कंडीशनिंग (AC) न होना बनी सबसे बड़ी मुसीबत, जुलाई-अगस्त में बढ़ेगा खतरा
यूरोपीय देशों में इस कदर मौतों और हाहाकार के पीछे सबसे बड़ी व्यावहारिक वजह वहां के मकानों की बनावट और सुविधाओं की कमी है। चूंकि फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे देशों में आम तौर पर मौसम ठंडा या सामान्य रहता है, इसलिए यहां के अधिकतर घरों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर एयर कंडीशनिंग (AC) की कोई सुविधा नहीं है।
वहां की स्थानीय आबादी को ऐसी झुलसाने वाली गर्मी में रहने की बिल्कुल भी आदत नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अभी तो केवल जून का महीना खत्म हो रहा है, असली समस्या जुलाई और अगस्त में आ सकती है जब पश्चिमी यूरोप में गर्मी अपने चरम (Peak) पर पहुंच सकती है।











